Thursday, March 26, 2026
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किरण के पदक की ‘किरणों’ से जगमगा उठी क्रांतिधरा

  • एशियन गेम्स में देश के लिए 72 साल बाद शॉटपुट में ब्रॉज मेडल जीतने वाली किरण बालियान के लिए मेरठ वासियों ने पलक-पांवड़े बिछाए

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: एशियन गेम्स में देश के लिए 72 साल बाद शॉटपुट में ब्रॉज मेडल जीतने वाली किरण बालियान के लिए मेरठ वासियों ने पलक-पांवड़े बिछा दिए। परतापुर प्लाजा पहुंचने पर उसका ऐतिहासिक स्वागत किया गया। जहां से खुली कार में सबका अभिवादन करते हुए कारों के काफिले के साथ वह रुड़की रोड स्थित एकतानगर में अपने आवास पहुंची। जहां टीका लगाकर उसका स्वागत किया गया, वहीं परिवार की महिलाओं ने बलाइयां लेते हुए नजर उतारने की परम्परा भी निभाई।

शनिवार को किरण के विजेता बनकर घर लौटने की खबर एकतानगर समेत क्षेत्र के हर घर तक पहुंच गई थी। किरण के पिता सतीश बालियान, मां बॉबी बालियान और छोटा भाई देव बालियान तमाम शुभचिंतकों के साथ सुबह सवेरे ही उसे लेने के लिए एयरपोर्ट पहुंच गए थे। दोपहर के समय वह परिजनों के साथ जैसे ही मेरठ की सीमा में पहुंची, आरएसओ वाईपी सिंह, एथलीट कोच गौरव चौधरी समेत अनेक लोगों ने किरण का स्वागत किया। इस अवसर पर वाईपी सिंह ने कहा कि किरण मेरठ के साथ साथ पूरे देश का गौरव है।

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कोच गौरव सिंह ने बधाई देते हुए ओलंपिक में मेडल लाने की कामना की। परतापुर से बाईपास होते हुए किरण कारों के काफिले के साथ जैसे ही एकतानगर में पहुंची, रोड पर सैकड़ों महिला-पुरुष अपनी बिटिया की झलक पाने के लिए मौजूद मिले। किरण का पुष्पवर्षा और माला पहनाकर जोरदार स्वागत किया गया। महिलाओं का एक समूह ढोल की थाप पर नाचते हुए उसे एकतानगर की गलियों से होकर किरण के घर तक ले गया। अपने घर के सामने स्थित चौराहे पर महिलाओं के स्मूह में किरण ने भी शामिल होकर नृत्य किया।

महिलाओं के अनुरोध पर किरण की माता बॉबी बालियान और पिता सतीश बालियान भी खुद को नाचने से नहीं रोक पाए। घर के प्रवेश द्वार पर किरण की बुआ उषा देवी ने टीका करते हुए उसका स्वागत किया। इस दौरान परिवार की महिलाओं ने उसके सिर से रुपये उतारते हुए नजर उतारने की परम्परा भी निभाई। इसी दौरान गुलदस्ते और फूलों के हार लेकर आने वालों का तांता लगा गया। किरण के साथ-साथ उसका छोटा भाई देव बालियान और परिवार वालों ने सबसे मिलते हुए धन्यवाद दिया।

किरण से लिपट गया ‘सन्नी’

एशियन गेम्स से मेडल लेकर घर लौटी किरण पर परिवार और मोहल्ले वालों का ही प्यार नहीं उमड़ा, उसके पालतू कुत्ते सन्नी को संभाल पाना भी घर वालों के लिए मुश्किल हो गया। ढोल-नगाड़ों के शोरगुल के बीच घर में प्रवेश कर रही किरण को काफी दिनों बाद वापस आते देख

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किवाड़ में जंजीर के साथ बांधे गए सन्नी ने उसका ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए खूब जोर लगाया। बेजुबान जानवर के इस प्रेम को देखकर किरण ने उसे जंजीर से अलग कराया, तो वह एकदम से आकर किरण से लिपट गया। काफी देर तक किरण उसे दुलारती रही।

एशियन गेम्स में ऐसे जीता किरण ने मेडल

अंतरराष्ट्रीय एथलीट किरण बालियान ने शॉटपुट स्पर्धा के महिला वर्ग में देश को ब्रॉन्ज मेडल दिलाया है। पहली बार एशियन गेम्स में हिस्सा लेते हुए किरण ने बीती 29 सितंबर को अपने प्रदर्शन को कायम रखते हुए इस प्रतिस्पर्धा में 17.36 मीटर तक गोला फेंककर यह पदक जीता है। हालांकि अगस्त में किरण बालियान कनाडा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पुलिस गेम्स में शाटपुट में हिस्सा लेकर 18.13 मीटर की दूरी तय कर स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही प्रतियोगिता में नया मीट रिकार्ड बना चुकी है।

इसी वर्ष चंडीगढ़ में हुई इंडियन ग्रांड प्रिक्स में किरण ने इस सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 17.92 मीटर तक गोला फेंका था। इसके अलावा नेशनल स्तर पर किरण ने कई मेडल अपने नाम कर रखे हैं। बताते चलें कि किरण का चयन राजस्थान पुलिस की आइबी में खेल कोटे से हुआ है। मूल रूप से मुजफ्फरनगर के पुर बालियान की रहने वाली किरण बालियान ने मेरठ में कोच रोबिन सिंह के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया है।

‘बारबरा की बराबरी’ का ज्ञान मेडल जीतने के बाद हुआ

किरण बालियान ने चीन के हांगझाऊ में एशियन गेम्स के दौरान जिस समय शॉटपुट में ब्रॉन्ज मेडल जीता, उसे यह बोध नहीं था कि उसने 72 साल पुराने इतिहास को दोहरा दिया है। अपने आवास एकतानगर में जनवाणी से बातचीत में किरण बालियान ने कहा कि उसको इसके बारे में कुछ पता नहीं था कि भारत की झोली में यह मेडल 72 साल बाद आया है। किरण बालियान ने कहा कि यह उसके लिए गौरव की बात है कि

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1951 के बाद एशियाई खेलों की महिला शॉटपुट स्पर्धा में पदक जीतने वाली वह पहली भारतीय खिलाड़ी बनकर इतिहास को दोहराया है। उसने मेडल जीता है इसको लेकर वह बहुत खुश है। बताते चलें कि आजाद भारत के इतिहास में महिलाओं के शॉट पुट में भारत के लिए एकमात्र पदक 1951 नई दिल्ली में आयोजित पहले एशियन गेम्स के दौरान बोम्बे की रहने वाली एग्लो-इंडियन खिलाड़ी बारबरा वेबस्टर ने ब्रॉन्ज के रूप में जीता था।

ये हैं एशियन गेम्स में किरण के छह थ्रो

पहला बार इतने बड़े मुकाबले में देश के बाहर प्रदर्शन करने चीन पहुंची किरण ने 15.42 मीटर के वॉर्मअप थ्रो से शुरुआत की, और फिर दूसरे प्रयास में गोले को 16.84 मीटर की दूरी तक पहुंचाया। तीसरे प्रयास में 17.36 मीटर तक फेंका, यही थ्रो सीनियर प्रतिस्पर्धा में ब्रॉन्ज के रूप में पहला अंतरराष्ट्रीय पदक मिलने का आधार बना। हालांकि इसके बाद के तीन थ्रो थोड़ा कमजोर रहे,

जिसमें क्रमश: 16.76 मीटर, 16.79 मीटर और 16.87 मीटर तक गोला फेंका जा सका। किरण को एशियन गेम्स में मेडल दिलाने वाला उसका तीसरा प्रयास उसके करियर का दूसरा सर्वश्रेष्ठ थ्रो बन गया है। महिलाओं के गोला फेंक में भारत के नाम ज्यादा पदक नहीं हैं। किरण से पहले 1951 में एंग्लो-इंडियन खिलाड़ी बारबरा वेबस्टर ने शॉट पुट में ब्रॉन्ज जीता हुआ है।

ऐसे भी खींच लाती है तकदीर

किरण बालियान भाला फेंक में अपना करिअर बनाने के लिए अभ्यास किया करती थी। किरण बताती है कि सहारनुपर में होने वाली एक स्पर्धा के दौरान करीब नौ साल पहले गलती से शॉट पुट के जुनियर टूर्नामेट में उसका नाम दर्ज हो गया था। जो लड़की शॉटपुट की खिलाड़ी थी, उसका नाम भी संयोगवश किरण ही रहा है। लेकिन शॉटपुट की एंट्री करने वालों ने किरण बालियान नाम दर्ज कर दिया।

किसने सोचा था कि यह गलती नहीं, बल्कि किरण की तकदीर उसे एशियन गेम्स समेत शॉटपुट में एक के बाद एक उपलिब्ध की ओर खींचने का जरिया बनने वाला लम्हा है। उस स्पर्धा में मेडल मिलने के बाद किरण ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसके कोच रोबिन सिंह ने भी किरण को शॉटपुट में अंंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। किरण बालियान खेल कोटे से राजस्थान पुलिस में आईबी अधिकारी के रूप में कार्यरत है। किरण का कहना है कि अब उसका लक्ष्य ओलंपिक में देश के लिए मेडल जीतना है।

आ गए आज मेरे चाहने वाले कितने

चीन के हांगझाऊ में चल रहे एशियन गेम्स में भारत का एथलेटिक्स में खाता खोलने वाली गोला फेंक एथलीट किरण बालियान के मेरठ स्थित घर पर शनिवार को जश्न का माहौल बना हुआ है। शनिवार को मोदीपुरम स्थित एकता नगर में बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। किरण की मां बॉबी का कहना है कि उनकी बेटी की कामयाबी में उनके पति (किरण के पिता) का बहुत योगदान रहा, जिन्होंने परिवार और समाज की बातों की परवाह नहीं की। हालांकि परिवार और समाज के बहुत लोग किरण के खेल के खिलाफ थे।

लेकिन अब किरण को एक के बाद एक करके मिल रही सफलता के बाद वही लोग बधाई देने के लिए भी आ रहे हैं। किरण के पिता सतीश बालियान गाजियाबाद में ट्रैफिक पुलिस में हैड कांस्टेबल हैं, वे कहते हैं कि समाज को बेटियों की प्रतिभा के अनुसार उन्हें आगे आने का अवसर देना होगा। तभी बेटियां पविार के साथ-साथ देश का नाम दुनिया भर में रोशन कर सकती हैं। उनकी बेटी जल्द ही ओलिंपिक में खेले और पदक जीतकर देश का नाम रोशन करे। वहीं, विडियो कॉल पर किरण बालियान ने कहा कि मेहनत करके भविष्य में गोल्ड मेडल जरूर लाऊंगी।

मां बनी किरण की रहनुमा

किरण बालियान की मां बॉबी बालियान का कहना है कि वे खुद रोजाना स्कूटी पर किरण के साथ स्टेडियम जाती थीं। सुबह सवा छह से आठ बजे तक स्टेडियम में रहते थे। इसके बाद शाम चार से साढ़े छह बजे तक फिर अभ्यास के लिए स्टेडियम जाते थे। महिला ट्रेनर नहीं होने की वजह से किरण को स्ट्रेचिंग करने, अभ्यास करने में दिक्कत आती थी। यह अभ्यास कराने में भी बॉबी ने बेटी की खूब मदद की है।

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