- 30 अलग-अलग समिति/कमेटी बनाई गई
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: ऐतिहासिक नौचंदी मेले के सफल आयोजन के लिये 30 अलग-अलग समिति/कमेटी बनाई गई हैं, लेकिन किस कमेटी के पदाधिकारी एवं सदस्यों को जानकारी है। उसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि निर्माण कार्य सत्यापन कमेटी के पदाधिकारी एवं सदस्यों से जब निर्माण संबंधी जानकारी चाहे तो उन्होंने क्या-क्या जवाब दिये कि वह अपनी जिम्मेदारी को कितनी गंभीरता से लेते हैं या फिर उन्हे नाम मात्र के लिये ही समिति में शामिल किया गया है।
निर्माण कार्य/कार्य सत्यापन कमेटी, परिवेक्षक के रूप में पंकज वर्मा अपर जिलाधिकारी वित्त, विकास कुरील अधिशांसी अभियंता नगर निगम निर्माण कार्यों के संबंध में जब अपर जिलाधिकारी वित्त पंकज वर्मा से जानकारी के लिये संपर्क किया गया तो उन्होंने कॉल ही नहीं रिसीव की। उसके बाद अधिशांसी अभियंता नगर निगम मेरठ विकास कुरील का मोबाइल नंबर मिलाया गया उन्होंने कॉल रिसीव की बताया कि उन्हे इस संबंध में कोई ज्यादा जानकारी नहीं है।
वह तो निर्माण कार्य पूरे होने के बाद सत्यापण की फाइल के आधार पर निर्माण कार्यों का सत्यापन करेंगे। उसके बाद ही कुछ बता सकते हैं। वहीं नगर निगम के लिपिक मुकेश गेहरा से बात की गई तो उन्होने बताया कि मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है और न ही मुझे किसी ने कुछ बताया कि कितने निर्माण कार्य कितने रुपये में टेंडर छोडेÞ गये हैं। समिति में शामिल आसिम शब्बीर प्रधान सहायक कलक्ट्रेट से बात की गई तो उन्होंने भी जानकारी से इंकार किया। उसके बाद नगर निगम के प्रधान लिपिक प्रदीप जोशी से बात की गई

उन्होंने बताया कि महावीर जयंती के मौके पर सरकारी अवकाश होने के कारण वह कोई जानकारी नहीं बता सकते कि कितने निर्माण कार्यों पर कितना बजट खर्च होगा। वह आज कार्यदिवस के दौरान ही फाइल देखकर कुछ बता सकते हैं। उनके बाद पदम सिंह अवर अभियंता नगर निगम से बात की गई तो फिलहाल पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन वह अपने अन्य कर्मचारी एवं अधिकारियों से संपर्क करके बताते हैं कि कितने निर्माण कार्यों पर नौचंदी मेले कितना बजट खर्च किया जायेगा।
जिसमें उन्होंने अपने कार्य के प्रति जिम्मेदारी समझते हुये कॉल करके बताया कि करीब 55 से 60 लाख रुपये 7 अलग-अलग निर्माण कार्यों पर खर्च होंगे। वहीं मेले में पहली बार ग्रीन बेल्ट के लिये 13 लाख रुपये का बजट पास किया गया है। कुल मिलाकर 8 निर्माण कार्यों पर करीब 70 लाख रुपये के बजट में टेंडर छोड़े गये हैं। जबकि यदि कोई समिति में पदाधिकारी एवं सदस्य होता है
तो उसे पूरी नहीं तो कम से कम थोड़ी जानकारी तो होती ही है कि आखिर उनकी समिति के द्वारा मेले के संबंध में क्या-क्या किया जा रहा है। कुछ सदस्यों को कुछ भी जानकारी नहीं तो क्या समझा जाये कि कॉरम पूरा करने के लिये कुछ सदस्यों के नाम समिति में शामिल किये गये, लेकिन उन्हे जानकारी नहीं दी जा रही या फिर वह नगर निगम के आला अधिकारियों के बिना निर्देश के कुछ जानकारी देना नहीं चहाते हैं।

