Saturday, May 2, 2026
- Advertisement -

एक-दूसरे को निपटाने में निपट गए जाट नेता

 

SAMVAD


KP MALIKउत्तर प्रदेश में भाजपा के जाट नेताओं ने अति महत्वाकांक्षा के चलते एक दूसरे को ही निपटाने की योजना बनाई और इसी के चलते वो निपट गए। रालोद सपा गठबंधन होने के बाद बागपत वाले सांसद सत्यपाल सिंह खुश थे कि इस बार मुजफ्फरनगर से सांसद और केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान इस गठबंधन के सामने नहीं टिक पाएंगे और अगर वो हारे, तो मेरी पौबारह तय है। इसी प्रकार से दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने सोचा कि एक तरफ रालोद और सपा का गठबंधन मेरी जीत के लिए खतरा सिद्ध हो सकता है और मेरे हारते ही बागपत वाले सत्यपाल सिंह केंद्र मंत्री बन जाएंगे। यह सोचकर संजीव बालियान ने जाट नेता और भाजपा के उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष भूपेंद्र चौथरी के साथ मिलकर रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी को भाजपा गठबंधन यानि एनडीए में लाने की योजना बनाई गई। और कई दिनों की कोशिश के बाद आखिरकार ये योजना सफल भी रही। इसी के तहत बागपत की लोकसभा सीट रालोद के खाते में चली गई और केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने अपने प्रतिद्वंदी सत्यपाल सिंह को बड़ी आसानी से निपटा दिया। रालोद ने भी इस लोकसभा चुनाव में अपनी दोनों लोकसभा सीटें बागपत और बिजनौर तो जैसे-तैसे जीत लीं, लेकिन केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान की भाजपा की पिछली दो बार से जीती हुई मुजफ्फरनगर सीट गंवाकर झटका दे दिया। संजीव बालियान को निपटाने वाले सपा के टिकट पर लड़े जाट नेता हरेंद्र मलिक रहे, जीतने के बाद उन्होंने कहा कि मैं चौधरी अजीत सिंह की हार का बदला और हाथरस में जैन चौधरी पर लाठी चार्ज का बदला ले लिया है। लेकिन रालोद के लिए संजीव बालियान का उन्हीं की सीट पर निपटना चौधरी अजीत सिंह की हार का बदला लेने जैसा जरूर लगा होगा और रालोद प्रमुख भी कहीं न कहीं थोड़े-बहुत संतुष्ट तो जरूर हुए होंगे। लेकिन इधर प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी भी ये सोचकर खुश थे कि अच्छा है कि दोनों निपट गए। परंतु अब उनकी मुश्किल ये है कि उत्तर प्रदेश में खराब चुनाव परिणाम आने के कारण उनकी कुर्सी पर भी खतरा मंडरा रहा है।

अब ये सारे भाजपा के जाट नेता जयंत के सिर पर हार का ठीकरा फोड़कर उन्हें भाजपा गठबंधन से बाहर करवाने की जुगत में हैं। वह चाहते हैं कि अगर जयंत चौधरी यानि रालोद का भाजपा से गठबंधन न भी टूटे, और जयंत चौधरी एनडीए से बाहर न भी हों, तो मंत्री तो बिल्कुल भी न बन पाएं। विश्वसनीय सूत्रों की मानें, तो इसके लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। हालांकि आज जयंत चौधरी भी इस स्थिति में नहीं हैं कि मंत्री पद की जिद कर सकें, लेकिन उनकी छोटी-मोटी मांगें इस समय मानी जा सकती हैं, क्योंकि वो पश्चिमी उत्तर प्रदेश से अकेले जाट नेता हैं, जो एनडीए में जाट समाज का दो लोकसभा सीटों पर प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। लेकिन सवाल ये है कि भाजपा खुद अपाहिज है और अगर अब वो जयंत चौधरी को अपने से दूर करती है, तो उसकी बैठे-बिठाए दो सीटें कम हो जाएंगी। पहले ही बैसाखियों के सहारे जैसे-तैसे नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने की तैयारी कर रहे हैं, इसलिए वो और उनके खासमखास इस समय किसी भी प्रकार की फूट एनडीए में पड़ने नहीं देना चाहेंगे, क्योंकि अगर इस समय एनडीए से एक भी पार्टी छिटकी, तो देश के इस सबसे बड़े गठबंधन एनडीए में शामिल दूसरी पार्टियां चौकन्नी हो जाएंगी और हो सकता है कि वो भी फिर इस गठबंधन के मैदान से कूदने की कोशिश करें।

हालांकि अगर हम जयंत चौधरी की बात करें, तो वो भी एनडीए गठबंधन से भागेंगे नहीं, क्योंकि उन्हें भी पता है कि इंडिया गठबंधन के दरवाजे फिलहाल उनके लिए बंद हैं। हालांकि ये दरवाजे इस समय उसी तरह बंद हो सकते हैं, जिस तरह से दरवाजे बंद तो हों, लेकिन कोई एक दरवाजा बिना कुंडी लगे ही बंद हो, जिसे हाथ से थोड़ा सा धक्का देने पर वो खुल जाए। हालांकि जयंत को यह डर भी है, और मुझे लगता है कि यह डर हमेशा रहेगा कि यदि बाद में इंडिया गठबंधन ने जोड़ तोड़कर सरकार बना ली, तो वह घर के रहेंगे न घाट के।

खैर इन सभी जाट नेताओं के आपसी टकराव और सियासी गुणा भाग के बीच उत्तर प्रदेश में जाट नेतृत्व एक तरह से खत्म हो गया और ऐसा लगता है कि अब चौधरी चरण सिंह और चौधरी अजित सिंह जैसा नेतृत्व कम से कम इन नेताओं से तो मिलने की उम्मीद नहीं है। हां, जाटों को नए नेतृत्व की दरकार है और अगर कोई जाट नेता इस प्रकार का आ गया, जो पहले के जाट नेताओं की तरह पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की आवाज उठा सके, खास तौर पर किसानों, मजदूरों की आवाज उठा सके और उनकी समस्याएं हल करवा सके। लेकिन जाट नेताओं की इस फूट का मुझे बहुत दुख हुआ, और ये दुख इसलिए हुआ, क्योंकि इन जाट नेताओं ने अपने-अपने क्षेत्र में कुछ खास काम तो किया नहीं, लेकिन एक दूसरे को निपटाने में हमेशा लगे रहे और आज स्थिति ये है कि जाट वोटर आपस में इस कदर बंट गया है कि न सिर्फ इस समाज की एकजुटता और ताकत खत्म होती जा रही है, बल्कि किसी एक जाट नेता की ये हिम्मत नहीं है कि वो समूचे जाट समाज को एक बैनर के नीचे लाकर उनका समर्थन प्राप्त कर सके। और इसका परिणाम ये हुआ है कि आज कोई भी जाट नेता अपनी सही ताकत का इस्तेमाल नहीं कर सकता यानि सरकार की किसान विरोधी और जाट विरोधी नीतियों के खिलाफ खड़ा नहीं हो सकता। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि किसके पत्ते काम आते हैं और किसके पिटते हैं।


janwani address 9

spot_imgspot_img
[tds_leads title_text="Subscribe" input_placeholder="Email address" btn_horiz_align="content-horiz-center" pp_checkbox="yes" pp_msg="SSd2ZSUyMHJlYWQlMjBhbmQlMjBhY2NlcHQlMjB0aGUlMjAlM0NhJTIwaHJlZiUzRCUyMiUyMyUyMiUzRVByaXZhY3klMjBQb2xpY3klM0MlMkZhJTNFLg==" f_title_font_family="467" f_title_font_size="eyJhbGwiOiIyNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMjAiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIyMiIsInBob25lIjoiMzAifQ==" f_title_font_line_height="1" f_title_font_weight="700" msg_composer="success" display="column" gap="10" input_padd="eyJhbGwiOiIxNXB4IDEwcHgiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMnB4IDhweCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCA2cHgifQ==" input_border="1" btn_text="I want in" btn_icon_size="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxNyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTUifQ==" btn_icon_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjMifQ==" btn_radius="3" input_radius="3" f_msg_font_family="394" f_msg_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_msg_font_weight="500" f_msg_font_line_height="1.4" f_input_font_family="394" f_input_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_input_font_line_height="1.2" f_btn_font_family="394" f_input_font_weight="500" f_btn_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjExIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMCJ9" f_btn_font_line_height="1.2" f_btn_font_weight="700" f_pp_font_family="394" f_pp_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjEyIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMSJ9" f_pp_font_line_height="1.2" pp_check_color="#000000" pp_check_color_a="var(--metro-blue)" pp_check_color_a_h="var(--metro-blue-acc)" f_btn_font_transform="uppercase" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjYwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGUiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjUwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGVfbWF4X3dpZHRoIjoxMTQwLCJsYW5kc2NhcGVfbWluX3dpZHRoIjoxMDE5LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiNDAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsInBob25lIjp7ImRpc3BsYXkiOiIifSwicGhvbmVfbWF4X3dpZHRoIjo3Njd9" msg_succ_radius="2" btn_bg="var(--metro-blue)" btn_bg_h="var(--metro-blue-acc)" title_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjEyIiwibGFuZHNjYXBlIjoiMTQiLCJhbGwiOiIxOCJ9" msg_space="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIwIDAgMTJweCJ9" btn_padd="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCJ9" msg_padd="eyJwb3J0cmFpdCI6IjZweCAxMHB4In0=" f_pp_font_weight="500"]

Related articles

बच्चों में जिम्मेदारी और उनकी दिनचर्या

डॉ विजय गर्ग विकर्षणों और अवसरों से भरी तेजी से...

झूठ का दोहराव सच का आगाज

जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर सारा बारबर द्वारा किए...

लोकतंत्र का आईना या मीडिया का मुखौटा

जब आंकड़ों की चकाचौंध सच का मुखौटा पहनने लगे,...

वेतन के लिए ही नहीं लड़ता मजदूर

मजदूर दिवस पर श्रमिक आंदोलनों की चर्चा अक्सर फैक्टरी...
spot_imgspot_img