Friday, April 3, 2026
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महज पांच इंटरसेप्टर गाड़ियों से स्पीड कंट्रोल करने में जुटा सिस्टम

  • मेरठ जोन में एक गाड़ी करती है सभी जनपदों में अभियान की खानापूर्ति
  • ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस वे पर कंट्रोल नहीं हो रही स्पीड, इंटरसेप्टर से मिले तो बने बात

जनवाणी ब्यूरो |

बागपत: सड़क सुरक्षा सप्ताह की शुरुआत हो गई है। यातायात के नियमों का पालन कराने का अभियान भी चलेगा, उल्लंघन पर कार्रवाई भी होगी। लेकिन इसमें तेज गति से फर्राटा भरने वाले वाहनों पर लगाम लगाना मुश्किल होगा। क्योंकि परिवहन और पुलिस विभाग के पास तेज गति मापने वाले यंत्र ही नहीं है।

तेज गति मापने वाली इंटरसेप्टर कार प्रदेश में महज पांच ही हैं और इनमें एक मेरठ जोन को दे रखी है। वह अधिकारियों की डिमांड पर ही एक-दो दिन के लिए भेजी जाती है, जबकि ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस वे पर हर समय इंटरसेप्टर की आवश्यकता है। अधिकारी डिमांड भी कई बार कर चुके हैं, लेकिन आज तक इंटरसेप्टर की मांग पूरी नहीं हो सकी है। यही कारण है कि यहां तेज गति से दौड़ने वाले वाहनों पर लगाम नहीं लग सकी है।

सड़क सुरक्षा सप्ताह को लेकर तमाम दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। वाहन चालकों को नियमों के बारे में जागरूक भी किया जाता है। यातायात नियमों का पालन नहीं करने वालों पर कार्रवाई भी की जाती है। परिवहन विभाग और पुलिस विभाग उल्लंघन करने वालों पर सख्ती भी दिखाता है।

हेलमेट के बिना, कागजों में कमी आदि के उल्लंघन पर कार्रवाई की जाती है, लेकिन ओवर स्पीड पर कार्रवाई उम्मीद के मुताबिक नहीं होती है। एक-दो दिन के लिए कार्रवाई होती है तो वह बस उधार की गाड़ी से की जाती है। वह भी सप्ताह भर यहां नहीं रखी जा सकती, क्योंकि उस गाड़ी को दूसरे जनपदों में भी भेजा जाता है।

यही कारण है कि बागपत जनपद से गुजरने वाले एक्सप्रेस वे व हाइवे पर वाहनों की गति पर कंट्रोल नहीं हो पाया है। जब तक वाहनों की गति पर कंट्रोल नहीं होगा तब तक हादसों पर भी अंकुश लगाना मुश्किल है। हादसों पर अंकुश लगाने के लिए स्पीड कंट्रोल करना बेहद आवश्यक है।

स्पीड के लिए पुलिस और परिवहन विभाग के पास स्पीड मापक यंत्र तक उपलब्ध नहीं है। दूसरे शहरों या राज्यों की बात की जाए तो स्पीड मापने वाली इंटरसेप्टर कार उपलब्ध रहती है। इंटरसेप्टर के सहारे परिवहन और पुलिस विभाग ओवर स्पीड से चलने वालों पर कार्रवाई करता है, लेकिन बागपत जनपद में यह सुविधा नहीं होने के कारण यहां स्पीड अनकंट्रोल है। इंटरसेप्टर की बात की जाए तो प्रदेश में महज पांच गाड़ियां हैं।

जिनमें से एक मेरठ जोन को दी गई है। मेरठ, बागपत, सहारपुर, मुजफ्Þफरनगर, शामली, बिजनौर, गाजियाबाद, बुलंदशहर आदि जनपदों में उसी गाड़ी को भेजा जाता है। हाल में 22 व 23 अक्टूबर को बागपत में दो दिन के लिए गाड़ी को भेजा गया था। जिसके बाद अब दूसरे जनपदों में गाड़ी चली गई है। यानी पुलिस विभाग सड़क सुरक्षा सप्ताह में भी ओवर स्पीड को लेकर सख्ती नहीं कर सकेगा। जबकि बागपत जनपद में इंटरसेप्टर की सबसे अधिक आवश्यकता है।

यहां से ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस वे गुजर रहा है। इसके अलावा दिल्ली-सहारनपुर नेशनल हाइवे, बागपत-मेरठ नेशनल हाइवे गुजर रहे हैं। एक्सप्रेस वे पर कई बड़े हादसे तेज गति के कारण हो चुके हैं। यहां स्पीड पर कोई कंट्रोल नहीं होने से न जाने कितनी जिंदगी मौत के काल में जा चुकी है, लेकिन आज तक स्पीड पर कंट्रोल करने का सिस्टम चालू नहीं किया गया। परिवहन विभाग को जब भी गाड़ी दी जाती है तो वह भी एक्सप्रेस वे पर ही खड़ी कर कार्रवाई करता है।

अगर यहां इंटरसेप्टर दी जाए तो ईपीई पर तो स्पीड पर लगाम लगेगी ही साथ ही हादसों पर भी अंकुश लग सकेगा। इंटरसेप्टर के लिए कई बार डिमांड भी भेजी जा चुकी है, लेकिन शासन स्तर से इसे स्वीकृत नहीं किया गया। जबकि यहां इंटरसेप्टर की बेहद आवश्यकता है। अब एक एक्सप्रेस वे और दो नेशनल हाइवे पर अगर स्पीड कंट्रोल करनी है तो इंटरसेप्टर की डिमांड पूरी करने पर ही बात बनेगी। सवाल यह है कि आखिर कब तक उधार की गाड़ी से स्पीड कंट्रोल करने की उम्मीद की जाएगी?

यह है इंटरसेप्टर

ओवर स्पीड से चलने वाले वाहनों पर लगाम लगाने के लिए इंटरसेप्टर की सुविधा दी जाती है। यह आधुनिक उपकरणों से लैस गाड़ी होती है। जिसमें आधुनिक कैमरा व तेज गति को दूसरे से माप लेने का यंत्र लगा होता है। स्पीड रडार की क्षमता काफी होती है। वह दूर से ही वाहन की गति को पकड़ लेती है। एक कार में यह उपकरण लगाए जाते हैं। हालांकि कुछ जगह बाइक पर भी इंटरसेप्टर की सुविधा दी गई है।

183 की ईपीई पर पकड़ी स्पीड

ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस वे पर तेज गति से दौड़ने पर दर्जनों हादसे हो चुके हैं। इसके बाद भी वाहन स्वामी गति पर कंट्रोल नहीं कर रहे हैं। एआरटीओ सुभाष राजपूत ने बताया कि ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस वे पर सबसे अधिक तेजी से वाहन दौड़ रहे हैं। पिछले दिनों एक लग्जरी गाड़ी की स्पीड 183 मापी गई थी। यह स्पीड इंटरसेप्टर के माध्यम से ही मापी गई थी। जिसका चालान किया गया था। जबकि एक्सप्रेस वे पर कार की गति 120 है। नौ या अधिक सीट वाले वाहनों की गति 100 और भारी वाहनों की 80 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है।

बागपत जनपद को इंटरसेप्टर की बेहद आवश्यकता है। यहां मेरठ से ही गाड़ी भेजी जाती है। ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस वे पर तो हर दिन गाड़ी की आवश्यकता है। वहां हादसों पर अंकुश लगाने के लिए इंटरसेप्टर जरूर चाहिए। इसके लिए शासन से मांग भी की गई है।                                                                                      -सुभाष राजपूत, एआरटीओ

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