Monday, March 30, 2026
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पंजाब में घमासान, सर्वोच्च अदालत में पहुंचा विवाद, पढ़ें पूरी खबर

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: पंजाब सरकार के कैबिनेट ने प्रस्ताव पारित कर राज्यपाल से विधानसभा का बजट सत्र तीन मार्च से बुलाने की अनुमति मांगी थी। हालांकि, राज्यपाल ने बजट सत्र बुलाने से मना कर दिया था। साथ ही पत्र लिखकर सीएम के ट्वीट और बयान को काफी अपमानजनक और असंवैधानिक बताया।

उधर, पंजाब में विधानसभा का बजट सत्र बुलाने की मंजूरी न मिलने से सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। आज मंगलवार को अदालत ने सुनवाई का समय तय भी दिया है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने कहा कि महाराष्ट्र में शिवसेना को लेकर जारी राजनीतिक संकट के मामले पर सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय इस मामले पर भी सुनवाई करेगा।

क्या है पंजाब में बजट सत्र का विवाद?

पंजाब सरकार ने सोमवार को अतिरिक्त महाधिवक्ता शादान फरासत के माध्यम से भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की। याचिका में पंजाब के राज्यपाल के प्रधान सचिव को पहले प्रतिवादी के रूप में रखा गया है। याचिका में तर्क दिया गया है कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार सरकार द्वारा दी गई सहायता और सलाह के अनुसार राज्यपाल को विधानसभा को बुलाना पड़ता है।

बता दें कि 13 फरवरी को राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर, सिंगापुर में ट्रेनिंग के लिए भेजे गए प्रिंसिपलों की चयन प्रक्रिया व खर्च समेत चार अन्य मुद्दों पर जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में, मुख्यमंत्री ने 13 फरवरी को ही ट्वीट कर राज्यपाल की नियुक्ति पर सवाल उठाया। मुख्यमंत्री ने लिखा था कि उनकी सरकार 3 करोड़ पंजाबियों के प्रति जवाबदेह है न कि केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किसी राज्यपाल के प्रति। इसके बाद से मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच उक्त पूरे मामले ने विवाद का रूप ले लिया है।

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