Saturday, March 14, 2026
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कौन लहराएगा परचम, फैसला आज

मेरठ में सांसद का ताज किसके सिर सजेगा? इसको लेकर डेढ़ महीने से इंतजार चल रहा हैं। चुनावी लड़ाई का अब परिणाम आने वाला है। इस चुनावी समर में कौन विजयी रहेगा और किसके हाथ पराजय लगेगी? बस कुछ घंटों की बात हैं। यह सब सार्वजनिक हो जाएगा। ये रात अंतिम हैं। अब बस एक रात की कहानी है। …यानी मंगल का सूर्योदय किसका चमकेगा? यह सुबह 11 बजे तक स्पष्ट हो जाएगा। भाजपा अपनी जीत बरकरार रखेगी या फिर विपक्ष। भाजपा से मेरठ की सीट छीन लेने में विपक्ष कामयाब होगा या फिर भाजपा अपना राजनीतिक गढ़ बचा पाएगी। जो जीत रहे हैं उनके लिए भी सोमवार की रात भारी बीतेगी और जिन्हें पराजय का अंदेशा है वह भी किसी चमत्कार की आस में है। सोमवार की सुबह जब ‘जनवाणी’ आपके हाथ में होगा, तब तक यह स्पष्ट हो चुका होगा कि दिल्ली में सरकार किसकी बन रही है और मेरठ का सांसद कौन बनेगा? एग्जिट पोल के नतीजों से भाजपा में जबरदस्त उत्साह है, लेकिन विपक्ष अभी भी हार मानने को तैयार नहीं है। एग्जिट पोल के अनुमानों से भाजपा गदगद है तो विपक्षी इसे भ्रामक प्रचार बता रहे हैं। पश्चिमी यूपी में भाजपा और रालोद ने गठबंधन के साथ चुनाव लड़ा हैं, इसलिए भी पश्चिमी यूपी पर लोगों की निगाहें लगी हुई हैं। बागपत, मुजफ्फरनगर, मेरठ, सहारनपुर, कैराना, बिजनौर, मुरादाबाद, संभल ऐसी लोकसभा सीटें है जहां पर कौन जीतेगा, इसको लेकर उत्सुकता बढ़ रही हैं।

  • मुख्य मुकाबला भाजपा के अरुण गोविल और सपा की सुनीता वर्मा के बीच
  • पिछले तीन बार से भाजपा लगा रही जीत की हैट्रिक, बड़ा सवाल क्या इस बार बदलेगा मिजाज

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: वोटिंग के करीब सवा महीने बाद आखिर वो दिन आ ही गया, जब तय होगा कि मेरठ के सांसद का ताज कौन पहनेगा? सुबह कृषि विवि में मतगणना शुरू होगी और दोपहर तक मेरठ को नया सांसद मिल जाएगा। हालांकि इस मुकाबले में भाजपा के अरुण गोविल और सपा की सुनीता वर्मा के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी। बसपा मुकाबले में तो नहीं, लेकिन हारजीत के लिए बड़ा कारण जरूर बन सकती है।

जिस तरह से मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर मतदान हुआ और जगह जगह पर कांटे की टक्कर देखने को मिली, उसके चलते कुछ भी कह पाना आसान नहीं है। भले भाजपाई और सपाई अपने अपने प्रत्याशियों की जीत के लिए आश्वस्त नजर आ रहे हों, लेकिन काउंटिंग के दौरान भी मुकाबला कड़ा ही रहेगा। इस सीट पर मौजूदा सांसद राजेंद्र अग्रवाल तीन बार के सांसद रहे और जनता के बीच उनकी छवि भी ठीक रही, लेकिन इस बार केंद्रीय नेतृत्व ने उनका टिकट बदलकर रामायण सीरियल में राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल को प्रत्याशी बना दिया। अरुण गोविल को लेकर शहर के लोग असहज हुए। दूसरी तरफ सपा ने अपने दो प्रत्याशियों को बदलते हुए तीसरी बार में पूर्व विधायक योगेश वर्मा की पत्नी एवं पूर्व महापौर सुनीता वर्मा को टिकट दे दिया। निश्चित रुप से सुनीता वर्मा ने काफी मजबूती से चुनाव लड़ा।

मतदान के समय जिस तरह के नजारे देखने को मिले, उससे मुकाबला काफी कड़ा बन गया। शुरू में यह माना गया कि भाजपा सीट को आसानी से निकाल लेगी, लेकिन सपा प्रत्याशी ने जिस तरह से चुनाव लड़ा और अच्छी खासी सेंधमारी की, उससे तस्वीर उलझ गयी। वैसे तो बसपा प्रत्याशी भी मैदान में रहे और उन्हें मिले वोट निश्चित रूप से नतीजों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। सपा और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला तथा पिछली बार की अपेक्षा कम मतदान प्रतिशत दुविधा की स्थिति बनाये हुए है। नेताओं की धड़कनें बढ़ी हुई हैं।

आंकड़ेबाजी चल रही है, विधानसभा वार कहां से कितने वोट मिल सकते हैं, कौन-सा क्षेत्र आगे ला सकता है, इस पर देर रात तक मंथन चलता रहा। हालांकि अब वो घड़ी आ गयी कि सब कुछ चंद घंटों में साफ हो जाएगा और तय हो जायेगा कि किसके सिर पर ताज सजेगा। मतगणना सुबह सात बजे से शुरू हो जायेगी और 9-10 बजे तक रुझान से काफी हद साफ हो जायेगा कि मेरठ का सांसद कौन होगा?

बिजनौर लोकसभा: त्रिकोणीय मुकाबले में किसके सिर सजेगा ताज?

मवाना: मोदी लहर रही हो या अखिलेश लहर। देश व राज्य में भले ही उन लहरों ने जो भी असर दिखाया हो, लेकिन बिजनौर लोकसभा क्षेत्र में अब तक इन दोनों में से कोई भी लहर नहीं चल पाई है। इस 2024 के लोकसभा चुनाव में भी यहां किसी एक पार्टी की कोई लहर नजर नहीं आयी है। इस बार इंडिया गठबंधन, रालोद और बसपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला नजर आ रहा है। हालांकि 2019 में बिजनौर सीट पर बसपा का कब्जा रहा तो 2014 में सीट पर भाजपा का कब्जा था।

वर्ष 2008 में परिसीमन के बाद अपने गठन से लेकर अब तक यानी 2009, 2014 और 2019 में सीट का इतिहास लगातार बदलता रहा है। 2009 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान 1287070 मतदाता मौजूद थे, बसपा पार्टी के उम्मीदवार शाहिद सिद्दीकी रहे थे, जिन्हें 216157 मतदाताओं का साथ मिल था। 2014 में भाजपा प्रत्याशी राजा भारतेंदू सिंह का निर्वाचन हुआ और उन्हें 486913 वोट मिले। वहीं, दूसरे नंबर पर सपा प्रत्याशी शहनवाज राणा को 205774 वोटों से हराया। 2019 में बसपा के मलूक नागर ने 561045 वोट हासिल कर चुनाव जीत लिया था। भाजपा के राजा भारतेंदू सिंह 491104 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे। कांग्रेस के नसीमुद्दीन सिद्दीकी 25833 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे।

क्या पिता की विरासत बचा पाएंगे?

राजनीति हर किसी के वश की बात नहीं है, अच्छे अच्छों के पसीने छूट जाते हैं। उदाहरण जिनके पिता राजनीति के धुरंधर माने जाते थे, वे पिता की विरासत को नहीं संभाल पाये। ऐसे एक दो नहीं, बल्कि आधा दर्जन से अधिक उदाहरण हैं। कई बार संसद पहुंचे, विधानसभा चुनाव में भी परचम फहराया, लेकिन ऐसे नेताओं की संताने राजनीति से दूर हो गईं। बिजनौर लोकसभा की बात करें तो सपा और रालोद प्रत्याशियों के सामने यह सवाल खड़े हैं। रालोद प्रत्याशी चंदन चौहान बिजनौर सीट से सांसद रह चुके पिता के संसद के क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, सपा प्रत्याशी दीपक सैनी के पिता बिजनौर लोकसभा की नगीना विधानसभा से वर्तमान विधायक है। ऐसे में दोनों प्रत्याशियों के सामने पिता की विरासत संभालना टेढ़ी नजर आ रहा है। वहीं, बसपा प्रत्याशी चौधरी विजेंद्र सिंह के लिए राजनीति का अखाड़ा एकदम नया है।

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