- हौसले के साथ नहीं टिक सकी कोई चुनौती, घुटनों की चोट भी नहीं डिगा सकी अन्नू का हौसला
- चिकित्सकों ने दी थी खेल छोड़ने की सलाह
- घुटनों ने साथ छोड़ा तो हौसलों से बढ़ाए सफलता के कदम
- कॅरियर के शुरुआत में ही अन्नू के घुटनों में हो गई थी इंजरी
जनवाणी संवाददाता |
सरधना: एशियन गेम्स में देश को स्वर्ण पदक दिलाने वाली अंतर्राष्ट्रीय भाला फेंक खिलाड़ी अन्नू रानी कामयाबी के शिखर तक इतनी आसानी से नहीं पहुंची है। करीब एक दशक से अधिक की साधना और तपस्या का परिणाम है कि आज देश की बेटी को लोग प्यार दे रहे हैं। तमाम चुनौतियों और कठिनाइयों को हराकर अन्नू ने कामयाबी की ऊंचाइयों पर पहुंच कर इतिहास में अपना नाम लिखा है। करियर के शुरुआत में ही घुटनों की इंजरी ने सबसे पहली चुनौती अन्नू के सामने खड़ी की थी।

जब चिकित्सकों ने भी अन्नू को खेल छोड़ने की सलाह दी थी। एक बार को अन्नू भी हिम्मत हार गई थी। मगर गुरुकुल प्रभात आश्रम के स्वामी विवेकानंद ने अन्नू का उज्जवल भविष्य होने की बात कहते हुए खेलने के लिए कहा। स्वामी से अन्नू का परिवार दशकों से जुड़ा हुआ है। स्वामी जी का आशीर्वाद और अन्नू अन्नू के साहस के आगे कोई इंजरी या चुनौती नहीं टिक सही। जिसका परिणाम आज यह है कि अन्नू एशियन गेम्स से स्वर्ण पदक लेकर लौटी।
सरधना में बहादरपुर गांव निवासी अमरपाल सिंह किसान परिवार है। पूरे परिवार की जीवकी खेती है। यह परिवार कई पीड़ियों से गुरुकुल प्रभात आश्रम से जुड़ा हुआ है। अमरपाल सिंह की बेटी अन्नू रानी को बचपन से खेल पसंद थे। अन्नू रानी ने वर्ष 2009 में जेवलिन थ्रो को अपना करियर चुना था। अन्नू का शुरू से ही सपना रहा कि वह देश के लिए खेले। इसके लिए अन्नू ने दिन-रात मेहनत की। अन्नू के पिता अमरपाल सिंह बताते हैं कि करियर के शुरुआती समय में अन्नू के घुटनों में इंजरी हो गई थी।
डॉक्टरों ने अन्नू के घुटनों का आॅपरेशन कराने और खेल को छोड़ने की सलाह दी थी। तब कुछ समय के लिए हिम्मत कम हो गई थी। मगर स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि अन्नू का भविष्य उज्जवल है। वह खेल में नाम कमाएगी। स्वामीजी का आशीर्वाद और अन्नू के जुनून के आगे कुछ नहीं टिका। अन्नू ने खेल नहीं छोड़ा, बल्कि अभ्यास तेज कर दिया। तमाम चुनौतियों के बीच अन्नू ने कई रिकॉर्ड अपने नाम किए।
जिनमें आॅलंपिक जाने वाली पहली भारतीय भाला फेंक महिला खिलाड़ी, वर्ल्ड चैंपियनशिप में फाइनल तक जाने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट, एशियाई गेम्स में तीन-तीन मेडल, आठ बार से अधिक नेशनल रिकॉर्ड होल्डर समेत तमाम रिकॉर्ड अन्नू के नाम हैं। करीब एक दशक से अधिक की साधना व तपस्या का फल यह है कि आज अन्नू एशियन गेम्स से स्वर्ण पदक लेकर लौटी है। अन्नू की कामयाबी पर आज पूरा देश गर्व कर रहा है।
अन्नू का गर्ल्स को संदेश: समाज लड़कियों को करे सपोर्ट, संघर्ष से न डरे युवा
घर पहुंची भाला फेंक अन्नू रानी ने युवाओं को संदेश देकर उनमें जोश भरने का काम किया। अन्नू रानी ने कहा कि सफलता एक दिन में नहीं मिलती है। शुरूआती समय में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। संसाधनों के अभाव में अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ाना पड़ता है। इसलिए युवा संघर्ष करने से पीछे नहीं हटें। पूरी ईमानदारी के साथ मेहनत करें तो कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। विशेष रूप से अन्नू ने लड़कियों को सपोर्ट करने की अपील की। कहा कि लड़कियां सफल होती हैं तो कई कुलों को सुधार देती हैं।

अन्नू रानी ने कहा कि करियर के शुरुआती समय में उन्हें बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उस समय कोई सरकारी मदद भी नहीं मिल पाती है। बांस की जैवलिन से अभ्यास करना होता था और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए ट्रेन से नीचे लेटकर भी सफर करना होता था। समाज का देखते हुए पिता भी नहीं चाहते थे कि वह खेल में जाए। प्रभात आश्रम की टीम ने परिवार को भरोसा दिलाया। कई बार आसपास कोई उम्मीद नहीं होने के बाद भी अपनी लक्ष्य से पीछे नहीं हटी। दिन रात मेहनत का नतीजा है कि आज सभी के आशीर्वाद से इस मुकाम पर है।
अन्नू रानी कहा कि युवा मेहनत करने से पीछे नहीं हटें। आज सरकार द्वारा भी खिलाड़ियों की मदद के लिए तमाम व्यवस्था की जाती हैं। कभी कभी ऐसा समय आता है कि खेल छोड़ दिया जाए। उस समय यदि दृढ़ संकल्प करके आगे बढ़ा जाए तो सफलता एक दिन जरूर मिलती है। इसलिए युवा मेहनत करके खेलों में आगे आएं और देश का पूरी दुनिया में नाम रोशन करें। उन्होंने विशेष रूप से समाज को संदेश दिया कि लड़कियों को आगे बढ़ने में सपोर्ट करें। उन्हें रोकने के बजाय सपोर्ट करेंगे तो इसी तरह देश का नाम रोशन करके दिखाएंगी।

