Tuesday, February 24, 2026
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किताबों जैसा वफादार कोई दोस्त नहीं

  • ज्ञान को कहीं भी, किसी से भी और किसी भी परिस्थिति में कर सकते हैं अर्जित

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जो आपको किसी भी कठिनाई का हल दे सकता है वो है आपका ज्ञान। बड़े बुजुर्गों की कहावत है कि आपका धन चुराया जा सकता है पर ज्ञान ऐसी पूंजी है जिसको कोई चुराया नहीं सकता। कहते हैं कि किताब जैसा वफादार कोई दोस्त नहीं। ज्ञान को कहीं भी, किसी से भी और किसी भी परिस्थिति में अर्जित किया जा सकता है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री ने 16 किलोमीटर का सफर रोज तय करके विपरीत परिस्थितियों में भी शिक्षा का साथ नहीं छोड़ा और आगे जाकर उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई और भारत के प्रधानमंत्री पद पर आसीन हुए।

वीर सावरकर ने लैंप के नीचे बैठकर पढ़ाई पूरी की थी। समय ने पिछले 20 सालों में जो करवट ली उससे शिक्षा के क्षेत्र में भी बहुत विकास और बदलाव आया है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है पुस्तकालय। पुस्तकालय के बारे में जब हम सोचते हैं तो कल्पना में जो एक दृश्य उभरता है वह करीने से सजी किताबों से भरा एक कमरा है। मगर आज के दौर में पुस्तकालय की परिभाषा बिल्कुल बदल चुकी है। आज के हाईटेक पुस्तकालय में कंप्यूटर, वाई-फाई, किताबें, कैंटीन जैसी सुख सुविधाएं हैं।

जिसमें छात्र-छात्राएं बैठकर दिनभर पढ़ सकते हैं। कंपटीशन के इस युग में युवावर्ग में प्रतिस्पर्धा की भावना घर करती जा रही है। इस वजह से कंपटीशन के लिए तैयारी करने वाले छात्रों का ध्यान पिछले 6-7 सालों में पुस्तकालयों में जाकर अध्ययन करने पर केंद्रित हुआ है। ऐसा इसलिए क्योंकि अध्ययन के लिये एकांत की आवश्यकता होती है जो कि घर या कॉलेज के माहौल में मिल पाना असंभव है। इसके लिए आज युवा प्राइवेट लाइब्रेरी में जाकर अपने कॉम्पिटेटिव एग्जाम्स की तैयारी कर रहे हैं।

पारम्परिक लाइब्रेरी से हटकर है आधुनिक लाइब्रेरी

आधुनिक निजी लाइब्रेरी लाइब्रेरियन तथा सुख सुविधाओं से परिपूर्ण है। इसमें कंप्यूटर, वाई-फाई, वॉशरूम, कैंटीन, एक आरामदायक कुर्सी व मेज की सुविधा उपलब्ध है। यहाँ युवा एक शिफ्ट में 5 से 6 घंटे तक पढ़ाई कर सकते हैं। निजी लाइब्रेरी में पत्र-पत्रिकायें, अखबार व कॉम्पिटेटिव एग्जाम्स की किताबें भी उपलब्ध कराई जाती हैं । इसके साथ ही लड़कियों का ख्याल करते हुए उनके लिए अलग केबिन की व्यवस्था भी इन पुस्तकालयों में की गई है। संजीवनी लाइब्रेरी के मालिक नकुल पहलवान बताते हैं कि 2 साल पहले जब लाइब्रेरी बिक रही थी तो उन्होंने विद्यार्थियों को नुकसान से बचाने के लिए लाइब्रेरी ले ली थी और तब से वही लाइब्रेरी की देख-रेख कर रहे हैं। यहां पर युवाओं के लिये तीन शिफ्ट रखी गई हैं जो सुबह 8:00 बजे से शुरू होकर रात को 9:00 बजे खत्म होती हैं।

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