Saturday, May 2, 2026
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क्रमिक अनशन के 88 दिन, फिर भी कोई सुनवाई नहीं

  • गांधी आश्रम में माफिया के खिलाफ आंदोलन

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: गांधी आश्रम परिसर में 88 दिन से क्रमिक अनशन पर कर्मचारी बैठे हैं, लेकिन इनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही हैं। आखिर इनकी बात अधिकारी क्यों नहीं सुन रहे हैं। इनका ये आंदोलन माफिया के खिलाफ हैं। ये गांधी आश्रम की जमीन को किसी भी सूरत में बिकने नहीं दे रहे हैं। लीज पर जमीन देने का भी ये विरोध कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद इनकी बात सुनने के लिए प्रशासन स्तर से भी कोई पहल नहीं हुई हैं।

कड़ाके की ठंड पड़ने लगी हैं, ऐसे में उम्रदराज कर्मचारी के साथ कोई अनहोनी हो गई तो क्या तभी प्रशासन की नींद टूटेगी? 88 दिन से इनकी बात सुनने का समय अधिकारी नहीं निकाल पाए हैं? आखिर माजरा क्या हैं? यदि आंदोलित कर्मचारी गलत है तो उनका क्रमिक अनशन खत्म क्यों नहीं कराया जा रहा हैं। यदि आंदोलित कर्मचारियों की मांग सही है तो उनका पक्ष सुनते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही हैं? आखिर कार्रवाई नहीं करने के पीछे मजबूरी क्या हैं?

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88 दिन से रात-दिन खुले आकाश के नीचे आंदोलित कर्मचारी टेंट लगाकर क्रमिक अनशन पर बैठे हैं। ये उनका आंदोलन भू-माफिया के खिलाफ है। राष्ट्र की धरोहर गांधी आश्रम को बचाने के लिए ये आंदोलन चल रहा है। कार्रवाई नही होने के कारण, खादी ग्रामोद्योग आयोग की नाक के नीचे भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। खादी ग्रामोद्योग आयोग व डिप्टी रजिस्टार एक-दूसरे पर पूरा मामला टाल रहे है। कार्रवाई को लंबित किया जा रहा है। कार्रवाई नही होने के कारण गांधी आश्रम मेरठ के दोषी सदस्यों के हौसले बढ़े हुए हैं। ऐसा आरोप आंदोलकारी कर्मचारी लगा रहे हैं।

आंदोलकारियों ने कहा है कि एक समय पर ये भू-माफिया इस जमीन पर कब्जा कर लेंगे, जो राष्ट्र की धरोहर लोगो के हाथ से निकल जाएगी। गांधी आश्रम राष्टÑीय धरोहर हैं, जिसकी जमीन को बेचने और लीज पर देने का समिति का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं हैं। इस तरह से तो औने-पौने दाम पर ये जमीन लीज पर या फिर बेच दी गई होती। धरने पर संरक्षक अनंत देव कौशिक, मंत्री प्रेमचद, महेश पंत, सुमित, हिमांशु आदि लोग हर रोज क्रमिक अनशन पर खुल आकाश के नीचे रात-दिन बैठ रहे हैं।

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