- गांव वाले पूछ रहे किसकी इजाजत से शुरू की गयी दुर्गा इंडस्ट्रीज
- रातोंरात बदल गए फिटकरी में फैक्ट्री का विरोध करने वालों के सुर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: इंचौली के जंगलों में बुधवार को मरघट-सा सन्नाटा पसरा हुआ है। दुर्गा इंडस्ट्रीज जहां बीते मंगलवार को अमंगलकारी विस्फोट की घटना में दो की मौत हो गयी थी। वहां आसपास तो छोड़िये दूर तक भी कोई नजर नहीं आ रहा था। काफी आगे गांव में पहुंचने पर कुछ लोग मिले। ये किसी जसवंत के मकान की बैठक की ओर जा रहे थे। संवाददाता को भी वहीं ले गए। उन्होंने कहा कि यहां क्या रखा है? यदि कुछ जानकारी लेनी है तो फिर किशोरीपुर गांव जाना होगा।

वहीं से सही बात और जानकारी मिल सकेगी। उन्होंने केवल इतना बताया कि पोस्टमार्टम के बाद कल ही शव परिजनों को सौंप दिए गए थे। पता चला है कि गांव में पहुंचने के बाद प्रवीण व शंकर के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। फिटकरी के ग्रामीण चाहते हैं कि कुछ ऐसा किया जाए जो पूरे मामले की जानकारी लखनऊ में बैठे अफसरों तक पहुंचे।
किसी को नहीं पता बंद फैक्ट्री कैसे हुई चालू ?
जसवंत के घर बैठक में करीब दर्जन भर लोग जमा थे। हालांकि फिटकरी गांव का कोई भी व्यक्ति दुर्गा इंडस्ट्रीज के हादसे की चपेट में नहीं आया। मरने वाले और घायल सभी किशारीपुर के हैं, लेकिन फिटकरी गांव के ग्रामीणों की दिलचस्पी केवल इस बात में है कि साल 2018 में जब फैक्ट्री को बंद करा दिया गया था तो यह दोबारा किसकी अनुमति से शुरू की गयी।

उन्होंने जनवाणी संवाददाता को एक पत्र भी दिखाया। पत्र में दुर्गा इंडस्ट्रीज के दो पार्टनरों के साइन थे। पत्र में लिखा था कि गांव की सुरक्षा व परेशानी को देखते हुए फैक्ट्री को बंद किया जाता है। जब तक ग्रामीणों और प्रशासन की सहमति नहीं मिलेगी, तब तक इसको चालू नहीं किया जाएगा। फिर ऐसा क्या हुआ जो यह फैक्ट्री चालू करा दी गयी।
अफसरों को भी नहीं पता
ग्रामीणों ने बताया कि पुलिस प्रशासन के जो आला अफसर हादसे की सूचना दिए जाने के बाद दुर्गा इंडस्ट्रीज पहुंचे थे। उनसे भी यही कहा गया था कि जो होना था हो गया, लेकिन जब यह फैक्ट्री बंद करा दी गयी थी तो फिर किसके इशारे पर इसको दोबारा चालू कर दिया गया। उन्होंने पूछा कि क्या इसकी जांच पड़ताल की जाएगी कि बंद फैक्ट्री किसके इशारे पर चालू करा दी गयी। इसका कोई उत्तर किसी अफसर ने नहीं दिया। उनका कहना था कि ये बाते करने का वक्त नहीं। दफ्तर आइये जो कहना है वो वहां आकर कहिए।
तगड़ा कनेक्शन, नहीं बिगड़ा कुछ
दुर्गा इंडस्ट्रीज के साझेदार को सत्ताधारी दल भाजपा के तमाम बड़े नेताओं से मजबूत संबंध हैं। कई केंद्रीय मंत्रियों से उनकी अच्छी खासी जान पहचान हैं। कई विधायक व मंत्री उनके पारिवारिक मित्र हैं। जानकारों का कहना है कि इसके चलते दुर्गा इंडस्ट्रीज में दो लोगों की बायलर फटने से मौत की घटना के बावजूद प्रशासन व पुलिस के स्तर पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई अमल में नहीं लायी गयी।

अधिकारियों की यदि बात करें तो उनका रवैया भी घटना को लेकर बजाय कार्रवाई के मामले को मैनेज करने वाला नजर आया। यह अधिकारियों के प्रयास ही थे जो जिनके शंकर व प्रवीण के परिजनों को लेकर थाना इंचौली पहुंचे। मृतकों के परिजनों से उनका समझौता कराया। हालांकि यह बात अलग है कि समझौते के नाम पर बड़ी रकम खर्च करनी पड़ी। कुछ करीबियों का दावा है कि यह घटना करीब 50 लाख की पड़ गयी है। साथ ही यह भी पता चला है कि यह फैक्ट्री शीघ्र ही चालू भी करा दी जाएगी। हालांकि प्रशासन के अफसर जांच की बात कह रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जांच कुछ मामले को रफादफा करने का प्रयास भर है। कल की विस्फोट की घटना के बाद दिन में जो लोग इसको बंद कराए जाने की पुरजोर तरीके से पैरवी कर रहे थे आज उनके भी सुर बदले हुए नजर आए। उनका कहना था कि फैक्ट्री चलती रहनी चाहिए।यह चमत्कार मालिकों के थाना इंचौली पहुंचने के बाद हुआ बताया जा रहा है।

