- शहर के प्रमुख चौराहे बने भ्रष्टाचार के अड्डे, गाड़ियों की चेकिंग के नाम पर की जा रही अवैध वसूली, वाहन चालक परेशान
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: महानगर के चौराहों पर यातायात पुलिस की उगाही बदस्तूर जारी है। आला पुलिस अधिकारी भी यातायात पुलिस की कारगुजारी पर लगाम नहीं लगा पा रहे हैं। इस तरह की लूटपाट से मेरठ को काफी बदनामी झेलनी पड़ रही है। बदनामी इसलिए, क्योंकि बाहरी राज्यों व शहरों के लोग यहां की यातायात पुलिस की उगाही के किस्से अपने यहां बयां कर रहे हैं। कैसे पुलिस कागजात पूरे होने के बावजूद वसूली करती है।
महानगर की आज कोई ऐसी सड़क नहीं जहां यातायात पुलिस ट्रैफिक को दुरुस्त करने की बजाय उगाही में न लगी हो। आमतौर पर यह उगाही का धंधा भीड़भाड़ वाली जगहों पर नहीं बल्कि खुली सड़कों पर ज्यादा होती है। इस वक्त कई सड़कें ऐसी हैं जो यातायात पुलिसकर्मियोें के लिए मुफीद बनी हुई हैं। इन्हीं में एक है बिजली बंबा बाइपास। यहां जुर्रानपुर के रेलवे फाटक पर अक्सर जाम के हालात बनते हैं। इससे निपटने के लिए ही चार साल पहले यहां ट्रैफिक पुलिस की तैनाती की गयी। यातायात पुलिसकर्मियों के लिए यहां तैनाती वरदान बन गयी।
यहां वाहनों से खुली वसूली शुरू हो गई। जुर्रानपुर में फाटक के पास ही एक पूर्व प्रधान का आवास है। इस आवास के कमरे में ले जाकर पुलिस वाहनों के मालिकों पर दबाव बनाती है और वसूली करती है। गुरुवार को भी यहां पूरे दिन वसूली का काम चला। हैरत की बात यह है कि इस मार्ग से दिन में कई बार पुलिस और प्रशासन के आलाधिकारी गुजरते हैं, लेकिन वह भी यातायात पुलिस की कारगुजारी को नजरअंदाज कर देते हैं। इसी तरह से रुड़की-देहरादून मार्ग पर भी यातायात पुलिस का वसूली अभियान पूरे दिन चलता देखा जा सकता है।
यहां परतापुर, बागपत बाइपास ओवरब्रिज, कंकरखेड़ा, बड़ौत रोड ओवरब्रिज और मोदीपुरम में यातायात पुलिस वालों को इसी कार्य में लिप्त देखा जा सकता है। वैसे तो इनकी ड्यूटी यातायात सुलभ रखने और जाम से निपटने के लिए लगती है, पर अपने इस कार्य को वह कभी अंजाम देते नहीं दिखते। उनकी नजर ऐसे वाहनों पर रहती है, जो बाहरी शहर या राज्य के हैं। अब आपकी गाड़ी के सभी कागज पूरे हंै और आपने सीट बेल्ट भी लगाई है, तो भी पुलिस चेकिंग की बात कहते हुए आपकी गाड़ी को हाथ देगी। गाड़ी को रुकवाकर साइड में लगवाया जाएगा, इसके बाद गाड़ी का फोटो खींचते हुए आपसे तमाम सवाल किए जाएंगे।
गाड़ी के कागज चेक किए जाएंगे। खामियां मिलने पर चालान की बात कहते हुए आपको साइड में ले जाकर काम की बात की जाएगी। यह सच्चाई जनवाणी की टीम के सामने तब आई, जब शहर के चौराहों का भ्रमण किया गया। जिसमें देखने को मिला कि शहर की सबसे बड़ी समस्या जाम पर यातायात पुलिस कर्मियों का कोई फोकस नहीं है। ना ही यातायात व्यवस्था बनाने में ट्रैफिक कर्मियों की कोई दिलचस्पी है, उन्हें अब अपना शाम तक का टारगेट किसी तरह पूरा करना है। सरकारी खजाने से भी उनका कोई लेना-देना नहीं है,
क्योंकि उन्हें पहले अपना खजाना भरना होता है, उसके बाद वह वाहनों को रोककर हेलमेट, ट्रिपल सवारी, प्रदूषण आदि के नाम पर चालान करते है। क्योंकि चौराहों पर यातायात व्यवस्था का सारा काम तो रेड लाइट कर लेती है। यातायात पुलिस की लूट का शिकार बने कई बाहरी वाहन चालकों से पूछा गया तो बोले, आपको तो पता ही है, यह लोग ऐसे ही किसी को कहां छोड़ते हैÞ। कुछ लोगों का कहना था कि चेकिंग के नाम पर परेशान किया जाता है, चेकिंग का बहाना होता है, लेकिन इनका मकसद ही कुछ और होता है।