
मणिपुर गत सौ दिनों से भी अधिक समय से हिंसा की आग में झुलस रहा है। हिंसक वारदातों के इस लंबे दौर में हत्याएं, दुष्कर्म, महिलाओं की नग्न परेड, घर व बस्तियां जलाने, बड़ी संख्या में धर्मस्थलों को जलाने जैसी तमाम दुर्भाग्यपूर्ण अपराधिक घटनाएं हो चुकी हैं। परंतु इन सबसे भयावह वारदात है, मणिपुर में उन पुलिस व सुरक्षाबलों का विभाजित हो जाना व उनपर पक्षपाती होने का आरोप लगना, जिन पर राज्य में हिंसा को रोकने का जिम्मा है। माना जा रहा है कि यदि सुरक्षा बालों में धार्मिक व जातीय आधार पर विभाजन न हुआ होता तो तो राज्य में इतना खून खराबा हुआ होता न ही इतनी हिंसक वारदातें हुई होतीं। मणिपुर से इस तरह की खबरें हिंसा भड़कने के पहले दौर से ही आनी शुरू हो गर्इं थीं कि मैतेयी व कुकी समुदाय से संबन्ध रखने वाले राज्य पुलिस के सुरक्षा कर्मियों द्वारा अपने अपने समुदाय के लोगों को सरकारी हथियार बांटे गए।