- मेरठ में 40 ब्लड बैंक कर रहे मरीजों को खून की आपूर्ति
- जिला अस्पताल के ब्लड बैंक का बोझ हुआ कम
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: रक्तदान कर दो भाई, ना बाबा ना, मेरे में खून की कमी है, मैं बीमार हूं। इस तरह की बाते अब रक्तदान कैंप में या इमरजेंसी में खून की कमी पड़ने पर लोगों ने आग्रह करने पर सुनने को नहीं मिलती। यह कमाल सोशल मीडिया ने कर दिखाया है। सोशल मीडिया रक्तदान करने का जज्बा बढ़ा रहा है। अब मरीज को खून देने के लिए पहली जैसी हाय तौबा नहीं रहती। खून की आवश्यकता का एक मैसेज सोशल मीडिया पर जारी होने पर अनेक रक्तदाता रक्तदान के लिए सामने आ जाते हैं। मेरठ में लगभग 40 ब्लड बैंक से मरीजों को खून की आपूर्ति हो रही है, इन ब्लड बैंकों से जिला अस्पताल का बोझ भी कम हुआ है।
पहले मरीज को खून की आवश्यकता होने पर तीमारदार जिला अस्पताल के चक्कर काटते थे। वहां से जब लोगों को रक्तदाता को लाने के लिए कहा जाता था, तो लोग रक्तदान करने से बचते थे। लोग रक्तदान से बचने के लिए तरह तरह के बहाने बनाते थे। समय बदला 2005 में रक्तदान से मिलने वाले खून के चार पैक बनाने की तकनीक आई। इससे खून के एक पैक से रेड ब्लड सेल्स, प्लाज्मा, प्लेटलेट और करोथेपिसिमिथेल के अलग-अलग पैक बना दिए गए। जिस मरीज को जिस तरह के ब्लड की जरूरत है, उसे उस तरह की ही पैक दे दिया जाता है। इसने मरीजों को खून उपलब्ध कराने में काफी राहत दी।
हालांकि कोरोना के दौर से लेकर करीब तीन वर्ष तक रक्तदान करने में कमी आई। इसकी एक वजह कोरोना काल में रक्तदान शिविरों का आयोजन न होना रहा। हालांकि अब एक बार फिर लोगों में रक्तदान को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। इसका प्रमुख कारण सोशल मीडिया को माना जा रहा है। रक्तदान के क्षेत्र में संत निरंकारी मिशन, डेरा सच्चा सौदा आदि अनेक संस्थाओं का अहम् योगदान है। पहले यह कार्य रेडक्रॉस सोसाइटी के कांधे पर थी। उक्त सोसाइटी अब भी रक्तदान शिविर आयोजित करती है और लोगों को जागरूक करती है।
रेडक्रॉस सोसाइटी ने 60 रक्तदान शिविर लगाए: सरबजीत
रेडक्रॉस सोसाइटी के उप संरक्षक सरबजीत कपूर का कहना है कि मरीजों के लिए खून की मांग को लेकर पहली जैसी हाय तौबा खत्म हो गई। रक्तदान के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ी है। रेडकॉस सोसाइटी ने गत वर्ष 60 रक्तदान शिविर लगाए, जिनमें करीब तीन हजार लोगों ने रक्तदान किया।
सोशल मीडिया से मिल रही मदद: डा. कौशलेंद्र
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक के प्रभारी डा. कौशलेंद्र का कहना है कि रक्तदान को लेकर सोशल मीडिया लोगों को जागरूक कर रहा है। एक मैसेज वायरल करने पर अनेक रक्तदाता रक्तदान के लिए आगे आ जाते हैं। इसलिए ब्लड बैंकों में खून की उपलब्धता में कोई दिक्कत नहीं आती। जिला अस्पताल में मांग के अनुसार खून उपलब्ध हो जाता है। वर्ष 2023-24 में करीब सात हजार यूनिट लोगों ने रक्तदान किया और लगभग इतनी की मांग रही।
मेरठ के प्रमुख ब्लड बैंक
- जिला अस्पताल का ब्लड बैंक।
- एलएलआरएम मेडिकल कालेज का ब्लड बैंक।
- एनसीआर मेडिकल कालेज, खरखौदा का ब्लड बैंक।
- आईएमए, निकट बच्चा पार्क का ब्लड बैंक।
- आर्मी हॉस्पिटल का ब्लड बैंक।
- आनंद हॉस्पिटल, गढ़ रोड का ब्लड बैंक।
- न्यूटिमा हॉस्पिटल, गढ़ रोड का ब्लड बैंक।
- केएमसी हॉस्पिटल, बागपत रोड का ब्लड बैंक।
- सुशीला जसवंत राय हॉस्पिटल, सिविल लाइन का ब्लड बैंक।

