Monday, March 16, 2026
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ऊंची राजनीतिक उड़ान की हसरतें ‘धड़ाम’

  • कांग्रेस के मेयर प्रत्याशी रहे नसीम कुरैशी ने बिजनौर से भरा पर्चा
  • नामांकन पत्र में कमियों के चलते पर्चा हुआ निरस्त

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कहते हैं कि राजनीति एक ऐसा शब्द है जो ‘हसरतों’ को नई परवाज (उड़ान) देता है। नई उम्मीदें गढ़ता है और साथ ही साथ ही साथ भविष्य को एक ‘सुरक्षित ठौर’ भी देता है। हांलाकि सच्चाई यह भी है कि राजनीति कभी कभी दुखदाई भी बन जाती है। पाली गर्इं ऊंची राजनीतिक हसरतें कभी कभी धड़ाम भी हो जाती हैं। ऐसी ही एक घटना मेरठ के एक वरिष्ठ कांग्रेसी के साथ घट गई। स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस के टिकट पर मेरठ से मेयर का चुनाव लड़ चुके नसीम कुरैशी इस बार भी मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर अपनी दावेदारी जता रहे थे।

जब इंडिया गठबंधन वजूद में आया तो यह सीट सपा के खाते में चली गई जिसके बाद कई कांग्रेसियों के सीनों पर सांप लोट गया। सीट गठबंधन के दूसरे घटक दल को मिलने के बावजूद कई स्थानीय कांग्रेसियों को यह गलत फहमी रही कि अन्तिम समय में सीट मेरठ के हिस्से में आ सकती है। ऐसा नहीं हुआ, लिहाजा मेरठ के एक वरिष्ठ कांग्रेसी नसीम कुरैशी की राजनीतिक हसरतें हिचकोले लेती दिखीं और उन्होंने आनन फानन में बिजनौर का रुख किया और इस सीट से आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के उम्मीदवार बन बैठे।

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उन्होंने अपने समर्थकों के साथ बिजनौर में नामांकन पत्र दाखिल कर दिया और चुनाव की तैयारियों में लग गए। इनके अलावा बिजनौर लोकसभा सीट पर कई अन्य निर्दलीय प्रत्याश्यिों ने भी अपना नामांकन दाखिल कराया था। नामांकन पत्रों की जब जांच हुई तो उसमें 12 उम्मीदवारों के पर्चे विभिन्न कमियों के चलते निरस्त कर दिए गए। बदकिस्मती से इन निरस्त हुए पर्चों में नसीम कुरैशी का पर्चा भी शामिल था। हांलाकि मेरठ के कई वरिष्ठ कांग्रेसियों को नसीम कुरैशी के नामांकन की भनक तक नहीं लगी। पार्टी के कुछ पदाधिकारी इसे नसीम कुरैशी की पार्टी के प्रति अनुशासनहीनता भी मान रहे हैं।

पूरे प्रकरण से हाईकमान को अवगत कराएंगे: जिलाध्यक्ष

नसीम कुरैशी प्रकरण में पार्टी के जिलाध्यक्ष अवनीश काजला का कहना है कि उन्होंने इस मामले का संज्ञान लिया है। यह अनुशासनहीनता के दायरे में आता है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले में वह पार्टी हाईकमान को अवगत कराएंगे। अवनीश काजला ने आगे कहा कि नसीम कुरैशी ने न तो पार्टी से इस्तीफा दिया और न ही संगठन को कुछ भी बताया, इसलिए उनके खिलाफ वो हाईकमान को अवगत कराएंगे और जो भी निर्धारित अनुशासनात्मक कारवाई होगी की जाएगी।

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