Sunday, April 26, 2026
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कीमत जिंदगी की, सामान मौत का

  • शहर के कुछ ब्लड बैंकों को लेकर उठ रहे गंभीर सवाल, खून की नियमित जांच की जरूरत
  • एफेरेसिस मशीन ही नहीं थी तो फिर कैसे तैयार हो रही थी प्लेटलेटस
  • कहने को ब्लड बैंक मगर मौके पर नहीं मिला डाक्टर, स्टाफ की काबलियत भी संदेहास्पद
  • खामियों का मिला था अंबार, ड्रग अफसरों ने लखनऊ भेजी रिपोर्ट, निरस्त हो सकता है लाइसेंस

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: चंद सिक्कों के लिए जिंदगी की कीमत पर इंसानियत के दुश्मन मौत का सामान बेच रहे हैं। ये पूरा मामला हापुड़ रोड क्षेत्र में संचालित एक ब्लड बैंक शाइन चैरिटेबल ब्लड बैंक सेंटर से जुड़ा है। जिसको लेकर हैरान करने वाली बातें सामने आयी हैं। ब्लड बैंक वो जगह होती है, जहां से मौत से जिंदगी की जंग लड़ने वालों के लिए रक्त की जरूरत पूरी की जाती है। इसके अलावा तमाम गंभीर रोगियों को जब रक्त की जरूरत होती है। खासकर उन रोगियों जो मौत के मुहाने पर खड़े होते हैं,

जिनके जिस्म में किसी बीमारी के चलते प्लेटलेटस कम हो जाते हैं, उनके लिए प्लेटलेटस का इंतजाम शहर के कुछ ब्लड बैंकों से किया जाता है। जिस शाइन चैरिटेबल ब्लड बैंक जहां ड्रग विभाग की टीम ने विगत दिनों छापा मारा था, वहां भी प्लेटलेटस उपलब्ध करायी जाने का दावा किया जाता था, प्लेटलेटस शरीर के लिए कितनी जरूरी हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यदि प्लेटलेटस कम हो जाए या प्लेटलेटस का इंतजाम होने में तनिक भी देरी हो जाए तो मौत झपटा माकर जिंदगी को छीन लेती है।

एफेरेसिस मशीन ही नहीं, बल्कि कई और भी खामियां

अरविंद गुप्ता, सहायक आयुक्त (औषधि) मेरठ मंडल, मेरठ के निर्देशानुसार पीयूष कुमार औषधि निरीक्षक, प्रियंका चौधरी औषधि निरीक्षक, मेरठ एवं गौरव लोधी औषधि निरीक्षक मेरठ मंडल द्वारा कतिपय वैध लाइसेंस ब्लड सेंटर, शाइन चैरिटेबल ब्लड सेंटर पर विगत 29 सितंबर को जब कार्रवाई की गई। जांच के दौरान ब्लड सेंटर में अनेकों अनियमितताएं पाई गई। जिसमें ब्लड सेंटर में एफेरेसिस मशीन के न होते हुए भी इश्यू किये जाना जिनका मास्टर रजिस्टर एवं इश्यू रजिस्टर में कहीं कोई रिकॉर्ड नहीं पाया गया।

बिना ब्लड सेंटर का संचालन किया जा रहा था। कार्यरत स्टाफ द्वारा बताए गए कलेक्शन से फिजिकल स्टाक का मिलान न हो पाना। ब्लड सेंटर में पाईं गईं अन्य सभी कमियों का उल्लेख जांच आख्या में करते हुए आख्या सहायक आयुक्त (औषधि) मेरठ मंडल एवं लखनऊ को प्रेषित की जा रही है। जनहित को ध्यान में रखते हुए ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 की धारा 22(1) में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए शाइन चैरिटेबल ब्लड सेंटर, हापुड़ अड्डा मेरठ को अग्रिम आदेशों तक तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया गया है।

प्लेटलेटस का दावा, लेकिन एफेरेसिस मशीन ही नहीं

शाइन ब्लड बैंक जहां ड्रग की टीम पहुंची थी, वहां प्लेटलेटस की उपलब्धता का भी दावा किया जाता था, लेकिन ड्रग की टीम की कार्रवाई के दौरान वहां प्लेटलेटस बनाने वाली मशीन एफेरेसिस ही नहीं थी। जब एफेरेसिस मशीन ही नहीं थी तो फिर प्लेटलेटस कैसे और कहां से तैयार की जा रही थीं या फिर यह मान लिया जाए कि प्लेटलेटस के नाम पर खालिस रक्त की थैलियां थमायी जा रही थीं। हालांकि यह जांच तकनीकि जांच का भी विषय है, लेकिन बकौल ड्रग एडीसी अरविंद कुमार के जब छापा मार तो शाइन चैरिटेबल ब्लड बैंक में एफेरेसिस मशीन ही नहीं थी।

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ड्रग विभाग के एडीसी अरविंद कुमार ने जिस एफेरेसिस मशीन के न मिलने का जिक्र किया है, उसकी अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आमतौर पर जीवन रक्षक प्लेटलेटस का इंतजाम इस मशीन के बगैर संभव ही नहीं है। अब यह समझ लीजिए कि यह मशीन कैसे काम करती है। जब किसी मरीज को प्लेटलेटस की जरूरत होती है तो उसके लिए एक डोनर तलाश जाता है। जो काम आसान नहीं है।

यदि डोनर मिल जाता है तो इस एफेरेसिस मशीन की मदद से प्लेटलेटस तैयार की जाती हैं। इसकी भी एक प्रक्रिया है। जो भी ब्लड डोनर होता है, उससे एफेरेसिस मशीन रक्त लेती रहती है। उसको एक अलग थैली में जमा करती है। उस रक्त से प्लेटलेटस निकाली जाती हैं। प्लेटलेटस निकालने के बाद जो रक्त होता है उसको एफेरेसिस मशीन की मदद से डोनर के शरीर में वापस भेजा जाता है। यह एक जटिल चिकित्सकीय प्रक्रिया है जो बगैर एफेरेसिस मशीन के संभव नहीं है। इसलिए ड्रग एडीसी ने इसको लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

लखनऊ भेज दी गयी रिपोर्ट

एडीसी ड्रग अरविंद गुप्ता ने बताया कि एक सूचना के आधार पर शाइन ब्लड बैंक में कार्रवाई की थी। पीयूष कुमार औषधि निरीक्षक, प्रियंका चौधरी औषधि निरीक्षक एवं गौरव लोधी औषधि निरीक्षक मेरठ मंडल इस कार्रवाई में शामिल रहे। मौके पर प्लेटलेटस बनाने वाली मशीन एफेरेसिस नहीं पायी गयी। कई अन्य खामियां भी मिलीं। इसको लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट लखनऊ भेज दी गयी है।

ब्लड बैंक संचालक से नहीं हो सका संपर्क

शाइन चैरिटेबल ब्लड बैंक पर तमाम खामियां गिनाते हुए जो कार्रवाई ड्रक अफसरों की है उसको लेकर संचालक का पक्ष तमाम प्रयासों के बाद भी नहीं लिया जा सका। जिसकी वजह से उनका पक्ष यहां उल्लेख नहीं किया जा सका है। यदि वह पक्ष देंगे तो उसको भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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