- ईईएसएल कंपनी से कर लिया था सात साल का करार
- 30 मार्च 2017 से 30 नवंबर 2024 तक का अनुबंध
- निगम का मार्ग प्रकाश अनुभाग कर रहा फॉल्ट दूर
- हर माह सिर्फ किस्त लेने के मौके पर दिखती है कम्पनी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: लापरवाही की इससे बड़ी और क्या मिसाल देखने को मिलेगी कि जिस शहर का अंधेरा दूर करने के लिए हर महीने डेढ़ करोड़ रुपये फूंके जा रहे हैं। उसके बाद भी शहर का न तो अंधेरा ही दूर हुआ है और न ही हादसे रुक पा रहे हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि नगर निगम के मार्ग प्रकाश अनुभाग की टीम खुद सड़कों पर स्ट्रीट लाइटें व फॉल्ट ठीक करने में जुटी रहती है। जबकि ठेकेदार कंपनी सिर्फ महीने में अपनी वेतन की किस्त लेने के मौके पर ही सामने आती है। पार्षद पिछले सात साल से हलक तक से चीख चिल्ला रहे हैं, लेकिन अफसरों के अपने घर रोशन हो रहे हैं, इसलिए यह विरोध की आवाजें नक्कारखाने में तूती के ही समान हैं।
आप नगर निगम को टैक्स देते हैं। बिजली का बिल जमा करते हैं। इसके बदले आपको मिलता है अंधेरा औैर सिर्फ अंधेरा। कोहरे की सर्द रात में स्ट्रीट लाइट जलती नहीं मिलती तो सिस्टम पर गुस्सा आता है। ऐसे हालत बनाने वालों से सवाल पूछिए। उन्हें फोन कीजिए। एसएमएस कीजिए। उनके घर तक जाइए, जब तक कि आपके मोहल्ले की स्ट्रीट लाइट न जल जाए। मेयर की जिम्मेदारी है कि अपने शहर के लोगों को अच्छी स्ट्रीट लाइट मुहैया कराए, लेकिन मौजूदा हालात बताता है कि उन्होंने प्रमुख मार्गों और मोहल्लों पर घूमकर ये जानने की कोशिश नहीं की कहां-कहां स्ट्रीट लाइट नहीं जलती। नगर आयुक्त पर पूरे शहर का जिम्मा है।
स्ट्रीट लाइट नहीं जल रही है तो उनकी भी जनता के प्रति जवाबदेही है। आपके मोहल्ले में क्यों नहीं लाइट जलती। इन्होंने स्ट्रीट लाइट ठीक कराने में अब तक क्या-क्या किया है, आप अगर मेयर और नगर आयुक्त से पूछेंगे भी तो यह आपके सवालों का जवाब नहीं देंगे। क्योंकि इन्हीं जिम्मेदारों ने शहर को अंधेरे में डुबोने का पूरा इंतजाम कर रखा है। शहर की ज्यादातर सड़कों पर पिछले सात सालों से अंधेरा कायम है। ऐसा नहीं है कि सड़कों पर स्ट्रीट लाइटें नहीं हैं, लाइटें तो हैं मगर उनके रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम ऐसी कंपनी के कंधों पर सौंप दी है, जो अपनी ही जिम्मेदारी उठाने से गुरेज कर रही है। दरअसल, अब शहर की सड़कों पर पसरा अंधेरा शहरवासियों के लिए परेशानी बन चुका है।
अंधेरे से गड्ढे भी हादसों का सबब बन रहे हैं। अब नगर निगम इस अंधेरे को दूर करने की जुगत में जुड़ गया है। शहर की सड़कों पर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए नगर निगम ने ईईएसएल कंपनी को ठेका दिया हुआ है। अनुबंध की शर्त के अनुसार प्रतिमाह नगर निगम को ईईएसएल को डेढ़ करोड़ रुपये का भुगतान करना है। कंपनी द्वारा समय से लाइट दुरुस्त ना होने के कारण शहर में लगी करीब 39 हजार लाइटों में से 8 से 10 हजार लाइटें ही काम कर रही हैं। शहर में अधिकतर सभी प्रमुख मार्ग अंधेरे में डूबे हुए हैं। आइये शहर की सड़कों का हाल जानते हैं।

बदहाली में है मेन दिल्ली रोड की सड़कें
दिल्ली रोड पर परतापुर फ्लाईओवर से लेकर बेगमपुल तक भी स्ट्रीट लाइट की उचित व्यवस्था नहीं है। खंभे लाइट्स हैं, लेकिन जलती नहीं। बिजली बंबा बाइपास पर शॉप्रिक्स मॉल् से मेवला फ्लाईओवर तक सडक पर अंधेरा पसरा रहता है। मेवला फ्लाईओवर पर जरूर स्ट्रीट लाइट लगाई गई हैं, लेकिन फ्लाईओवर से उतरते ही फिर अंधेरे में खो जाना पड़ता है। इसके बाद दिल्ली गेट से बागपत अड्डे तक सडक पर गुप अंधेरा छाया रहता है।
इस्टर्न और वेस्टर्न कचहरी रोड पर भी अंधेरा
इस्टर्न कचहरी रोड, वेस्टर्न कचहरी रोड, पीएल शर्मा रोड में कई जगह स्ट्रीट लाइट नहीं जलती। इसी तरह गढ़ रोड पर भी अधिकांश स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं। स्ट्रीट लाइटों के पोल या तो इश्तेहार टांगने के काम आ रहे हैं या फिर पक्षियों के घोंसला बनाने के काम आ रहे हैं। बागपत अड्डे और तेजगढ़ी चौक पर थोड़ी रोशनी की व्यवस्था है, लेकिन बाकी गढ़ रोड पर अंधेरे का कब्जा रहता है।
अंधेरे और बदहाली में है बिजली बंबा बाइपास
दिल्ली रोड को हापुड़ रोड से जोड़ने वाले बिजली बंबा बाइपास की लंबाई साढ़े सात किलोमीटर है, लेकिन इस साढ़े सात किलोमीटर की दूरी पर एक भी स्ट्रीट लाइट नहीं है। जबकि रात के वक्त भी इस बाइपास पर बड़ी तादाद में ट्रैफिक गुजरता है। बाइपास के किनारे चलने वाला रजवाहा कोहरे में इसे और भी ज्यादा खतरनाक बना देता हैं। ऐसा एक-दो बार नहीं कई बार हुआ है जब वाहन रजवाहे में गिरे हैं और लोगों को गंभीर चोटें आई हैं। बाइपास पर कई भीषण एक्सीडेंट भी हो चुके हैं। शायद प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद जागे।
ठेके के बाद भी मार्ग प्रकाश अनुभाग पर जिम्मेदारी
ईईएसएल कंपनी को ठेका इस मंशा से दिया गया था कि नगर निगम का मार्ग प्रकाश अनुभाग दूसरे काम कर सकेगा, लेकिन हो रहा इसके ठीक उलट है। नगर निगम का मार्ग प्रकाश अनुभाग ही शहर में कहीं भी स्ट्रीट लाइट खराब होने की समस्या मिलने के बाद उसको सही करने के लिए पहुंचता है।
शहर में कहीं नहीं बनाया गया कंट्रोल रूम
यहां सबसे बड़ी लापरवाही यह है कि ईईएसएल कंपनी ने शहर में कहीं भी अपना कंट्रोल रूम नहीं बनाया है। अब कहीं की स्ट्रीट लाइट खराब होती है तो सूचना मिलने के बाद नगर निगम का मार्ग प्रकाश अनुभाग का महकमा खुद मौके पर पहुंचकर उस खराब स्ट्रीट लाइट को बदलता है।
ईईएसएल कंपनी से ये हुआ था करार
- अनुबंध के मुताबिक ईईएसएल की जिम्मेदारी स्ट्रीट लाइट का सेटअप, उसमें नई एलईडी लगाने व उसका मेंटीनेंस, स्ट्रीट लाइट का कनेक्शन मुख्य लाइन से करने की है।
- सीसीएमएस अर्थात लाइट जलाने व बुझाने का सर्किट स्थापित करना भी कंपनी का काम है।
- ईईएसएल शहर में कंट्रोल रूम बनायेगी ताकि कहीं लाइट खराब हो तो गैंग भेजकर उस खराब लाइट को बदला जा सके।
- शहर में दो बड़े कंट्रोल रूम बनाने का करार किया गया था। ताकि छोटे कंट्रोल रूम से आने वाली समस्याओं की मॉनिटरिंग भी होती रहे।
- स्ट्रीट लाइट के पोल से लेकर बिजली लाइन तक के ढांचे के रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम की है।
हमने दर्जनों बार शिकायत की है कि जब ईईएसएल कंपनी को ठेका दे रखा है और उसे हर महीने मोटी रकम किराये की जा रही है तो फिर उसके अधिकारियों की जिम्मेदारी क्यों नहीं है? आखिर हम शहर को अंधेरे में रखने के लिए पैसा क्यों फूंके? -पंकज गोयल, भाजपा पार्षद, मेरठ
जहां से भी शिकायत आ रही है हम उसे दिखवा रहे हैं। वैसे यह कार्य ईईएसएल कंपनी को करना चाहिए, लेकिन जनता की जवाबदेही हमारी भी है। इसलिए दिल्ली रोड या गढ़ रोड समेत प्रमुख मार्गों की खराब लाइट्स जल्द ठीक करा दी जाएंगी। -राजेश चौहान, पथ प्रकाश प्रभारी नगर निगम, मेरठ।

