Friday, March 20, 2026
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नहीं मिला इंसाफ तो खा लिया जहर

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में जहां प्रदेश की राज्यपाल बेटियों को आगे आने के लिये प्रेरित कर रही थी और बता रही थी कि बेटियों को ही क्यों मरना पड़ता है। इसके लिये लोगों को दहेज का विरोध करना चाहिये। वहीं, दूसरी तरफ जनपद में महिलाओं हो या युवतियां जुल्म का शिकार हो रही थी। परीक्षितगढ़ की एक विवाहिता को पुलिस से न्याय न मिलने पर थाने के सामने जहर खाने को मजबूर होना पड़ा। सरधना में एक विवाहिता की गला दबाकर हत्या कर दी गई और उसे सुसाइड का रूप देने का प्रयास किया गया। विवि से थोड़ी दूर हाईस्कूल की छात्रा को खुद को गोली मारकर सुसाइड करने के लिये मजबूर होना पड़ा। आधी दुनिया पर जुल्म भी उस वक्त हुए जब महामहिम शहर में हैं।

  • आनन-फानन में पुलिस ने गंभीर हालत में कराया सीएचसी में भर्ती
  • चार माह पूर्व ही हुई थी महिला की शादी
  • पुलिस बना रही थी समझौते का दबाव

जनवाणी संवाददाता |

परीक्षितगढ़: चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल दहेज प्रथा के खिलाफ बोल रही थी, उसी दौरान दहेज से एक पीड़िता न्याय की चौखट पर जहर खाकर तड़प रही थी। पुलिस के रवैये से आहत पीड़ित महिला ने थाने के गेट पर पहुंचकर जहरीला पदार्थ खा लिया और थाना परिसर में ही आत्महत्या करने की कोशिश की। महिला के जहर खाने के बाद पुलिस में हड़कंप मच गया। पीड़ित महिला का आरोप है कि थाना स्तर से उसे न्याय नहीं मिल रहा था, जिसके चलते थाने में जहर खाकर जान देने का निर्णय लिया।

एक माह से पीड़िता थाने के चक्कर लगा रही थी, त्वरित न्याय मिलना तो दूर उलटे पुलिस मानसिक उत्पीड़न कर रही थी। पुलिस की कार्यप्रणाली से क्षुब्ध होकर महिला ने थाने के गेट पर जहर खा लिया। ये घटना शाम 5.30 बजे की हैं। पुलिस ने आनन-फानन में पीड़ित विवाहिता को गंभीर हालात में सीएचसी में भर्ती कराया, जहां से महिला को गंभीर हालत में जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।

इशरत पत्नी वारिस निवासी खजूरी की शादी चार माह पहले वारिस के साथ हुई थी। वारिस के साथ प्रेम विवाह हुआ था। हालांकि वारिस के परिजन इस शादी से खुश नहीं थे तथा वारिस को अपनी चल-अचल सम्पत्ति से बेदखल कर दिया था। शादी के बाद से ससुराल पक्ष के लोग आए दिन उसके साथ मारपीट कर उसका मानसिक उत्पीड़न भी कर रहे थे। पीड़ित महिला ने मामले की तहरीर परीक्षितगढ़ थाने में दी थी, लेकिन पुलिस कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही दे रही थी।

गुरुवार को सुसराल पक्ष के लोगों ने विवािहता से मारपीट कर घर से निकाल दिया। इसके बाद पीड़िता न्याय के लिए थाने पहुंची और कार्रवाई के लिए गुहार लगाने लगी, लेकिन पुलिस का दिल नहीं पसीजा और उसकी एक नहीं सूनी। पीड़िता विवाहिता को इंसाफ की चाौखट पर न्याय नहीं मिलने पर उसने मौत को गले लगाने का मन बना लिया और एक दुकान से जहरीला पदार्थ खरीदा, जिसके बाद थाने के गेट पर जाकर जहरीला पदार्थ खा लिया।

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जहर ने जैसे ही असर दिखाया, तभी महिला थाने के गेट पर ताड़पने लगी और चिल्ला रही थी। लोगों की भीड़ एकत्र हो गई। पुलिस फिर भी आंखें बंद किये रही। जब मीडिया के लोग पहुंचे तो पुलिस के इसके बाद होश उड़ गए। जिस पर पुलिस के होश उड़ गए और पुलिस आनन-फानन में महिला को बेहोशी की हालत में सीएचसी में भर्ती कराया, लेकिन हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों न महिला को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।

बताया जा रहा है कि महिला ग्राम खजूरी हलका इंचार्ज एसआई राजेन्द्र सिंह से न्याय की गुहार लगा रही थी, लेकिन एसआई पीड़िता को न्याय दिलाने के बजाय उलटा पीड़िता पर समझौता का दबाव बना रहा था। ऐसा आरोप पीड़िता ने लगाया हैं। इस प्रकरण में पुलिस कार्रवाई करती तो शायद महिला थाने के गेट पर जहरीला पदार्थ नहीं खाती। यह आत्महत्या का प्रयास पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा हैं।

वहीं, इस संबंध में एसओ, परीक्षितगढ़ पंकज कुमार ने पूरे मामले पर घटना होने के बाद भी लीपापोती कर दी। पुलिस इस मामले को पारिवारिक मामला बताकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही हैं, लेकिन पुलिस की भूमिका को इस घटना ने कठघरे में खड़ा कर दिया हैं।

परीक्षितगढ़ थाने में पहले भी हो चुकी है घटना

डेढ़ वर्ष पूर्व गांव खजूरी निवासी अंजुम की पुत्री 16 वर्षीय शमां के साथ गांव के ही शादाब गुलशेर, मनाव्वर के खिलाफ दुष्कर्म की तहरीर दी थी। पीड़िता मां के साथ आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए थाने के चक्कर काट रही थी, लेकिन पुलिस द्वारा आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर शमां ने थाने के गेट पर जहर खाकर जान दे दी थी। यह मामला 21 मई, 2000 का है।

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