- जिला पंचायत राज अधिकारी रेणु श्रीवास्तव ने गत 12 मई को ग्राम पंचायत मवाना खुर्द, विकास खंड मवाना खुर्द का किया था औचक निरीक्षण
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: वित्तीय अनियमितताओं और अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना के आरोप में मवाना खुर्द ग्राम पंचायत के प्रधान को निलंबित कर दिया गया है। इस प्रकरण की जांच के लिए गठित कमेटी को एक महीने में जांच आख्या प्रस्तुत करने को कहा गया है। डीएम दीपक मीणा की ओर से जारी विस्तृत आदेश में कहा गया कि जिला पंचायत राज अधिकारी रेणु श्रीवास्तव ने 12 मई को ग्राम पंचायत मवाना खुर्द, विकास खंड मवाना खुर्द का औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अन्तर्गत ग्राम पंचायत-मवाना खुर्द, विकास खंड मवाना खुर्द का चयन ओडीएफ प्लस बनाये जाने के लिए किया गया था। जिसके क्रम में ग्राम पंचायत को 39.26 लाख रुपये की धनराशि दी गई थी। जिसके सापेक्ष सम्बन्धित प्रधान, सचिव द्वारा छह जून तक इसमें से 10.80 लाख रुपये यानी 27.51 प्रतिशत की धनराशि ही कार्यों पर व्यय की गई है।
डीएम और सीडीओ द्वारा आयोजित समीक्षा बैठकों में सम्बन्धित को बार-बार निर्देशित किया जाता रहा है कि आहरित धनराशि के सापेक्ष व्यय में अपेक्षित प्रगति लायी जाए, लेकिन इनके द्वारा निरन्तर उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना की जा रही है। इस सम्बन्ध में डीएम कार्यालय से 15 मई को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। जिसका प्रति उत्तर इनके स्तर से अभी तक प्राप्त नहीं कराया गया है।
इसके उपरांत डीएम कार्यालय से आठ जून को फिर प्रधान, सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी कर उत्तर साक्ष्यों सहित 15 दिवस के अन्दर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। जिसका जवाब सचिव ग्राम पंचायत-मवाना की ओर से 22 जून को प्रस्तुत किया गया। जिसमें अवगत कराया है कि ग्राम प्रधान द्वारा स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में पूर्ण सहयोग नहीं मिल रहा है। बताया कि भूमि प्रबंधन समिति के अध्यक्ष ग्राम प्रधान होते हैं।
उनके स्तर से ही सेग्रीगेशन शेड की भूमि का चयन तहसील स्तर के माध्यम से कराया जाता है, लेकिन अब तक सेग्रीगेशन शेड की भूमि का चयन नहीं किया गया है, जिससे सेग्रीगेशन शैड का निर्माण कार्य समय से नहीं हो सका है। जितना कार्य ग्राम पंचायत में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के माध्यम से हुआ है, उसकी एमबी के सापेक्ष यू-टाइप नाली निर्माण, धनराशि चार लाख, हैंडपम्प प्लेटफार्म 34526 रुपये, जेई कन्सलटेन्सी फीस 18459 रुपये मिलाकर कुल भुगतान चार लाख 52 हजार 965 रुपये खर्च किए गए हैं,
और वर्तमान प्रगति 39.04 प्रतिशत है। डीएम दीपक मीणा ने पंचायती राज एक्ट की धारा 95 (1)(छ) के अन्तर्गत जांच में प्रथम दृष्टया वित्तीय और अन्य अनियमितताओं का दोषी पाया जाने के आधार पर प्रधान की वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का सम्पादन करने पर रोक लगा दी है। यह आदेश तब तक प्रभावी रहेंगे, जब तक कि वह अंतिम जांच में आरोपों से मुक्त न हो जाए।
इस दौरान ऐसी शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का सम्पादन राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त नियुक्त ग्राम पंचायत के तीन सदस्यों की एक समिति द्वारा किया जाएगा। इसी के साथ इस प्रकरण की जांच के लिए समिति गठित की गई है। जिसमें सहायक निबन्धक, सहकारिता मेरठ को एवं तकनीकी सहयोग के लिए सहायक अभियन्ता, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, मेरठ शामिल होंगे। इन्हें एक माह में नियमानुसार जांच करके अपनी आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

