- वाहनों का अवैध कटान क्रांतिधरा की छवि भी करता है धूमिल
- चोरी के वाहनों को काटने में शहर का नाम लिया जाता है प्रमुखता से
- जनपद चोरी की गाड़ियों का बन गया गढ़, भारत के मानचित्र पर काला धब्बा
- हाल ही में कई बड़े कबाड़ी किए गिरफ्तार, हजारों की संख्या में वाहन चोरी भी कबूली
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सोतीगंज में चोरी के दोपहिया और चौपहिया वाहनों से भले ही पुलिस सम्पूर्ण भारत के मानचित्र पर काला धब्बा है, क्रांतिधरा की छवि भी धूमिल करता है। चोरी के वाहनों को काटने के मामले में मेरठ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। जनपद चोरी की गाड़ियों का गढ़ बन गया है। हाल ही में बड़े कबाड़ी गिरफ्तार किये गए, जिन्होंने हजारों की तादाद में वाहन चोरी भी कबूली है।
आम आदमी के जीवन में बाइक व चौपहिया वाहन जीवन की कमाई व सपनों का घरौंदा होता है। ऐसे में किसी व्यक्ति का वाहन चोरी हो जाए तो एक तरह से उस पर आर्थिक वज्रपात हो जाता है। चोरी के इस स्याह कारोबार में पुलिस ही नहीं, बल्कि अन्य विभाग भी अंखड डूबे हैं।
जिनका माह का लाखों का कारोबार होता है उक्त विभाग के अधिकारियों की भी सहभागिता है। तमाम बदनामी झेलती है पुलिस से कई गुना कमाई प्रतिमाह करते हैं। सर्वविदित है कि स्पेयर पार्ट्स तथा टायर पर 18 से 28 प्रतिशत जीएसटी मान्य है। इस अवैध कारोबार की मंडी में जहां करोड़ों का व्यवसाय प्रतिमा स्पेयर पार्ट्स की बिक्री के रूप में होता है, ये सारा धंधा नकदी तौर पर होता है, परन्तु जिस तरह सोतीगंज से जलीकोठी तक विशाल शोरूम तथा बड़े-बड़े गोदाम स्पेयर पार्ट्स आदि से भरे हुए है, उन पर जीएसटी के अधिकारियों की पूर्णतया मौन स्वीकृति है।
ये स्वीकृति निस्वार्थ नहीं, बल्कि शोरूम से लाखों का लेन-देन जीएसटी अधिकारी एक तरह से नकदी के रूप में प्राप्त करते हैं। इंजन से लेकर बॉडी पार्ट तथा चोर बजारी जहां सरकार को करोड़ों की चोट देता है, वहीं आज तक इस करोड़ों की टैक्स चोरी की मंडी में जीएसटी का कोई छापा नहीं लगना अपने आपमें उक्त प्रकरण प्रश्न चिह्न खड़ा करता है, वहीं दूसरी ओर इस काले धंधे की मंडी का एक छोर जलीकोठी के सामने आयकर विभाग का मुख्य कार्यालय है, परन्तु उक्त काले धंधे से कमायी करके रातों-रात करोड़ों की सम्पत्ति अर्जित करने वाले कुख्यात माफिया पर आयकर विभाग की नजर न पड़ना यह एक संयोग मात्र नहीं हैं।
गाड़ियां ही नहीं कटती, करोड़ों के टर्न ओवर की जीएसटी भी चोरी
सदर पुलिस की छत्रछाया में सोतीगंज के चोर मार्केट में केवल देश भर की गाड़ियां ही नहीं काटी जा रही हैं, बल्कि यहां भारी भरकम जीएसटी चोरी कर करोड़ों रुपये का टर्न ओवर बगैर किसी लिखापढ़ी के किया जाता है। पक्का बिल तो भूल ही जाइये, यहां कच्चा बिल भी नहीं दिया जाता। गाड़ियों का कोई भी सामान भले ही कितना सस्ता हो या कितना महंगा, यहां तक कि पूरी गाड़ी की ओवर हॉलिंग ही क्यों न हो, ज्यादातर कारोबार जीएसटी की चोरी कर बगैर बिलिंग के किया जाता है।
महानगर के कारोबारियों को साल में कई बार जीएसटी सर्वे के नोटिस जारी करने वाले जीएसटी के अफसरों की नजर बगैर बिलिंग के किए जाने वाले करोड़ों के टर्न ओवर पर न पडे या इससे पूरी तरह से वो अंजान हो, यह बात आसानी से गले नहीं उतरती। सरकार को हर साल करोड़ों का चूना लगाने वाला ये काला बाजार शहर के बीचों बीच मौजूद है।
पूरे हिन्दुस्तान से यहां गाड़ियों के सामान की खरीद फरोख्त को लोग पहुंचते हैं। इतने बडे स्तर पर बगैर बिलिंग के कारोबार हो और जीएसटी अफसरों को इसकी खबर न हो यह लगता नहीं।
सोतीगंज मार्केट से गाड़ियों से संबंधित सभी सामान आसानी से मिल जाएगा, लेकिन शर्त यह है कि उसका कच्चा या पक्का बिल नही मिलेगा। दरअसल, यहां टैक्स चोरी का यह सारा धंधा दलालों की मार्फत फल फूल रहा है।
देश के दूसरे राज्यों के शहरों से यहां गाड़ियों के पार्ट्स लेने आने वाले दलालों की मार्फत सोतीगंज के कारोबारियों से संपर्क करते हैं। जो भी माल खरीदा या बेचा जाता है उसकी गारंटी मीडिल मेन होता है।
बेइमानी का काम पूरी ईमानदारी से
सोतीगंज में जीएसटी की चोरी का ये काम पूरी ईमानदारी से किया जाता है। यहां और बाजार में शायद यही एक अंतर है, जो भी माल यहां से खरीदा जाता है मीडिल मेन उसकी गारंटी लेता है। नाम न छापे जाने की शर्त पर मार्केट के एक कारोबारी ने बताया कि उनकी साख जम्मू कश्मीर तक है। जो माल देंगे वही निकलेगा। सिर्फ माल का पक्का बिल नहीं देते। क्योंकि वो जो माल खरीदते हैं, उसको बेचने वाला भी जीएसटी की चोरी करता है।
चोरी के माल के शोरूम
सोतीगंज में कुछ जगह तो ऐसी हैं, जिनको चोरी के माल का शोरूम कहा जा सकता है। शायद देश का ये पहला बाजार होगा जहां चोरी के माल का शोरूम तक मौजूद है। इनको चलाने वाले मालिक यहां नहीं मिलेंगे, सारी जिम्मेदारी नौकरों के कंधों पर होती है। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि इन दिनों पकड़-धकड़ के खौफ के चलते काले कारोबार के ज्यादातर माफिया अंडर ग्राउंड हैं।
ऐसे होती है चोरी
चोरी जीएसटी की हो या फिर गाड़ियों की विभाग की मिलीभगत के बगैर संभव नहीं। ऐसा ही सोतीगंज के गाड़ी मार्केट में भी किया जाता है। दरअसल, सरकार की ओर से 25 लाख तक के कारोबार को जीएसटी से मुक्त रखा गया है। बताया गया है कि सोतीगंज के कारोबारियों का सर्वे भी किया जाता है। जो एक-दो इसके बाहर हैं वो जीएसटी की श्रेणी में आते हैं।
मुख्यालय से तय होती है कार्रवाई
करोड़ों के टैक्स चोरी के संबंध में जब जीएसटी अफसरों से संपर्क किया तो इस संबंध में आन द रिकॉर्ड बात करने से मना दिया। सिर्फ इतना बताया गया कि छापे की कार्रवाई हेड आफिस तय करता है। वहीं पर डिसाइड होता है कि कौन कौन आपरेशन में शामिल होगा? इसके अलावा लोकल स्तर पर तो चंद घंटे पहले ही नोटिस होता है कि अमुक स्थान पर छापा मारना है। लोकल स्तर पर आमतौर पर कलेक्शन का काम होता है।

