Monday, April 13, 2026
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रैन बसेरों का हाल: रजाई-गद्दों में उठ रही बदबू, दो वर्ष से नहीं हुई धुलाई

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रैन बसेरों को लेकर एक सप्ताह पहले ही आला अफसरों को दिशा-निर्देश दिये थे, मगर अफसर रैन बसेरों को लेकर सुधरने को तैयार नहीं है। रैन बसेरे तैयार है, मगर किस तरह से यह देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे। गरीबों के लिए जो रजाई उपलब्ध कराई गयी है, वो दो वर्ष पुरानी है।

रजाई के कवर तक की धुलाई नहीं कराई गई। बेड सीट भी दो वर्ष से नहीं धुली, उनमें सडांध उठ रही है। केयर टेकर भी कह रहे हैं कि धुलाई नहीं हुई। ऐसी हालत में गरीबों को रजाई व बेड सीट उपलब्ध कराई जा रही है। ये साफ सफाई रैन बसेरों की हो रही है।

रैन बसेरों की सच्चाई जानने के लिए जनवारी की टीम बच्चा पार्क स्थित रैन बसेरे पर पहुंची, जहां पर कुछ वृद्ध भी मौजूद थे। बातचीत की तो एक बुजुर्ग ने रजाई उठाकर सूंघने की बात कहीं तथा बोले कि ऐसी व्यवस्था है रैन बसेरों में। मुख्यमंत्री गरीबों का भला चाहते हैं, किसी को भी ठंड से मरने नहीं देना चाहते, लेकिन यहां तो आला अफसरों की चलती है।

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फटी रजाई और बिना कवर वाली रजाई से बदबू आ रही है। तख्त पर जो बेड सीट बिछाई गई है,उनकी भी धुनाई लंबे समय से नहीं कराई। उनमें भी बदबू आ रही थी। जगह-जगह से गंदगी लगी हुई थी। इस तरह से रैन बसेरों की व्यवस्था बेहतर करने के दावे आला अफसर कर रहे हैं।

नगर निगम के इन तमाम रैन बसेरों की हालत कुछ एक जैसी ही है। शहर के अन्य रैन बसेरे में कहीं तख्त क्षतिग्रस्त है। पास में ही तख्त पड़े हुए हैं। इनकी कोई मरम्मत कराने को तैयार नहीं है। कुछ इस तरह से रैन बसेरों की व्यवस्था बेपटरी है।

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ये हालत तो तब है जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही रैन बसेरों की व्यवस्था सुधारने के लिए निर्देष दे चुके हैं। फिर मुख्यमंत्री 15 दिसंबर को मेरठ भी आ रहे हैं, इसके बाद भी निगम अफसरों को कोई डर नहीं है। मुख्यमंत्री कितने भी प्रयास क्यों नहीं करें, मगर अफसरों ने तो नहीं सुधरने की लगता है कसम खा ली है।

नगरायुक्त अकेले नगर निगम को सुधारने में जुटे हैं, लेकिन उनके अधीनस्थ अफसरों पर असर नहीं पड़ रहा है। आखिर नगरायुक्त ही कहां-कहां तक पूरे सिस्टम पर नजर रखेंगे, बाकी निगम में तो अफसरों की लंबी-चौड़ी फौज है, मगर कोई भी सुधार ही दिशा में काम क्यों नहीं कर रहा है, ये बड़ा सवाल है।

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