Sunday, May 3, 2026
- Advertisement -

परदेसियों पर दिल फिदा करते आए हैं मेरठ के वाशिंदे

  • भूली बिसरी यादें: खूब वोट दिए और उन्हें बना लिया अपना सांसद, आज स्थिति उलट
  • देसी बनाम परदेसी: सांसदी के सात कार्यकाल रहे परदेसियों के नाम
  • जनरल शाहनवाज चार बार, मोहसिना को दो बार व भड़ाना को एक बार दिया मौका

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: ‘परदेसियों से न अखियां मिलाना, परदेसियों को है एक दिन जाना’। एक फिल्मी तराने की यह पंक्तियां भले ही परदेसियों की बेरुखी बयां कर रही हों लेकिन मेरठ की तासीर और यहां के लोगों की खुशमिजाजीÞ देखिए कि उन्होंने परदेसियों को भी अपने दिल में जगह दी है। दौर चूंंकि चुनावी है तो बात भी चुनावी माहौल की ही हो रही है। मेरठ लोकसभा सीट भले ही वीआईपी सीट न हो लेकिन यह सीट यूपी की महत्वपूर्ण सीटों में शुमार है।

07 29

जंग-ए-आजादी के बाद जब देश आजाद हुआ तब होने वाले चुनावों में आज होने वाले चुनावों जैसी उठापटक नहीं हुआ करती थी। प्रत्याशी चाहे बाहरी हो या स्थानीय, अगर मेरठ के लोगों को वो भा जाए तो फिर यहां के लोग मिलकर उसे चुनाव लड़ाते थे। यही कारण रहा है कि जब देश में 1952 में पहला लोकसभा चुनाव हुआ था तब से लेकर अब तक मेरठ सीट पर सात बार परदेसियों का कब्जा रहा है।

02 26

1952 में पहली बार हुए लोकसभा चुनावों में यहां से कांग्रेस के टिकट पर जनरल शाहनवाज खान जीते। वैसे तो शाहनवाज खान का ताल्लुक पाकिस्तान के रावलपिंडी से रहा लेकिन पारटिशन के बाद वो भारत आ गए और दिल्ली में बस गए। उनकी रिहाइशगाहों में उत्तर प्रदेश के कुछ दूसरे शहर भी रहे। इसके बाद 1957, 1962 और 1972 में भी उन्होंने कांग्रेस कैन्डीडेट के रूप में लोकसभा में मेरठ का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद मोहसिना किदवई भी मेरठ के लिए बाहरी प्रत्याशी थीं लेकिन मेरठ की जनता ने कांगे्रस की इस महिला प्रत्याशी को भी पूरा प्यार और सम्मान दिया।

03 30

इसी के चलते वो भी दो बार (1980 और 1984) मेरठ सीट से सांसद रहीं। फरीदाबाद (हरियाणा) से जब 1999 के लोकसभा चुनावों में अवतार सिंह भड़ाना मेरठ आए और लोकसभा चुनाव लड़ा तब भी मेरठियों ने परदेसियों के सम्मान में कोई कमी नहीं छोड़ी और उन्हें जिताकर अपना सांसद बनाया।

01 24

इस तरह मेरठ सीट पर कुल सात कार्यकाल परदेसियों के नाम रहे। आज स्थिति उससे उलट है। पैराशूट प्रत्याशी का नाम सुनते ही स्थानीय नेताओं में खलबली सी मच जाती है। यही कारण है कि आज अधिकतर पार्टियां प्रत्याशी चयन के मामले में फूंक फंूक कर कदम रखती हैं।

चाय की चुस्की पर राजनीति की चर्चा

चुनावी खुमार अब चढ़ने लगा हैं। चाय की दुकानों पर चाय की चुस्की के साथ राजनीति में क्या हो रहा हैं? कहां किसे टिकट मिलेगी? इसकी ही चर्चा हर तरफ हो रही हैं। सपा-बसपा अपने प्रत्याशी घोषित कर चुकी हैं। सिर्फ भाजपा का प्रत्याशी आना बाकी हैं। कौन प्रत्याशी होगा, अभी ये कहना भी मुश्किल हैं, लेकिन प्रत्याशी बाहरी भी हो सकता हैं। इसको लेकर भी चाय पर लोगों ने चर्चा की। चुनावी बिगुल बज चुका है, मेरठ में दूसरे चरण में लोकसभा चुनाव होना है, लेकिन अभी तक भाजपा ने मेरठ-हापुड़ लोकसभा से भाजपा ने अभी अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।

10 31

भाजपा प्रत्याशी को लेकर जहां संशय बना हुआ है, वहीं शहर में भाजपा से स्थानीय कार्यकर्ता को टिकट दिए जाने की मांग भी उठ रही हैं। चाय पर इसकी भी चर्चा हुई। शुक्रवार को चाय पर चर्चा मौजूद भाजपा नेताओं ने पार्टी शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठा दिये कि स्थानीय प्रत्याशी होना चाहिए, पैराशूट प्रत्याशी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस तरह से भाजपा के कुछ नेता अभी से तेवर दिखाने लगे हैं, ये कार्य तो चाय की दुकान पर सार्वजनिक तरीके से भाजपा कार्यकर्ता कर रहे हैं। ये अनुशासनहीनता के दायरे में आता हैं,

लेकिन भाजपा के वरिष्ठ नेता इस पर संज्ञान लेंगे या फिर नहीं, लेकिन चाय की चुस्की के साथ भाजपा के शीर्ष नेताओं के प्रति भी भाजपा नेताओं ने पैराशूट प्रत्याशी को लाने से पहले ही आक्रोश दिखाना शुरू कर दिया हैं। चर्चा करते हुए भाजपा नेता नरेश गुर्जर और भाजपा समर्थकों ने कहा कि बाहर के व्यक्ति को टिकट देने से अच्छा होगा की भाजपा अपने स्थानीय कार्यकर्ता को प्रत्याशी घोषित करें। चाय पर चर्चा करने वालों में प्रवीण शर्मा, नरेश गुर्जर, राबिन गुर्जर, नीरज जटोली, मनोज जटोली, श्रीराम, योगेश मलिक, अंशुल तायल, राजेंद्र प्रेमी, अमरजीत पवार, हितेश पाल आदि मौजूद रहे।

…जब रिक्शा से करते थे चुनाव प्रचार

एआईसीसी के सदस्य यूसुफ कुरैशी ने बताया कि 1967 से राजनीति में कूदे थे। वह 1971 में जनरल शाहनवाज खान लोकसभा का चुनाव लड़े। इस चुनाव का संयोजक उन्हें बनाया गया था। उस जमाने में बहुत सस्ते में चुनाव लड़ा जाता था। तब न गाड़ियां थीं और न ही मोबाइल का सिस्टम। होर्डिंग, बैनर, पोस्टर भी नहीं होते थे। छापे से दीवार पर छपाई करके पार्टी और प्रत्याशी का नाम चुनाव चिह्न छापा जाता था। पर्चे घर-घर देकर चुनाव प्रचार किया जाता था।

कार्यकर्ता रात-दिन वोटर लिस्ट लेकर मतदाता पर्चियां बनाते थे और मतदाताओं के घरों पर पर्चिंयां देकर उनसे अपने प्रत्याशी के पक्ष में वोट देने की अपील करते थे। वह रोजना जनरल शाहनवाज के साथ रिक्शा में बैठकर लाउडस्पीकर के जरिए प्रचार करते थे। रोजाना रिक्शा करीब 20 किलोमीटर चलती थी। रात को जब घर लौटते थे तो बुरी तरह थक जाते थे। जो लोग चुनाव प्रचार में जाते थे, वे अपने घर पर खाना खाते थे। आज तक प्रत्याशी को समर्थकों के लिए चाय नाश्ते से लेकर भोजन तक की व्यवस्था करनी होती है।

04 29

हद तो यह है कि पान, सिगरेट का भी इंतजाम करना पड़ता है। पार्टी की प्रत्याशी को चुनाव लड़ाती थी। पार्टी की ओर से पर्चे छपवाकर दिए जाते थे। चुनाव कार्यालय का खर्च भी पार्टी वहन करती थी। आज सारा खर्च उम्मीदवार को स्वयं वहन करना पड़ता है। चुनाव कार्यालय में पार्टी की लैंडलाइन टेलीफोन लगवाती थी। उसपर पार्टी मुख्यालय से दिशा निर्देश प्राप्त होते थे। पार्टी द्वारा एक बड़ी जनसभा आयोजित की जाती थी। उसमें आने वाली भीड़ से अंदाजा हो जाता था कि चुनाव किस के पक्ष में जा रहा है।

यह जनसभा चुनाव का रुख बदल देती थी। चुनाव प्रचार में कोई भी किसी को अपशब्द नहीं कहता था और न ही किसी का उपहास किया। कई बार दूसरी पार्टी के प्रत्याशी से जनरल शाहनवाज का सामना हो जाता था। वह उससे उसकी कुशलक्षेम पूछते थे। कभी समर्थकों ने एक दूसरे प्रत्याशी को लेकर हूटिंग नहीं की। मतदान के दिन कार्यकर्ता बस्ते भी निस्वार्थ होकर लगाते थे। मतदाताओं को कार्यकर्ता ही घरों से लाकर वोट डलवाते थे।

वोट मेरा अधिकार, मतदान करना मेरा कर्तव्य

लोकसभा चुनाव में पहली बार वोट डालने जा रहे युवा वोटर मनवीर गुर्जर ने उत्साह के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग करने की बात कही। स्वस्थ लोकतंत्र की विरासत को बचाने के लिये अपने वोट के अधिकार का प्रयोग करने पर बल दिया और कहा कि सांसद ऐसा होना चाहिए जो शहर को एक विजन,

05 25

टारगेट के साथ आए और समय-समय अनुसार अपने किए गए कार्यों का आकलन करता रहे, शिक्षा के लिए कार्य करे, रोजगार के लिए कार्य करे, चिकित्सा, सुरक्षा के लिए कार्य करे। कहा कि वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने के लिये नये मतदाताओं को उत्साह दिखाना होगा, जिससे कि वह बेहतर लोकतंत्र के लिये अपना योगदान दे सके।

spot_imgspot_img
[tds_leads title_text="Subscribe" input_placeholder="Email address" btn_horiz_align="content-horiz-center" pp_checkbox="yes" pp_msg="SSd2ZSUyMHJlYWQlMjBhbmQlMjBhY2NlcHQlMjB0aGUlMjAlM0NhJTIwaHJlZiUzRCUyMiUyMyUyMiUzRVByaXZhY3klMjBQb2xpY3klM0MlMkZhJTNFLg==" f_title_font_family="467" f_title_font_size="eyJhbGwiOiIyNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMjAiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIyMiIsInBob25lIjoiMzAifQ==" f_title_font_line_height="1" f_title_font_weight="700" msg_composer="success" display="column" gap="10" input_padd="eyJhbGwiOiIxNXB4IDEwcHgiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMnB4IDhweCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCA2cHgifQ==" input_border="1" btn_text="I want in" btn_icon_size="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxNyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTUifQ==" btn_icon_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjMifQ==" btn_radius="3" input_radius="3" f_msg_font_family="394" f_msg_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_msg_font_weight="500" f_msg_font_line_height="1.4" f_input_font_family="394" f_input_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_input_font_line_height="1.2" f_btn_font_family="394" f_input_font_weight="500" f_btn_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjExIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMCJ9" f_btn_font_line_height="1.2" f_btn_font_weight="700" f_pp_font_family="394" f_pp_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjEyIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMSJ9" f_pp_font_line_height="1.2" pp_check_color="#000000" pp_check_color_a="var(--metro-blue)" pp_check_color_a_h="var(--metro-blue-acc)" f_btn_font_transform="uppercase" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjYwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGUiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjUwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGVfbWF4X3dpZHRoIjoxMTQwLCJsYW5kc2NhcGVfbWluX3dpZHRoIjoxMDE5LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiNDAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsInBob25lIjp7ImRpc3BsYXkiOiIifSwicGhvbmVfbWF4X3dpZHRoIjo3Njd9" msg_succ_radius="2" btn_bg="var(--metro-blue)" btn_bg_h="var(--metro-blue-acc)" title_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjEyIiwibGFuZHNjYXBlIjoiMTQiLCJhbGwiOiIxOCJ9" msg_space="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIwIDAgMTJweCJ9" btn_padd="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCJ9" msg_padd="eyJwb3J0cmFpdCI6IjZweCAxMHB4In0=" f_pp_font_weight="500"]

Related articles

Kaps Cafe Firing: कपिल शर्मा के कैफे के बाहर ताबड़तोड़ फायरिंग, सुरक्षा में बढ़ा अलर्ट

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत...
spot_imgspot_img