Friday, March 20, 2026
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सरकारी स्कूलों के शिक्षक जाएंगे चुनाव में, स्कूल रामभरोसे

  • चार हजार से अधिक शिक्षक व 40 लिपिक है बीएसए विभाग में
  • चार दिनों से चल रही चुनावों को लेकर ट्रेनिंग, स्कूली शिक्षा से खिलवाड़

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकार क्षेत्र में आने वाले जिले के बारह सौ से अधिक स्कूलों में छात्रों की शिक्षा दांव पर लगती रहती है। कभी विधानसभा चुनाव तो कभी बोर्ड परीक्षाएं, कभी बीएलओ ड्यूटी तो कभी जनगणना। यहां तक की बालगणना में भी बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाती है। इस ड्यूटी के लिए शिक्षकों को अलग से मानदेय भी दिया जाता है।

लेकिन शिक्षकों की ड्यूटी लगने के बाद स्कूलों में पढ़नें वाले छात्रों की पढ़ाई का जो नुकसान होता है उसकी जिम्मेदारी किसकी है इसका जवाब किसी के पास नहीं है। अब नगर-निगम चुनावों में फिर शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी गई है और उन्हें चार दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लेने के लिए बुलाया जा रहा है।

चार हजार से अधिक शिक्षक है बेसिक शिक्षा विभाग में

नगर-निगम चुनावों में शिक्षको की ड्यूटी लगाई जा रही है यह कोई पहली बार नहीं हो रहा है। पहले भी विभिन्न योजनाओं के लिए जनगणना, बालगणना, यूपी बोर्ड परीक्षा, बीएलओ आदि कामों के लिए बेसिक शिक्षकों को लगाया जाता है।

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इस समय जिले में 12 सौ से अधिक विद्यालय है जो बेसिक शिक्षा के आधीन है। इनमें बच्चों को पढ़ानें वाले शिक्षकों की संख्या 4 हजार से अधिक है, जबकि 40 लिपिक है जिनमें से ज्यादातर की ड्यूटी निगम चुनावों में लगाई गई है।

चार दिवसीय ट्रेनिंग कार्यक्रम का आज है अंतिम दिन

एसडी सदर इंटर कॉलेज में उन शिक्षको को ट्रेनिंग दी जा रही है जिनकी ड्यूटी निगम चुनावों में लगी है। बुधवार को 1370 शिक्षकों को ट्रेनिंग में आना था लेकिन 1280 शिक्षक पहुंचे जबकि 90 शिक्षक अनुपस्थित रहे। इसी तरह अलग-अलग दिनों में शिक्षकों की संख्या अलग है। बताया जा रहा है जो शिक्षक चुनाव ड्यूटी में आने से मना करते है उन्हें विभागीय कार्रवाई का डर दिखाया जाता है।

उपस्थिति पर मिलता है वेतन, शिक्षा के स्तर पर नहीं

बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों को सरकार से अच्छा-खासा वेतन मिलता है। लेकिन यह वेतन शिक्षकों की उपस्थिति पर निर्भर करता है न कि उनके द्वारा दी जा रही शिक्षा को लेकर। ऐसे में यदि शिक्षक स्कूल तो आते है लेकिन हस्ताक्षर करके किसी अन्य ड्यूटी में चले जाते है। उन्होंने अपना शिक्षण कार्य नहीं किया तो भी उन्हें विद्यालय में उपस्थित माना जाता है। भले ही उन्होंने बच्चों को पढ़ाया है या नहीं।

नगर निगम चुनावों में शिक्षकों की ड्यूटी लगी है लेकिन इसका असर बच्चों की शिक्षा पर ज्यादा नहीं पड़ेगा। स्कूलों में शिक्षकों की मौजूदगी रहती है जो ड्यूटी में जाने वाले शिक्षकों की भी जिम्मेदारी निभाते है। -सुदर्शन लाल, कार्यकारी बीएसए, मेरठ।

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