
भारत एक कृषि प्रधान देश है। खेती-किसानी की दशा चौपट हो चुकी है। किसानों की हालत दिन ब दिन बदतर होती जा रही है। जहां एक ओर किसानों को खेती में प्रयोग की जाने वाली बीज, खाद, कीटनाशक, खरपतवारनाशक, डीजल उपकरण बिजली आदि महंगे दर पर उपलब्ध हो रही है, वहीं कृषि का उपज औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर होता जा रहा है। जिसके चलते देश में हर आधे घण्टे में एक किसान कर्ज और सुद के चक्कर में आत्महत्या करने पर मजबूर हो गया है। इस समस्या का मुख्य कारण अर्धसामन्ती-अर्धऔपनिवेशिक शोषण है। नई आर्थिक नीतियां औपनिवेशिक शोषण को और मजबूत एवं गहरा कर रही हैं।