
गोपाल कृष्ण गोखले ने ही महात्मा गांधी को सार्वजनिक जीवन में उतरने के लिए प्रेरित किया था। संयोग की बात है, डॉ राजेंद्र प्रसाद को भी देशसेवा की प्रेरणा उन्हीं से मिली। गोखले से अपनी पहली भेंट का उल्लेख करते हुए राजेन्द्र बाबू ने लिखा है। राजेंद्र बाबू ने यूनिवर्सिटी की परीक्षा में टॉप किया था और वे वकालत की तैयारी कर रहे थे। उसी दौरान गोपाल कृष्ण गोखले ने सर्वेंट आॅफ इंडिया सोसायटी का गठन किया था। इसी से प्रेरित होकर राजेंद्र बाबू उनसे मिलने के लिए पहुंचे। मुलाकात के दौरान गोखले ने राजेंद्र बाबू से कहा, ‘हो सकता है कि तुम्हारी वकालत खूब चले, बहुत रुपये तुम पैदा कर सको। बहुत आराम और ऐश में दिन बिताओ, लेकिन मुल्क का भी दावा कुछ लड़कों पर होता है और चूंकि तुम पढ़ने में अच्छे हो, इसलिए तुम पर यह दावा और अधिक है।’ उन्होंने खुद के बारे में भी बताया कि, ‘मेरे सामने भी यही प्रश्न था। मैंने सबकी आशाओं पर पानी फेर कर देश-सेवा का व्रत लिया, तो मेरे घरवाले बहुत दुखी हुए, लेकिन कुछ दिनों बाद वे सब बातें समझ गए और मुझसे खूब प्रेम करने लगे। हो सकता है कि यह सब तुम्हारे साथ भी हो, पर इसका विश्वास रखो, सब लोग अंत में तुम्हारी पूजा करने लगेंगे।’ इस मुलाकात के बाद राजेंद्र बाबू ने कुछ विचार किया और फिर अपना पूरा जीवन देश को समर्पित कर दिया। हम अपनी राह चुनते हुए खुद को केंद्र में रखते हैं, जबकि समाज को केंद्र में रखने से चयन में आसानी होती है। ज्यादातर लोग यह नहीं सोचते कि उनके कार्य से देश को क्या लाभ होगा, स्वयं का लाभ तो कोई भी पा सकता है।


