- प्रदेश में संभावत: मेरठ अकेला जिला, जहां वृद्धावस्था पेंशन पाने वालों का अनुपात इतना कम
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शायद प्रदेश का अकेला ऐसा जनपद है, जहां आनुपातिक रूप से विधवा पेंशन पाने वाली महिलाओं की संख्या वृद्धावस्था पेंशन के पात्रों के मुकाबले में ढाई गुना ज्यादा है। उच्चाधिकारी इस बारे में संबंधित विभागों को अक्सर आदेश करते हैं, लेकिन अनुपात को संतुलित करने का कोई रास्ता नहीं निकाला जा सका है। सूत्रों के अनुसार बीते रविवार को समीक्षा बैठक के लिए मेरठ आए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के समक्ष यह मुद्दा आया, जिसके बारे में उन्होंने अधिकारियों से पूछते हुए वृद्धावस्था पेंशन की स्थिति पर चर्चा की।
सूत्रों की जानकारी के अनुसार उन्हें बताया गया कि मेरठ जनपद में विधवा पेंशन पाने वाली पात्रों की संख्या 50 हजार से अधिक है। इसके विपरीत जनपद में केवल 22 हजार 600 लोगों को वृद्धावस्था पेंशन दी जा रही है। इस बैठक में यह बात भी सामने आई कि वृद्धावस्था के दो हजार आवेदन पत्र अभी भी खंड विकास अधिकारी और उपजिलाधिकारी कार्यालयों में जांच के लिए लंबित पड़े हैं। इन आवेदन पत्रों का कई महीने बीत जाने के बावजूद अभी तक निस्तारण नहीं किया गया है।
डिप्टी सीएम से मिले दिशा निर्देश के अनुपालन में डीएम दीपक मीणा ने भी इस बारे में संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्यवाही करने को कहा है। इस बारे में जिला समाज कल्याण अधिकारी सुनील कुमार सिंह का कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में वृद्धावस्था की 5207 नई पेंशन बनाई हैं। जबकि दो हजार आवेदन तहसील और ब्लॉक स्तर पर लंबित हैं। उनका कहना है कि वृद्धावस्था पेंशन की पात्रता के लिए वार्षिक आय ग्रामीण क्षेत्र में 46800 और शहरी क्षेत्र में 56460 रुपये निर्धारित है। इससे अधिक वार्षिक आय वाले वृद्धावस्था पेंशन की पात्रता में नहीं आते हैं।
उनका कहना है कि गन्ना बैल्ट का केन्द्र मेरठ एक संपन्न जिला माना जाता है, जहां उपरोक्त आय सीमा के अंतर्गत आने वाले संभवत: अधिक न मिल पा रहे हों। किसान परिवारों के लिए इन सीमा के आय प्रमाण पत्र उपलब्ध करा पाना संबंधित अधिकारियों के संभव न हो पाता हो। सुनील कुमार सिंह का कहना है कि मेरठ जनपद में विधवा पेश्ांन अधिक होने का एक कारण यह भी प्रतीत होता है, कि इसकी पात्रता में आय सीमा दो लाख रुपये वार्षिक तक शामिल की गई है।

