Thursday, May 7, 2026
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कंपनी पर मेहरबानी, सीएलटी पर एक्शन

नगर निगम के आधीन है डूडा विभाग। नगर निगम अधिकारियों की बिना स्वीकृति के कोई भी निर्णय डूडा के अधिकारी नहीं ले सकते। कांड तो अधिकारी करते हैं, गाज कर्मचारियों पर गिरती हैं। नगर निगम में भ्रष्टाचार है, आंकठ तक डूबा हुआ हैं, लेकिन क्या अफसरों की सहमति के बिना भ्रष्टाचार क्या कोई कर्मचारी कर सकता हैं। जब भ्रष्टाचार उजागर हो जाता है तो अधिकारी खुद की गर्दन बचाते हुए कर्मचारी की गर्दन पर तलवार चला देते हैं तथा अधिकारियों को साफ बचाकर ले जाते हैं। कर्मचारी विरोध करने की स्थिति में नहीं होता हैं, इसलिए कर्मचारी पर ही गाज गिरा दी जाती हैं। दोषी अधिकारी भी होता हैं, लेकिन उसे साफ बचाकर ले जाया जाता हैं। इसमें भी वैसा ही हो रहा हैं। कर्मचारी के भोलेपन का लाभ उठाकर भ्रष्टाचार के भेडिये अपनी गर्दन बचा लेते हैं। सीएलटी पर भी बर्खास्तगी की गाज एक उदाहरण हैं। इसमें अधिकारी तो बच गए, लेकिन मोहरा एक कर्मचारी को बना दिया गया।

  • पीएम आवास में भ्रष्टाचार, जांच आधिकारी की रिपोर्ट पर चल रही कार्रवाई

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक शहरी आवास योजना में भ्रष्टाचार तो पकड़ में जांच अधिकारी के आ गया, लेकिन जांच अधिकारी की रिपोर्ट के बाद भी वाप्कोस कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। आखिर कंपनी पर यह कैसी मेहरबानी की जा रही है? घालमेल वाप्कोस कंपनी का और एक्शन सीएलटी पर कर दी ग्रई। यह भी चर्चा का विषय बना हुआ हैं।

ड्राइंग कंपनी ने उपलब्ध नहीं कराई। ड्राइंग पर सीएलटी ने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया तो डूडा के अधिकारियों ने सीएलटी को ही अपना निशाना बना लिया। क्योंकि एक ड्राइंग पर चार हजार रुपये की रकम कंपनी को मिलती हैं। इसमें भी फर्जीवाड़ा चल रहा हैं। कंपनी ने ड्राइंग लाभार्थी को नहीं दी, इसका उल्लेख जांच अधिकारी ने किया हैं।

मकान बनकर तैयार है या फिर कागजों में मकान बन गए, लेकिन इनकी ड्राइंग कहां है कुछ पता नहीं है। ड्राइंग पर सीएलटी के हस्ताक्षर नहीं करने पर ही उनको बलि का बकरा बना दिया गया। कंपनी और अधिकारियों में बेचैनी की वजह भी ड्राइंग पर हस्ताक्षर नहीं करना बताया जा रहा हैं। वाप्कोस कंपनी को चार हजार रुपये प्रत्येक ड्राइंग पर मिलते हैं। इस तरह से बड़ी तादाद में ड्राइंग तैयार ही नहीं हुई, जो सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाई जा रहे हैं।

दरअसल, नगर निगम के अधिकारियों से डीएम ने शहरी पीएम आवास योजना की जांच कराई थी, ये जांच शासन के आदेश पर चल रही हैं, जिसमें 47 मकान ऐसे मिले जो धरातल पर है ही नहीं। लाभर्थियों को वाप्कोस कंपनी ने किसी तरह का ड्राइंग नहीं दिया। ड्राइंग की तो घालमेल रही है, साथ ही जियो टैगिंग में सबसे बड़ी घालमेल हुई है, जिसमें फर्जी जियो टैगिंग की बात सामने आई है।

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जांच अधिकारी ने डीएम को जो रिपोर्ट भेजी है, उसमें स्पष्ट किया है कि कंपनी ने जियो टैगिंग फर्जी की है, जिसमें व्यापक स्तर पर अनियमितता बरती गई है, लेकिन 10 बिंदुओं को लेकर जांच अधिकारी ने वाप्कोस कंपनी को ही जिम्मेदार ठहराया हैं, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जांच अधिकारी ने वाप्कोस कंपनी को जिम्मेदार ठहराया, उसके बाद भी अधिकारी उसी कंपनी पर मेहरबानी कर रहे हैं?

उस कंपनी के खिलाफ ब्लैक लिस्ट या अन्य कार्रवाई करने को कोई तैयार नहीं है। यह हाल तो उस प्रोजेक्ट का है, जिस पर सीधे निगाहें प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री रखते हैं। अब कहा जा रहा है कि अब शासन को कार्रवाई दिखाने के लिए सीएलटी पर एक्शन लिया गया है। सीएलटी को बर्खास्त कर दिया गया। हालांकि अभी इसकी पुष्टि अधिकृत रूप से नहीं की गई हैं। कंपनी के खिलाफ क्या कार्रवाई की यह भी स्पष्ट नहीं है।

उधर, यह भी बताया गया कि वाप्कोस कंपनी ने इस पूरे भ्रष्टाचार में गर्दन फंसती हुए देख अपने इंजीनियरों के इस्तीफे ले लिए हैं, ताकि ब्लैक लिस्ट की कार्रवाई से बचा जा सके। प्रशासनिक अधिकारियों के सामने वाप्कोस कंपनी ने सरेंडर कर दिया है, लेकिन जो भ्रष्टाचार हुआ है उसमें कंपनी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई प्रशासनिक स्तर से हो सकती हैं।

इससे पहले भी मेरठ में कंपनी ब्लैक लिस्ट की जा चुकी हैं। इस भ्रष्टाचार की शिकायत भाजपा के कैंट विधायक अमित अग्रवाल ने की थी, जिसके आधार पर इस पूरे प्रकरण की जांच पड़ताल व्यापक स्तर पर चल रही है। शासन को इसकी रिपोर्ट भेजी जानी बाकी हैं, जिसके बाद ही ये तय होगा कि भ्रष्टाचार में लिप्त वाप्कोस कंपनी के खिलाफ क्या एक्शन लिया गया।

पीएम आवास योजना में 3411 आवेदकों की होगी दोबारा जांच

पीएम आवास योजना के अंतर्गत महानगर क्षेत्र के 3411 आवेदकों की जांच से अधिकारी संतुष्ट नहीं हैं। इन सभी आवेदकों की जांच के लिए नगर निगम के 17 अधिकारियों को लगाया गया है। जिन्हें मध्य दिसंबर तक कार्य पूरा करने के लिए कहा गया है। डूडा के परियोजना अधिकारी चन्द्रभान वर्मा ने बताया कि मेरठ जनपद में 2017 से शुरू की गई इस योजना के अंतर्गत अभी तक 23798 आवेदन पत्र मिले हैं। जिनमें से 19800 को पहली किस्त जारी की जा चुकी है।

उन्होंने बताया कि महानगर क्षेत्र के 3411 आवेदनों की जांच को लेकर अधिकारी संतुष्ट नहीं हैं, इसी वजह से सभी की जांच दोबारा कराने का निर्णय लिया गया है। नगर निगम की ओर से की जा सही जांच के लिए 17 अधिकारियों को लगाया गया है। डूडा ने दिसंबर के मध्य तक जांच कार्य पूर्ण कराने की अपेक्षा की है। उन्होंने बताया कि उच्चाधिकारियों से मिले दिशा निर्देश के अनुसार फिलहाल वित्तीय वर्ष 2022-23 में नए आवेदन रोक दिए गए हैं।

नए वित्तीय वर्ष में आगामी गाइडलाइन के अनुसार कार्य किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके अलावा स्वनिधि योजना के अंतर्गत जनपद में अब तक 34 हजार 598 लोगों को 10-10 हजार रुपये का ऋण वितरित किया गया है। वे और उनकी टीम लाभार्थियों से मिलकर और बैंक अधिकारियों से मिलकर सामंजस्य स्थापित करने का काम करते हैं। इस योजना के अंतर्गत अब तक दूसरे चरण में 3739 को 20-20 हजार रुपये का लोन दिया गया है। अलबत्ता तीसरे चरण में 50 हजार रुपये का लोन दिए जाने की पात्रता में अभी केवल 12 लाभार्थी आ सके हैं।

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