जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: उदयनिधि स्टालिन ने एक बार फिर सनातन धर्म को लेकर विवादित बयान दिया है। तमिलनाडु विधानसभा में बोलते हुए डीएमके नेता ने कहा कि “सनातन, जिसने लोगों को बांटने का काम किया, उसे खत्म कर देना चाहिए।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है।
विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने राजनीतिक सौहार्द और सहयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को उनके नेता सहित कई नेताओं ने शुभकामनाएं दी थीं और यही भावना सदन के भीतर भी दिखाई देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष अलग-अलग पंक्तियों में जरूर बैठते हैं, लेकिन तमिलनाडु के विकास के लिए सभी को साथ मिलकर काम करना होगा।
वंदे मातरम् और राज्य गीत पर जताई नाराजगी
उदयनिधि स्टालिन ने तमिलनाडु के राज्य गीत को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि राज्य गीत को “वंदे मातरम्” के बाद बजाया गया। उन्होंने ममता बनर्जी के शपथ ग्रहण समारोह का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां वंदे मातरम् नहीं बजाया गया था और सभी जानते हैं कि वहां के राज्यपाल कौन हैं।
उदयनिधि ने मांग की कि भविष्य में तमिलनाडु के राज्य गीत को कभी दूसरे स्थान पर न रखा जाए।
“मुख्यमंत्री विपक्ष की सलाह भी मानें”
उदयनिधि स्टालिन ने यह भी कहा कि उन्होंने और मुख्यमंत्री ने एक ही कॉलेज में पढ़ाई की है। ऐसे में वे अपने अनुभव और विचार साझा करना चाहते हैं और उम्मीद करते हैं कि मुख्यमंत्री विपक्ष के सुझावों को भी स्वीकार करेंगे।
भाजपा ने बयान को बताया “जहरीली राजनीति”
उदयनिधि के बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्ता सी आर केशवन ने इसे “जहरीली बयानबाजी” करार दिया। उन्होंने कहा कि उदयनिधि स्टालिन “तमिलनाडु के राहुल गांधी” हैं, जो विभाजनकारी राजनीति कर रहे हैं। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि डीएमके लगातार हिंदू आस्था और परंपराओं का अपमान करती रही है।
केशवन ने कहा कि डीएमके नेताओं द्वारा पहले भी हिंदू धर्म और धार्मिक परंपराओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हैं और तमिलनाडु की जनता इसे भूलेगी नहीं।
फिर गरमाई तमिलनाडु की राजनीति
सनातन धर्म को लेकर उदयनिधि स्टालिन पहले भी विवादों में रह चुके हैं। उनके ताजा बयान के बाद एक बार फिर तमिलनाडु की राजनीति गरमा गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा विवाद बन सकता है।

