- मानक हैं, लेकिन कागजों में ही होता है उनका पालन
- स्ट्रक्चर बनाने में नहीं ली जाती इंजीनियर की एनओसी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मुंबई के घाटकोपर इलाके में गत दिनों धूल भरी आंधी के बाद एक बड़ा होर्डिंग गिरने से 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि 74 से अधिक लोग घायल हो गए. लगभग 15 हजार वर्ग फीट से बड़े इस होर्डिंग का नाम लिम्का बुक आॅफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है, हालांकि अब अधिकारियों का कहना है कि इसे नगर निकाय की अनुमति के बिना किया गया था, मुंबई की ही तरह मेरठ में भी बड़े हादसों का शायद नगर निगम के अधिकारी इंतजार कर रहे हैं। तभी तो मेरठ में होर्डिंग्स व यूनिपोल की बाढ़ आई हुई है।
सबसे बड़ी लापरवाही तो यह है कि मानक का एक भी होर्डिंग्स ठेकेदार द्वारा न तो पालन किया जा रहा है और न ही नगर निगम के अधिकारियों को इसकी फुर्सत ही है कि वह इस बात की जांच करें कि होर्डिंग्स व यूनिपोल में मानक के अनुसार पालन हो रहा है अथवा नहीं। बड़ी लापरवाही तो यह है कि स्ट्रक्चर बनाने में इंजीनियर तक से एनओसी भी नहीं ली जाती है।
चौराहों और सड़क के डिवाइडरों के बीच यूनिपोल पर होर्डिंग लगाने के मानक तो हैं, पर उनका पालन किसी भी स्तर पर नहीं होता है। नगर निगम यह कहकर गुमराह कर रहा है कि उसकी विज्ञापन नियमावली में होर्डिंग-यूनिपोल लगाने के आकार, वजन, लंबाई और चौड़ाई का जिक्र तक नहीं है। जबकि इंडियन रोड कांग्रेस में बकायदा यूनिपोल की मजबूती के लिए मानक निर्धारित किए गए हैं। नगर निगम आंख मूद कर नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है। लोगों की जिंदगी दांव पर लगा रहा है। स्थिति ये है मानकों को ताक पर रख कर चौराहे, फुटपाथ और सड़क के डिवाइडरों पर पांच हजार से ज्यादा यूनिपोल-होर्डिंग टांग दिए गए हैं।

चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल के पास ही बड़े-बड़े यूनीपाल पर होर्डिंग लगे हैं। जिससे वाहन चलाने वालों का ध्यान भटकता है जबकि इनकी मनाही है। गढ़ रोड, दिल्ली रोड, मवाना रोड, हापुड़ रोड, यूनिवर्सिटी रोड, पीएसी रोड और हापुड़ अड्डा, तेजगढ़ी, जेलचुंगी, आयुक्त आवास, ईव्ज, बच्चा पार्क, रेलवे रोड, आबकारी चौराहा, बागपत, बेगमपुल, मेट्रो प्लाजा, कमिश्नरी चौराहे पर यूनिपोल-होर्डिंग का खतरनाक मकड़जाल मौजूद है।
निगम नहीं कराता है यूनिपोल-होर्डिंग्स की जांच
दो तरह से खतरनाक यूनिपोल चिह्नित होते हैं। हवा के भार और यूनीपोल व लोहे के स्ट्रक्चर के स्वयं के भार के हिसाब से यूनिपोल डिजाइन हुआ है या नहीं। इसकी जांच संरचना अभियंता या सिविल इंंजीनियर करता है, लेकिन नगर निगम यह चेक नहीं कराता है। दूसरा इंडियन रोड रूल के मानकों का पालन हुआ है या नहीं।
सिर्फ कागजों के लिए ही बनाये गये हैं मानक
- यूनिपोल पर लगे होर्डिंग की लंबाई, चौड़ाई का कोई मानक नगर निगम द्वारा बनाई गई विज्ञापन नियमावली में निर्धारित नहीं है। इसका फायदा उठाकर ठेकेदार मनमाने ढंग से सड़क की चौड़ाई के बराबर विशालकाय होर्डिंग टांग देते हैं।
- डिवाइडर पर लगे दो यूनिपोल के बीच कितनी दूरी होगी। यह भी निर्धारित नहीं है। कहीं 50 तो 30 मीटर की दूरी पर यूनिपोल खड़े हैं।
- यूनिपोल कितनी गहराई में लगाए जाएंगे और इनकी ऊंचाई कितनी होगी। यह भी निर्धारित नहीं है। ठेकेदार अपने हिसाब से लगा रहे हैं।
- सड़क क्रास करते होर्डिंग व यूनिपोल नहीं लगने चाहिए, लेकिन यहां चौराहों पर यह स्थिति देखी जा सकती है। इससे दुर्घटना की संभावना रहती है।
- चौराहे से 50 मीटर की दूरी तक यूनिपोल व होर्डिंग नहीं होने चाहिए लेकिन यहां आइटीएमएस के कैमरों व लाल-हरी बत्ती को ही यूनिपोल पर लगे होर्डिंग ढक रहे हैं।
- संरचना अभियंता से यूनिपोल की जांच की व्यवस्था भी निगम ने नहीं बनाई है। जिसके चलते ठेकेदार बिना किसी मानक के यूनिपोल लगा रहे हैं। जो आंधी बर्दाश्त करने में सक्षम नहीं हैं।

