Tuesday, May 12, 2026
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मुजफ्फरनगर सीट: बिना भाजपा के नहीं जीत पाया कोई जाट प्रत्याशी

  • चौधरी चरणसिंह व चौधरी अजित सिंह जैसे दिग्गजों की भी हुई थी हार, हरेन्द्र मलिक के लिए बड़ी चुनौती

मिर्जा गुलजार बेग |

मुजफ्फरनगर: मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर यूं तो कई जाट सांसद रहे हैं, परन्तु इस सीट का इतिहास है कि इस सीट पर बिना भाजपा के कोई भी जाट प्रत्याशी नहीं जीत पाया है। इस बार फिर इस सीट पर दो जाट प्रत्याशी आमने-सामने हैं, जिनमें संजीव बालियान भाजपा के टिकट पर हैं और हरेन्द्र मलिक सपा के टिकट पर। दोनों के बीच कड़ी टक्कर होगी, परन्तु हरेन्द्र मलिक के लिए पुराने इतिहास का रिकॉर्ड तोड़ना चुनौती होगी। हरेन्द्र मलिक यदि यह चुनाव हार जाते हैं, तो उनका नाम एक बार फिर उन लोगों की सूचि में शामिल हो जायेगा, जो गैर भाजपाई जाट यहां से चुनाव हारे हैं और यदि वह चुनाव जीत जाते हैं, तो उनके नाम एक रिकॉर्ड जुड़ जायेगा।

मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर पांच विधानसभाएं हैं, जिनमें चरथावल, बुढ़ाना, सदर, खतौली व सरधना विधानसभा हैं। पांचों विधानसभाओं में जाट मतदाता निर्णायक स्थिति में हैं, परन्त मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट का इतिहास रहा है कि इस सीट से जब भी जाट प्रत्याशी भाजपा से हटकर चुनाव लड़ा है, तो उसे हार का मुंह देखना पड़ा है। इतिहास की बात करें तो, इस सीट पर ऐसे-ऐसे जाट प्रत्याशियों ने हार का मुंह देखा है, जिनके नाम से ही लोग चुनाव जीत जाया करते थे।
1971 में इस सीट पर भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चरणसिंह ने चुनाव लड़ा था, परन्तु उन्होंने भी हार का मुंह देखा था। चौधरी चरण सिंह उस समय चुनाव हार गए थे, जब जिले की सभी आठ विधानसभा सीटों पर उनकी पार्टी बीकेडी के विधायक थे, उन्हें सीपीआई और कांग्रेस के संयुक्त प्रत्याशी ठाकुर विजयपाल सिंह ने हराया था।

1962 में सीपीआई के मेजर जयपाल सिंह कांग्रेस के सुमत प्रसाद जैन के खिलाफ चुनाव लड़े थे, वह भी इस चुनाव में वह हार गए। 1977 में वरुण सिंह कांग्रेस के टिकट पर लड़े थे, इस चुनाव में में वह लोकदल के सईद मुर्तजा से चुनाव हार गए। 1998 में जिले के बड़े जाट नेता हरेंद्र मलिक ने सपा से चुनाव लड़ा और वह भाजपा के सोहनवीर सिंह से चुनाव हार गए। 2009 में भी हरेन्द्र मलिक ने कांग्रेस से चुनाव लड़ा था, परन्तु वह चौथे नम्बर पर रहे थे।

2009 के लोकसभा चुनाव में ही उस समय जिले की राजनीति में वर्चस्व स्थापित करने वाली अनुराधा चौधरी रालोद से चुनाव लड़ी थी, उन्हें बसपा के कादिर राना से हार का मुंह देखना पड़ा। 2019 में रालोद प्रमुख स्व. चौधरी अजित सिंह की मैदान में उतरे थे, उन्हें भी डा. संजीव बालियान से हार का मुंह देखना पड़ा था। 2024 में एक बार फिर हरेन्द्र मलिक सपा के टिकट पर चुनावी मैदान में है और उनका सामना एक बार फिर दो बार के विजयी डा. संजीव बालियान से है। अब देखना यह होगा कि क्या इतिहास अपने आपको दोहराता है या फिर इस बार सारे मिथक टूट जायेंगे।

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