Tuesday, March 17, 2026
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कांवड़ यात्रा से कारोबार को 500 करोड़ का फटका

  • सबसे ज्यादा प्रभावित होने वालों में होटल, ट्रांसपोर्ट हैंडलूम छोटे, मझोले उद्योग

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कांवड़ यात्रा के चलते लगाई गर्इं बंदिशों से मेरठ के कारोबार जगत को 500 करोड़ से ज्यादा का फटका लगा है। ऐसा हर साल होता है। इस साल 22 जुलाई से शुरू हुई कांवड़ यात्रा दो अगस्त शिवरात्रि तक चलेगी। इस दौरान करीब आए दिन ऐसे हैं दिन ऐसे हैं जिनसे कारोबारी गतिविधियां पूरी तरह से ठप हो गयी हैं। इन आठ दिनों में ही रास्ते बंद होने समेत तमाम दूसरे कारणों की वजह से 500 करोड़ से ज्यादा का फटका अलग-अलग इंडस्ट्रीज को लगा है। वैसे यदि प्रभावित होने वाले उद्योगों की बात करें तो इनमें प्रमुख रूप से छोटे व मझोले उद्योग जिनमें परतापुर, बागपत रोड विश्वकर्मा इंडस्ट्रीय एरिया, होटल कारोबार, हैंडलूम कारोबार, ट्रांसपोर्ट, स्पोर्ट्स, कैंची सरीखे प्रमुख शामिल हैं।

इनके प्रभावित होने की बड़ी वजह रास्तों का बंद हो जाना, माल की डिलीवरी थम जाना, इकाइयों को बाहर के आर्डर का मिलना बंद हो जाना और सबसे बड़ी वजह से वो यह कि तमाम इकाइयों में जो स्टॉफ काम करता है, उनमें से ज्यादा का कांवड़ लेने के लिए चले जाना और कांवड़ लाने के नाम पर 15 दिन का अवकाश ले लेना। अवकाश ना भी दिया जाए तो भी वो कांवड़ लेने के लिए जात हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान कारोबार के थम जाने के चलते होने वाले नुकसान को लेकर जनवाणी संवाददाता ने शहर के कुछ प्रमुख कारोबारियों से बात की। उन्होंने विस्तार से बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान कैसे हर साल इंडस्ट्रीज को नुकसान उठाना पड़ता है।

एमएसएमई सबसे ज्यादा प्रभावित

आईआईए (इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन) के नेशनल सेक्रेटरी अनुराग अग्रवाल ने बताया कि कांवड़ यात्रा के चलते करीब एक पखवाडेÞ तक इंडस्ट्रीज की चाल थम जाती है। इससे 150 से 200 करोड़ का नुकसान मेरठ के तमाम छोटे बड़े कारोबारियों को उठाना पड़ता है। रास्ते बंद होने की वजह से माल की डिलीवरी नहीं हो पाती। इंडस्ट्रीज चलाने के लिए कच्चे माल की सप्लाई बंद हो जाती है। बाहर से आने वाले आर्डर बंद हो जाते हैं। और सबसे बड़ी समस्या स्टॉफ का बड़ा हिस्सा कांवड़ लेने निकल जाता है।

होटल कारोबार पर डबल मार

मेरठ होटेलियर्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के महामंत्री विपुल सिंहल का दावा है कि कांवड़ यात्रा की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित होटल इंडस्ट्रीज होती है। रास्ते बंद होने के चलते लोग आ जा नहीं सकते। विपुल सिंहल ने बताया कि तमाम आयोजन इस दौरान बंद हो जाते हैं। आमतौर पर जो होटल इंडिस्ट्रीज हर वक्त गुलजार रहती है, कांवड़ के काल में वहां सन्नाटा पसर जाता है। कांवड़ यात्रा की इस इंडस्ट्रीज पर डबल मार पड़ती है आमदनी तो बंद हो जाती है। लेकिन खर्चे फिक्स होते हैं उनमें कोई कमी नहीं होती।

ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्रीज को फटका

ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष गौरव शर्मा का दावा है कि कांवड़ से इस साल सबसे ज्यादा नुकसान ही ट्रांसपोर्टर उठा रह हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व के सालों में पांच दिन के लिए रास्ते ब्लॉक किए जाते थे, लेकिन इस सुरक्षा इंतजामों के नाम पर काफी पहले रास्ते बंद कर दिए गए हैं। इन दिनों को ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्रीज के लिए सीजन माना जाता है। उन्होंने बताया कि प्रशासन से आग्रह किया गया था कि कुछ ऐसा इंतजाम किया जाए कि कांवड़ भी चले और ट्रक के पहिए भी ऐसा हो नहीं सका। भारी नुकसान इस बार है।

हैंडलूम इंडस्ट्रीज ठप

हैंडलूम वस्त्र व्यापारी संघ के प्रधान अंकुर गोयल ने बताया कि हैंडलूम इंडस्ट्रीज मेरठ की परंपरागत व पुरानी इंस्ट्रीज है। देश ही नहीं बल्कि यहां से विदेशों तक में हैंडलूम वस्त्रों की सप्लाई की जाती है, लेकिन कांवड़ यात्रा के चलते रास्ते बंद होने की वजह से माल की सप्लाई रुक जाती है। बाहर से जो ग्राहक आने होते हैं वह नहीं आ पाते। कांवड़ का साइड इफेक्ट हैंडलूम कपडेÞ के प्रोडक्शन पर भी पड़ता है। कच्चा माल मिल नहीं पता। माल तैयार नहीं होता। जो तैयार माल है रास्ते बंद होने से उसकी सप्लाई रूक जाती है।

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