Wednesday, April 22, 2026
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कम्पोस्ट खाद से बढ़ाएं खेती की पैदावार

KHETIBADI


रासायनिक खादों से लगातार प्रयोग से मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा घटने घटने लगती है। जमीन धीरे बंजर होने लगती है। जबकि कंपोस्ट खाद व जैविक खेती करने से पोषक तत्व जमीन में स्थिर रहते हैं। कई साल लगातार जैविक खेती करने व कम्पोस्ट खाद के उपयोग से बंजर जमीन भी उपजाऊ हो जाती है। इस तरह आप बंजर जमीन को कंपोस्ट खाद से उपजाऊ बना सकते हैं।

कंपोस्ट खाद के फायदे बहुत हैं। कंपोस्ट खाद जैव कृषि का मुख्य घटक है। नम जैव पदार्थों का ढेर बनाकर कुछ काल तक प्रतीक्षा करना ताकि इसका विघटन हो जाय। गोबर व फसल के अवशेष,सब्जिÞयों के छिलकों व कूडा -करकट, मिट्टी को कुछ विशेष परिस्थितयों में रखकर तैयार की जाती है।

कम्पोस्ट एक प्रकार की खाद है जो जैविक पदार्थों के अपघटन एवं पुन:चक्रण से प्राप्त की जाती है। विघटन क्रिया में दो तीन हफ़्ते लग सकते हैं। विघटन प्रक्रिया के बाद वह ह्यूमस में बदल जाता है। और कम्पोस्ट कहलाता है।

कंपोस्ट खाद में पौधे के जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। कंपोस्ट खाद के उपयोग से पौधे बड़ी तेजी से बढ़ते है। फलन अच्छी होती है। काम्पोस्ट खाद से तैयार अनाज की आज कल बाजार में बड़ी मांग है। सुपर मार्केट में जैविक खेती से तैयार आम अनाज से काफी महँगा बिकता है। कंपोस्ट खाद के प्लांट लगाकर कंपोस्ट खाद उत्पादन बहुत से किसानों के लिए यह उनका प्राइमरी बिजनेस बन गया है। खेती किसानी डॉट ओर्ग से सीईओ व फाउंडर मिस्टर राम अनुनाकी मानते है कि कम्पोस्ट खाद व जैविक खेती के लगातार प्रयोग से हम उर्वरा खो चुकी बंजर धरती माँ को पुन:जीवित कर सकते हैं। अधिक से अधिक किसान भाई कंपोस्ट खाद का खेतों से प्रयोग करें।

कंपोस्ट खास बेहद सस्ती व बनाने में किसी विशेष तकनीक की जरूरत नहीं। कंपोस्ट खाद बनाने में बहुत कम खर्च आता है। कंपोस्ट खाद के बनाने में आवश्यक सामग्री हमारे आस पास ही मिल जाती है। कंपोस्ट खाद बनाने में उपयोग आने वाली सामग्री जैसे गोबर, फसल के अवशेष, घास-फूस, व अन्य घरेलू कचरे आदि हमें अपने घर के आस पास आसानी से व लगभग मुफ़्त मिल जाते हैं। कंपोस्ट खाद बनाने में किसी विशेष तकनीक की जरूरत नही होती है। कम पढ़ा लिखा किसान भी कम्पोस्ट खाद बड़ी आसानी से अपने घर पर बना लेगा।

पौधे कम्पोस्ट खाद से मिलने वाले पोषक तत्वों की सीधे अवशोषित करते हैं झ्र रासायनिक खादों से मिलने वाले पोषक तत्व को पौधे भले ना सीधे ग्रहण करते हों। किंतु कम्पोस्ट खाद से मिलने वाले पोषक तत्वों को पौधे बड़ी सरलता से ग्रहण करते हैं। जिससे पौधों की वृधि व बढ़वार जल्दी होती है।

पौधे के लिए आवश्यक पोषक कम्पोस्ट खाद में मौजूद रहते हैं खेत में कम्पोस्ट खाद डालते ही जड़ों के द्वारा इसमें मौजूद पोषक तत्व पौधे को मिलते हैं। जिससे पौधा बड़ी तेजी से बढ़ते हैं। बढ़वार अच्छी होती है। जिसके परिणाम स्वरूप फसल की पैदावार अच्छी होती है। इसके साथ कंपोस्ट खाद से तैयार अनाज व सब्जी उच्च गुणवत्ता वाली होती है।

खेतों में कई साल तक कंपोस्ट खाद का प्रयोग करते रहने से मिट्टी की संरचना सुधरती है। मिट्टी का गठन सही होने से उसमें जल धारण की क्षमता बढ़ती है। जिससे पौधों की जल माँग में कमी आती है। फसलों को बार बार पानी नही देना पड़ता है। जिससे सिंचाई कम करनी होती है। कंपोस्ट खाद सिंचाई में होने वाले खर्च को भी कम करता है।

रासायनिक खादों से लगातार प्रयोग से मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा घटने घटने लगती है। जमीन धीरे बंजर होने लगती है। जबकि कंपोस्ट खाद व जैविक खेती करने से पोषक तत्व जमीन में स्थिर रहते हैं। कई साल लगातार जैविक खेती करने व कम्पोस्ट खाद के उपयोग से बंजर जमीन भी उपजाऊ हो जाती है। इस तरह आप बंजर जमीन को कंपोस्ट खाद से उपजाऊ बना सकते हैं।

कम्पोस्ट खाद ईको फ्रÞेंडली होती है। कम्पोस्ट खाद प्रकृति में मौजूद वस्तुओं के प्रयोग से बनायी जाती है। इसलिए इससे पर्यावरण को कोई नुकसान नही पहुँचता। बल्कि रासायनिक खादों से मृदा व जल प्रदूषित हो जाते हैं। रासायनिक खादों से तैयार अनाज के प्रयोग से आज लोग बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। कंपोस्ट खाद से तैयार अनाज व सब्जियों का स्वाद अच्छा होता है। साथ ही ये सेहतमंद बनाता है।

बाजार में आज हर खाने वाली चीज में रसायन मिला होता है। लोग रासायनिक खादों के बुरे परिणामों को जानते हुए भी ऐसे अनाजों व सब्जिÞयों का इस्तेमाल कर रहे हैं। और बीमार रोग रहे हैं। इसका बड़ा कारण यह है की उनके पास इसके अलावा कोई विकल्प नही नही है। जब आप बिना रासायनिक खादों की खेती करेंगे यानी जैविक खेती करेंगे। और कम्पोस्ट खाद का उपयोग कर अनाज व सब्जिÞयाँ व फल उगाएंगे। तो लोग अधिक पैसे देकर जैविक अनाज व जैविक सब्जियां व जैविक फलों को खरीदेंगे। इससे आपको फसल का मुंह मांगा दाम मिलेगा। कंपोस्ट खाद के प्रयोग से मिट्टी से साथ साथ किसान का जीवन स्तर भी सुधरेगा।


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