- 1984 में बसपा की स्थापना के करीब आठ माह बाद कैराना से लड़ा पहला चुनाव हारीं
- मायावती को पसंद आयी कैराना की बिमलेश बनी भाई सुभाष कुमार की दुल्हन
- लोस चुनाव के समय बहुजन समाज पार्टी को नहीं मिली थी पंजीकृत दल की मान्यता
राजपाल पारवा |
शामली: प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव में बसपा सुप्रीमो मायावती ने पहली बार चुनाव लड़ा। उस समय बसपा का गठन तो हो चुका था, लेकिन भारत निर्वाचन आयोग से मान्यता मिलना शेष थी। इसलिए मायावती ने निर्दलीय ही ताल ठोंकी थी। सहानुभूति लहर में मायावती 44,445 मत लेकर तीसरे स्थान पर रहीं थी। फिर भी, उन्होंने मतदाताओं से कैराना की युवती को अपनी भाभी बनाकर हमेशा के लिए एक रिश्ता जोड़ लिया था।
14 अप्रैल 1984 को बहुजन समाज पार्टी का गठन कांशीराम और मायावती ने किया। बसपा को भारत निर्वाचन आयोग से अभी चुनाव चिह्न नहीं मिला था। इसी बीच 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हो गई।
फिर, दिसंबर 1984 में लोकसभा के चुनाव हुए। तो, हर तरफ इंदिरा गांधी की हत्या से उपजी सहानुभूति लहर चली। इसके चलते तब देशभर में 514 लोकसभा सीटों में से 404 सीटें कांग्रेस को मिली थीं। कैराना लोकसभा सीट पर कांग्रेस से राजनीति में नए मुस्लिम गुर्जर 84 खाप के चौधरी अख्तर हसन ने जीत हासिल की थी। अख्तर हसन को 52.1 प्रतिशत के साथ 2, 36,904 मत प्राप्त हुए थे जबकि उनके प्रतिद्वंदी लोकदल के श्याम सिंह को 30.4 फीसदी के साथ 1,38,355 मत हासिल हुए थे। इस चुनाव की खास बात यह थी कि बसपा के गठन के बावजूद मायावती ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था। मायावती को 44,445 मत प्राप्त हुए थे। यह कुल पड़े मतों का 9.8 था। इस चुनाव तक निर्वाचन आयोग से बसपा को हाथी चुनाव चिह्न नहीं मिला था।
साथ ही, पार्टी का गठन हुए भी लगभग आठ माह ही बीते थे। न ही, दलित समाज में बसपा अभी पहचान बना पाई थी। दलित समाज भी अधिकांशत: कांग्रेस पार्टी जुड़ा थी। इंदिरा सरकार में कृषि और आवासीय पट्टे आवंटन का भूत भी दलितों के सिर चढ़कर अभी बोल रहा था। बसपा के पास चुनाव प्रचार के भी ससंधान नहीं थे। स्वयं मायावती साइकिल पर प्रचार करती थीं। चुनाव प्रचार के दौरान कैराना में मायावती की नजरें एक सुंदर सुशील युवती बिमलेश उर्फ बिल्लो पर पड़ी थी। तब मायावती के मन को बिमलेश भा गई।
बसपा कैडर से जुड़े जयनारायण जाटव और ऋषिपाल अमीन से मायावती ने इसका जिक्र किया। अरुण जाटव बताते हैं कि अक्सर लड़की वाला अपनी लड़की की शादी के लिए लड़का देखने जाता है, लेकिन यह पहली बार हुआ जब चुनाव के बाद बसपा सुप्रीमो जो चार बार यूपी की मुख्यमंत्री बनीं, ने अपने पिता प्रभुदास को कैराना भेजा। प्रभुदास ने जयनारायण जाटव व ऋषिपाल अमीन के जरिए बिमलेश के पिता तिलकराज तक अपने पुत्र सुभाष कुमार तथा बिमलेश के रिश्ते संदेश भेजा। ये संदेश सुभाष कुमार और बिमलेश की शादी के रूप में परवाना चढ़ा तो मायावती की इच्छा भी पूरी हो गई। हालांकि सुभाष कुमार अब दुनिया में नहीं है। उनका 2016 को निधन हो चुका है, लेकिन बसपा सुप्रीमो मायावती ने कैराना के लोगों से दिल का जो रिश्ता जोड़ा था, वह करीब 40 सालों बाद भी कायम है।

