Wednesday, April 29, 2026
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मेडिकल के गेट के बाहर बिक रही मौत, अगर बच गए तो इलाज भी

  • इमरजेंसी के गेट के सामने शराब और भांग ही नहीं अवैध नशे का कारोबार भी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: लोगों के इलाज के लिए जाना जाने वाला मेडिकल के गेट के बाहर का इलाका लोगों को मौत के मुंह में धकेलने का काम कर रहा है। नशे के नाम पर यहां मौत का कारोबार किया जा रहा है। नशे का कारोबार इसलिए क्योंकि मेडिकल इमरजेंसी के गेट के सामने तीन ठेके हैं। इनमें अंग्रेजी शराब का ठेका, देशी शराब का ठेका, भांग का ठेका और

यदि किसी को इनसे भी नशा नहीं हो रहा है तो उसके लिए यहां नशे के नाम पर मौत बेचने वाले भी इधर-उधर घूमते मिल जाएंगे, लेकिन इन तक पहुंचने के लिए जरूरी है कि आप इन्हें पहचानते हों और ये भी आपको पहचानते हो तभी यहां सस्ते नशे के नाम पर बेची जा रही मौत का सामान मिल सकेगा।

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दरअसल, मेडिकल के गेट के बाहर ठेके के पास कुछ लोग अवैध नशे की श्रेणी में आने वाले मादक पदार्थों का कारोबार कर रहे हैं। नाम न छापने के शर्त पर आसपास के व्यापारियों ने बताया कि वैसे तो यह कच्चा नशा या सूखा नशा यहां 24 घंटे मिल जाता है, लेकिन शाम के वक्त यहां इस धंधे का पीक ओवर होता है, लेकिन इस अवैध नशे को बेचने वालों तक हर किसी की पहुंच नहीं होती, जिनको वो पहचानते हैं, उन्हें ही आसानी से यह सस्ता व सूखा नशा जो मौत का वायस होता है आसानी से मिल जाता है।

गरीब तबका बड़ा खरीदार

जिस सूखे व सस्ते, लेकिन जानलेवा नशे की यहां बात की जा रही है, उसके खरीदार आमतौर पर वो झुग्गियों में रहने वाले, गरीब रिक्शा चालक, मजदूर या फिर दिन भीख मांगने वाले और चौराहों पर खड़ी गाड़ियों पर कपड़ा मारकर जो मिल जाता है। उस कमाई से नशे के नाम पर यह जहर खरीद कर उसका सेवन करते हैं। जहर इसलिए क्योंकि जो इस सस्ते व सूखे नशे का सेवन करते हैं,

उसके आदि बन जाते हैं, उन्हें फिर रोटी या भूख प्यास से कोई सरोकार नहीं रह जाता। सांसें चलती रहें इसके लिए सूखा व सस्ता नशा ही उनकी जिंदगी है। क्योंकि महंगा नशा खरीदना उनके बूते से बाहर की बात है। ये सब मेडिकल के गेट से बाहर हो रहा है। हालांकि सूखा नशा करने वालों की बड़ी संख्या मेडिकल कैंपस में भी है।

गेट पर मौत से बच गए तो अंदर इलाज

मेडिकल के गेट के बाहर सूखे व सस्ते नशे के नाम पर मौत बेची जा रही है, लोगों ने बताया कि जो सूखे व सस्ते नशे के नाम पर मौत खरीदने वाले जो लोग मौत को गले लगा लेते हैं। उनके लिए मेडिकल मोर्चरी मौजूद है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि सुखा नशा करने वाले अक्सर लावारिस हालात में बेमौत मारे जाते हैं। ऐसे लोगों के शव उठाकर पुलिस सीधे मोर्चरी ही भिजवा ती है। कुछ ऐसे भी हैं जो इस मौत के नाम पर इस सूखे नशे को करने के बाद बीमार पड़ जाते हैं। उनके इलाज के लिए मेडिकल परिसर के भीतर नशा मुक्त केंद्र भी मौजूद है।

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