Wednesday, March 4, 2026
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वोटों का विश्व रिकॉर्ड बना, पर महिला सांसदों की हिस्सेदारी घटी

  • इस चुनाव में 74 महिलाएं ही संसद में पहुंचने में हो सकीं सफल, सबसे ज्यादा भाजपा तो दूसरे नंबर पर रही ममता की टीएमसी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: भले संसद में बिल पास कर एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व रखने की कवायद की गयी हो पर किसी भी पार्टी ने बिल का सम्मान नहीं किया। महिलाओं को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा जरूर मगर अपने हिसाब से। भाजपा जरूर मामले में आगे रही। तृणमूल कांगे्रस ने भी काफी दिलदारी दिखायी। बाकी किसी पार्टी ने आधी आबादी के लिए ज्यादा कुछ करना गंवारा नहीं किया। यही कारण है कि पिछली बार के मुकाबले इस चुनाव में संसद पहुंचने वाली महिलाओं की संख्या घट गई। पर एक सुखद बात यह जरूर रही कि महिलाओं ने रिकार्ड वोटिंग कर विश्व रिकॉर्ड बनाया।

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए ही लोकसभा में 2023 में महिला रिजर्वेशन का बिल पास किया गया। तय हुआ कि एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व रखी जाएंगी। यानी करीब 180 सीटें महिलाओं के लिए रहेंगी। इसके लिये पार्टियों की भूमिका बढ़ गई। इस बार चुनाव में 797 महिलाएं किस्मत आजमाने के लिए मैदान में उतरीं, लेकिन मात्र 74 महिलाओं की ही किस्मत का दरवाजा खुला और वे संसद तक पहुंचने में सफल हुर्इं। पिछली बार से यह संख्या चार कम है। जहां तक पार्टियों की बात है तो भाजपा ने 2024 के चुनाव में 69 महिलाओं की टिकट दिये और इनमें 30 को ही जीत नसीब हो सकी। जीत का प्रतिशत 43.4 रहा। कांगे्रस ने 41 महिलाओं को टिकट दिये पर सिर्फ 14 ही जीत पायीं।

टीएमसी ने 12 महिलाओं को टिकट दिये और 11 ने जीत दर्ज की। समाजवादी पार्टी ने चार महिलाओं को मैदान में उतारा, तीन संसद तक पहुंचने में सफल हो गयीं। द्रमुक की तीन, लोजपा, जदयू की दो-दो महिलाएं सांसद चुनी गयीं। वैसे आधी आबादी के लिए सबसे ज्यादा दरियादिली पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने दिखायी और अधिकतर कसौटी पर खरी उतरीं। उन्होंने चुनाव आयोग के निर्देशों को पूरी तरह से मेनटेन रखा। इस तरह एक ही राज्य से 11 महिलाएं सांसद चुनी गयीं।

पिछले चुनाव में भी उनके राज्य से नौ महिलाएं संसद पहुंची थीं। ऐसा किसी दूसरे राज्य में नहीं हुआ। दूसरे प्रदेशों में आधी आबादी की स्थिति देखें तो महराष्ट्र से पांच, उत्तर प्रदेश से चार, गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान से तीन-तीन, बिहार, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, ओडिसा व दिल्ली से दो-दो, असम, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना से एक-एक महिला संसद के लिए चुनी गयीं।

पिछली बार संसद पहुंची थीं 78 महिलाएं

वर्ष 2019 में 78 महिलाएं संसद तक पहुंचने में सफल रही थीं। जबकि इससे पहले 2014 में 62, 2009 में 58 व 2004 में 45 महिलाएं सांसद बनीं। इससे पता चलता है कि राजनीतिक दल महिलाओं को टिकट देने के मामले में अभी भी अपनी परम्परागत सोच से नहीं उबर पा रहे। पश्चिम बंगाल इस मामले में अलग ही उदाहरण है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में महिला सांसदों की हिस्सेदारी घटी है। यूपी में तो आधी आबादी की भागेदारी वर्ष 2014 के चुनाव से लगातार घट रही है।

हैरान करने वाली बात तो यह है कि सदन में 33 फीसदी आरक्षण का बिल पास होने के बाद यह पहला लोकसभा चुनाव था। चौंकाने वाली बात यह है कि बिल पारित कराने वाले एनडीए की उत्तर प्रदेश से सिर्फ हेमामालिनी ही जीत दर्ज कर पायीं। वोटों का विश्व रिकॉर्ड बनाया इस बार यानी 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए 96.8 करोड़ मतदाता रहे। इनमें 47.1 करोड़ महिला मतदाता थीं। हैरानी की बात यह है कि अबकी बार 30.77 करोड़ महिलाओं ने चुनाव में वोट डालकर विश्व रिकॉर्ड बनाया। पहली बार हुआ, जब इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं ने वोटिंग की।

उत्तर प्रदेश से सिर्फ पांच महिलाएं सांसद बनीं

उत्तर प्रदेश से सिर्फ पांच महिलाएं ही जीत दर्ज करा सकीं। मैनपुरी से सपा मुखिया अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव,
कैराना से सपा प्रत्याशी इकरा हसन, मुरादाबाद से सपा की रुचिवीरा, मछली शहर से सपा की प्रिया सरोज और बांदा से
कृष्णा पटेल जीत दर्ज करा सकीं।

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