Monday, June 8, 2026
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आज किसानों की होगी बड़ी पंचायत, खुफिया एजेंसियां सतर्क

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: यूपी गेट पर बृहस्पतिवार को करीब दस खाप पंचायतों के किसान जुटेंगे। भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत के नेतृत्व में भारी संख्या में किसान यूपी गेट के लिए कूच करेंगे। दोपहर बाद यूपी गेट पर बड़ी पंचायत कर आंदोलन को मजबूत करने के लिए रणनीति तैयार होगी।

इसके साथ ही 18 को किसान एक बार फिर भूख हड़ताल कर अपनी मांगों को सरकार के सामने रखेंगे। वहीं, 20 दिसंबर को शहीद किसानों के सम्मान में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाएगा।

कृषि कानून के विरोध में पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा के किसान बीस दिन से यूपी गेट पर जुटे हुए हैं। 14 दिसंबर को मुजफ्फरनगर के सोरम गांव में खाप पंचायतों ने कृषि कानून के खिलाफ किसान आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए 17 दिसंबर को यूपी गेट कूच करने का एलान किया था।

भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत बालियान खाप का नेतृत्व करेंगे। इसी तरह राठी, तोमर, अहलावत, लाठियान आदि खाप पंचायतों के मुखिया भी अपने अपने किसानों के साथ सुबह सुबह यूपी गेट के लिए रवाना होंगे। माना जा रहा है कि 80 से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और गाड़ियों में किसान यूपी गेट पर पहुंचेंगे।

इस दौरान यूपी गेट पर सात से आठ हजार से अधिक किसानों की जुटने की उम्मीद की जा रही है। खाप पंचायत को लेकर यूपी गेट पर जुटे किसानों में भी काफी उत्साह बना हुआ है। बुधवार को भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि रोजाना भारी संख्या में किसान यूपी गेट आ रहे हैं। खाप पंचायत के हजारों किसान बृहस्पतिवार को यहां पर पहुंचेंगे। जिसके बाद यहां पंचायत होगी और आगे की रणनीति किसान तैयार करेंगे।

किसानों का आरोप पुलिस ने किसानों को रोकना किया शुरू

बृहस्पतिवार को होने वाली पंचायत में हिस्सा लेने के लिए किसान गांवों से निकल चुके हैं। शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गढ़, मुरादाबाद, कासगंज आदि जगहों से किसान निकले हैं। किसानों का आरोप है कि मंगलवार रात तक पुलिस किसानों को नहीं रोक रही थी। बुधवार सुबह से पुलिस जगह जगह किसानों को रोक रही है।

डासना, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस, गढ़ आदि के पास किसानों को रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों से कहा गया है जहां पर भी पुलिस रोके वह वहीं पर बैठकर धरना प्रदर्शन करने लगो। उनका कहना है कि सरकार नहीं चाहती कि किसानों की पंचायत सफल हो। इसलिए किसानों को रोका जा रहा है।

खुफिया एजेंसी भी पंचायत को लेकर सतर्क

खाप पंचायतों को लेकर पुलिस और खुफिया एजेंसियां भी सतर्क हो गईं है। सादी वर्दी में खुफिया एजेंसी के अधिकारी किसानों के बीच है जो पंचायत को लेकर पल पल की जानकारी जुटा रहे हैं। खुफिया एजेंसी के अधिकारियों के मुताबिक अभी डेढ़ से दो हजार किसान यूपी गेट पर जुटे हैं। बृहस्पतिवार को कितने किसान जुट सकते हैं, इसकी भी जानकारी अधिकारी जुटा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट बीच में आया है तो अब कुछ न कुछ होना चाहिए: राकेश टिकैत

भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट किसानों और सरकार के बीच में आया है तो अब कुछ न कुछ होना चाहिए। कोर्ट से बड़ा कोई नहीं है। देश में संविधान है, सुप्रीम कोर्ट है, धाराएं हैं और एक सिस्टम है। उसमें सभी को चलना चाहिए। अब सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी बनाने के लिए कहा है तो उसमें जो भी लोग होंगे, उनके समक्ष किसानों की ओर से सभी तरह के मुद्दे रखे जाएंगे।

राकेश टिकैत ने कहा कि बृहस्पतिवार को कोर्ट में सुनवाई के दौरान जो बातें सामने आएंगी, उस पर विचार किया जाएगा। कमेटी बनती है तो उसमें सभी मुख्य बातों को रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान लगातार कृषि कानून रद्द करने और एमएसपी पर कानून बनाने की मांग कर रहे हैं।

इसके लिए किसान सरकार से वार्ता करने को तैयार हैं। अभी तक बैठकों में जितनी बातें हुई हैं, कमेटी में इन सभी बातों को भी रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश का किसान यहां बॉर्डर पर बैठा है लेकिन सरकार गांव में पंचायत और प्रेस कांफ्रेंस करने पहुंच रही है।

40 प्रतिशत किसानों को खेती से निकालने की साजिश

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष वीएम सिंह ने बुधवार को यूपी गेट पर अपना अलग मंच बनाया। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार एमएसपी पर खरीद गारंटी का कानून बनाए। यह कानून बन जाए तो नए कृषि कानूनों का अस्तित्व स्वत: समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि मांगें नहीं माने जाने तक वह किसानों के साथ यूपी गेट पर डटे रहेंगे।

बुधवार को दोपहर बाद वीएम सिंह यूपी गेट पहुंचे। उन्होंने यूूपी गेट पर हिंडन नहर की ओर अपना मंच तैयार करवाया। फिर किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि तमाम किसानों का एक ही लक्ष्य है। सरकार के काले कानून के खिलाफ अंतिम समय तक जंग लड़ना है। उन्होंने कहा कि सरकार को एमएसपी पर खरीद गारंटी का कानून बनाना ही होगा। इसकी लड़ाई वह वर्षों से लड़ रहे हैं। एमएसपी पर कानून बनाने से सरकार को नहीं व्यापारियों को घाटा होगा।

यह पूछने पर कि उन्होंने अलग मंच क्यों बनाया, इस पर उन्होंने कहा कि दो दिनों पहले संयुक्त किसान मोर्चा ने उनसे किनारा कर लिया। ऐसे में हम धरने पर नहीं आते तो किसान पूछते कि वीएम सिंह कहां चले गए। उन्होंने कहा कि अपनी लड़ाई जारी रखने के लिए तबीयत खराब होने के बाद भी यहां धरना देने आए हैं।

उनके साथ बड़ी संख्या में किसान हैं जो अंतिम दम तक डटे रहेंगे। सभी किसानों का एक ही लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि हमें अलग मंच बनाने की दरकार क्यों पड़ी, यह सवाल उनसे पूछना चाहिए जिन्होंने हमें दरकिनार किया है। उधर, इस बारे में पूछे जाने पर भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने अनभिज्ञता जाहिर की। हालांकि उन्होंने कहा कि वीएम सिंह नाराज हो सकते हैं लेकिन कृषि कानून वापस लेने पर सभी किसान एकमत और एकजुट हैं।

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