जनवाणी संवाददाता |
फलावदा: कस्बे में स्वास्थ्य सेवाएं रामभरोसे चल रही है। खांसी से पीड़ित किशोरी की जांच में लैब ने टाइफाइड की पुष्टि कर डाली। प्राइवेट महिला डाक्टर द्वारा कई दिन तक ड्रिप लगाकर इलाज किया गया। किशोरी के पिता ने इलाज से मरीज की हालत बिगड़ने का आरोप लगाते हुए शिकायत की है।
कस्बे में जांच और इलाज़ में शोषण का यह मामला उस वक्त पेश आया जब कस्बे के मुख्य बाजार के एक दुकानदार गुलज़ार अपनी बेटी को खांसी की शिकायत होने पर कस्बे में कलीनिक चला रही प्राइवेट महिला चिकित्सक के पास ले गया।
बकौल गुलजार महिला डॉक्टर ने किशोरी की कई की जांच नगर में संचालित जीएस पैथोलॉजी लैब से कराई।लैब संचालक ने अपनी रिपोर्ट में किशोरी को टाइफाइड की पुष्टि कर दी।गुलज़ार ने बताया कि पैट्रोल पंप के पास अपनी क्लीनिक पर महिला चिकित्सक कई दिन ड्रिप लगाकर उसकी बेटी का इलाज करती रही लेकिन मर्ज और बढ़ता गया।

क्लीनिक में इलाज के नाम पर 13 हजार रूपए का बिल अदा करके वह जान छुड़ाकर अपनी बेटी को किसी तरह शहर के नर्सिंग होम ले गया।तब जाकर इसकी बेटी की जान बची। किशोरी के पिता ने लैब की फर्जी रिपोर्ट पर लापरवाही पूर्वक इलाज करने तथा आर्थिक शोषण किए जाने का आरोप लगाया है।
उधर, उक्त महिला डॉक्टर का कहना है कि उसने तीन दिन ट्रिप लगाकर लैब की रिपोर्ट के आधार पर इलाज ज़रूर किया था लेकिन, केस बिगड़ने के आरोप गलत है। किशोरी के पिता के पास कोई सबूत नहीं है।
किशोरी के स्वस्थ पिता को भी बना दिया टाइफाइड पॉजिटिव
झोलाछाप डॉक्टर और लैब संचालकों के गठजोड़ के चलते नगर में मरीजों का खून चूस जा रहा है।लैब की गलत रिपोर्ट के कारण बेटी की हालत बिगड़ने से आहत पिता ने लैब की गुणवत्ता परखने के लिए खुद की जांच कराई तो जांच रिपोर्ट में उसे भी टाइफाइड पॉजिटिव बता दिया गया, जबकि दो अन्य लैब से उसकी रिपोर्ट नेगेटिव ही है। इस आधार पर गुलज़ार को अपनी बेटी की रिपोर्ट पर शक हो गया था। यह मामला सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग सुविधा शुल्क के एवज लैब संचालकों को संरक्षण दे रहा है।

