जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: आज मंगलवार को मोदी सरकार ने सहारा में निवेश करने वाले जमाकर्ताओं को बड़ी खुशखबरी दी है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने ‘सहारा रिफंड पोर्टल’ किया है। इस वेबसाइट के द्वारा ऐसे निवेशकों के रकम की वापसी होगी जिनकी मेच्योरिटी की मियाद पूरी हो गई होगी।
बता दें कि, सहकारिता मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में एक ऐसे पोर्टल की शुरुआत की है जो सहारा ग्रुप के निवेशकों की तरफ से क्लेम प्रक्रिया को आसान बनाएगा। इस पोर्टल पर सहारा के निवेशकों को पैसे वापस लाने के लिए पूरी प्रोसेस को बताया और समझाया जायेगा।
दरअसल, केंद्र सरकार ने 29 मार्च को घोषणा की थी कि सहारा समूह के लगभग 10 करोड़ निवेशकों को 9 महीने के भीतर पैसे वापस मिलेंगे। निवेशकों की परेशानी को देखते हुए मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसमें 5 हजार रुपये तुरंत जारी करने की अपील कोर्ट ने मंजूर कर ली थी। सरकार के इस फैसले से 1.1 करोड़ोंं निवेशकों को राहत मिलेगी।
ये है सहारा का पूरा मामला?
सहारा का विवाद साल 2009 में शुरू हुआ था जब सहारा ने अपना IPO लॉन्च किया और उसके बाद ही सहारा की असलियत बाहर आने लगी। सेबी की जांच में कई अनियमितता आईं और ये बात सामने आई कि सहारा ने गलत तरीके से निवेशकों से 24000 करोड़ की रकम जुटाई थी और आगे जांच के बाद ये एक बड़ा घोटाले के रूप में सामने आया। सेबी ने तुरंत सहारा को निवेशकों को उनका पैसा ब्याज समेत लौटाने का आदेश दिया था। हालांकि बाद में मामला कोर्ट में गया और उलझता चला गया। इस विवाद के कारण खाते में जमा 24 हजार करोड़ रुपये का फंड फंसा हुआ है, इससे निवेशक बेहद परेशान हैं।
इन चार को-ऑपरेटिव सोसाइटी के निवेशक करें आवेदन
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सहारा क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड लखनऊ
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सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी लिमिटेड भोपाल
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हमारा इंडिया क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड कोलकाता
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स्टार्स मल्टीपर्पज को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड हैदराबाद
ऊपर बताई गई पहली तीन सोसाइटीज के किसी भी जमाकर्ता जिसने 22 मार्च 2022 से पहले पैसा जमा किया हो वो रिफंड के लिए एलिजिबल है। वहीं स्टार्स मल्टीपर्पज को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड हैदराबाद के 29 मार्च 2023 से पहले के निवेशक आवेदन कर सकते हैं।
5,000 करोड़ रुपए ट्रांसफर होंगे
सहारा ग्रुप की सहकारी समितियों के वास्तविक सदस्यों/जमाकर्ताओं की शिकायतों को दूर करने के लिए मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दायर किया था। मार्च में, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि सहारा ग्रुप की सहकारी समितियों के वास्तविक जमाकर्ताओं के बकाया के भुगतान के लिए ‘सहारा-सेबी रिफंड अकाउंट’ से 5,000 करोड़ रुपए सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज (CRCS) में ट्रांसफर किए जाएं।
जस्टिस सुभाष रेड्डी की निगरानी में पूरी होगी प्रक्रिया
डिपॉजिटर्स को पैसा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज आर सुभाष रेड्डी की निगरानी लौटाया जाना है। इस मामले में एडवोकेट गौरव अग्रवाल जस्टिस रेड्डी को असिस्ट करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के अगस्त 2012 में सहारा ग्रुप की दो कंपनियों सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉर्पोरेशन (SIRECL) और सहारा हाउसिंग इंडिया कॉर्पोरेशन लिमिटेड (SHICL) को इन्वेस्टर्स का पैसा लौटाने के निर्देश के बाद सहारा-सेबी एस्क्रो अकाउंट खोले गए थे। जिसमें सहारा ग्रुप की ओर से पैसे जमा करवाए गए थे।


