Thursday, February 12, 2026
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उत्तम की प्रतीक्षा

Amritvani

एक बार स्वर्ग से घोषणा हुई कि भगवान फल बांटने आ रहे हैं। सभी लोग भगवान के प्रसाद के लिए तैयार हो कर लाइन लगा कर खड़े हो गए। एक छोटी बच्ची बहुत उत्सुक थी, क्योंकि वह पहली बार भगवान को देखने जा रही थी। अंत में प्रतीक्षा समाप्त हुई। बहुत लंबी कतार में जब उसका नम्बर आया तो भगवान ने उसे एक बड़ा और लाल सेब दिया।

लेकिन जैसे ही वह लाइन से बाहर निकली उसका सेब हाथ से छूट कर कीचड़ में गिर गया। बच्ची उदास हो गई। अब उसे दुबारा से लाइन में लगना पड़ेगा। दूसरी लाइन पहली से भी लंबी थी। अन्तत: वह बच्ची फिर से लाइन में लगी और अपनी बारी की प्रतीक्षा करने लगी। आधी कतार को सेब मिलने के बाद सेब खत्म होने लगे। अब तो बच्ची बहुत उदास हो गई।

लेकिन वह ये नहीं जानती थी कि भगवान के भंडार कभी खाली नही होते। जब तक उसकी बारी आई तो और भी नए सेब आ गए।  भगवान बच्ची के मन की बात जान गए। उन्होंने इस बार बच्ची को सेब देकर कहा कि पिछली बार वाला सेब एक तरफ से सड़ चुका था। तुम्हारे लिए सही नहीं था, इसलिए मैंने ही उसे तुम्हारे हाथों गिरवा दिया था। दूसरी तरफ लंबी कतार में तुम्हें इसलिए लगाया, क्योंकि नए सेब अभी पेड़ों पर थे।

उनके आने में समय बाकी था। इसलिए तुम्हें अधिक प्रतीक्षा करनी पड़ी। ये सेब अधिक लाल, सुंदर और तुम्हारे लिए उपयुक्त है। भगवान की बात सुनकर बच्ची संतुष्ट हो गई। हमारे किसी काम में विलंब हो रहा है तो उसे भगवान की इच्छा मान कर स्वीकार करें। भगवान अपने बच्चों को वही देंगे जो उनके लिए उत्तम होगा। ईमानदारी से अपनी बारी की प्रतीक्षा करे।और उस परमपिता की कृपा के लिए हर पल हर क्षण उसका धन्यवाद करें।

                                                                                              प्रस्तुति: राजेंद्र कुमार शर्मा


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