- जिला अस्पताल ही सहारा, हत्या के मामले में जरूरी है शव का एक्स-रे होना
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: गोली मारकर हत्या होने जैसे मामले में पोस्टमार्टम के साथ एक्स-रे होना बेहद जरूरी होता है, लेकिन विडंबना ये कि पोस्टमार्टम हाउस में एक्स-रे की सुविधा ही नहीं है। ऐसे में पुलिसकर्मी शव को एक्स-रे के लिए जिला अस्पताल लेकर जाते है। जहां बॉडी का एक्स-रे होने के बाद शव के किस हिस्से में गोली मौजूद है इसका पता लगाया जाता है। एक्स-रे के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने में भी मदद मिलती है। हत्या के ऐसे केस जिनमें किसी को भी गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया जाता है।
उनमें शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने से पहले शव का एक्स-रे कराना जरूरी है, लेकिन मेरठ समेत यूपी के किसी भी जिले में पोस्टमार्टम हाउस पर एक्स-रे मशीन नहीं है। एक्स-रे की रिपोर्ट से यह पता चल जाता है कि शरीर के किस हिस्से में गोली मौजूद है और गोली ने शरीर के किस हिस्से को कितना नुकसान पहुंचाया है, जिससे मौत हुई। इससे पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टर को भी सुविधा होती है और वह आसानी से शव से गोली बरामद कर लेते हैं, लेकिन पोस्टमार्टम हाउस पर एक्स-रे की सुविधा नहीं होने से पुलिस कर्मी पहले शव को मोर्चरी से जिला अस्पताल लेकर जाते हैं। वहां पर शव का एक्स-रे कराया जाता है।
इसके बाद उसे वापस मोर्चरी लाया जाता है। जहां पोस्टमार्टम होता है। इस पूरी प्रक्रिया में कई घंटे का समय लग जाता है। वहीं, यदि शव पहले से ही कुछ दिन पुराना हो तो ऐसे हालातों में शव से दुर्गंध आने लगती है और वह सड़ने लगता है तो स्थिति और भी खराब होने लगती है, लेकिन शव को उसी हाल में एक्स-रे के लिए जिला अस्पताल लाना पड़ता है। जिससे उसे लाने और ले जाने वाले पुलिस कर्मियों को भी परेशानी होती है। जिला अस्पताल के सुप्रिटेंडेट डा. कौशलेंद्र का कहना है कि उनके यहां एक्स-रे की दो मशीने हैं, इनमें से एक पुरानी मशीन है। जिससे केवल मोर्चरी से आने वाले शव का ही एक्स-रे किया जाता है।

