Friday, April 24, 2026
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बचने लायक वायरस

Ravivani 30

हेमलता म्हस्के

पांच साल पहले मुकुट की शक्ल के वायरस कोरोना ने कोविड-19 की मार्फत भारी उथल-पुथल मचाई थी। इसने दुनियाभर में इतना डर पैदा कर दिया कि अब मामूली सर्दी-जुकाम को भी तमाम एहतियातों के साथ भोगा जाता है। हाल में ‘एचएमपीवी’ नामक एक नया वायरस आया है जिसे लेकर तरह-तरह की शंका-कुशंकाएं उठ रही हैं।
एक नए वायरस का सामना करने के लिए अब देशवासियों को फिर से तैयार होना होगा। चीन में इस वायरस को लेकर भले खलबली मची हो, लेकिन अपने देश में यह फिलहाल कमजोर स्थिति में है। फिर भी इसके प्रति लापरवाही बरतना खतरे से खाली नहीं है। देश में ‘ह्यूमन मेटा न्यूमो वायरस’ (एचएमपीवी) संक्रमण के मामले सामने आने के बाद केंद्र सरकार एक्शन मोड में आ गई है।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस का जन्म चीन से हुआ था और इस बार भी ‘एचएमपीवी’ वायरस चीन से ही फैल रहा है। हालांकि कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि यह कोई नया वायरस नहीं है। नीदरलैंड में 2001 में ही इसका पता लग गया था। उसके बाद से इस पर वैज्ञानिकों ने शोध भी शुरू कर दिया था। सम-शीतोष्ण जलवायु वाले देशों में इसके मामले आते ही रहे हैं। भारत में भी अलग-अलग इलाकों में मौसम के अनुसार एक से 19 फीसदी तक यह वायरस असरकारी रहा है।

इस वायरस के कारण अस्पतालों पर बोझ बढ़ने लगा है जिसका अपना नुकसान होना लाजिमी है। कोरोना के समय भी अस्पतालों पर बेहिसाब बोझ बढ़ा था जिससे स्थिति काफी बिगड़ गई थी। कोरोना से मौजूदा माहौल को इसलिए जोड़ा जा सकता है क्योंकि ‘एचएमपीवी’ वायरस में भी कोविड-19 की तरह ही खांसी और जुकाम वाले लक्षण पाए गए हैं और यह वायरस उसी तेजी से लोगों को संक्रमित कर रहा है जितनी तेजी से पांच साल पहले कोरोना ने लोगों को बीमार किया था।

चीन की बात छोड़ दीजिए अपने देश के ही अलग-अलग हिस्सों में सात मामले सामने आ गए हैं। साफ है, संक्रमण का प्रसार हो चुका है और अगर पर्याप्त जांच होती है तो कई अन्य मामले भी सामने आ सकते हैं। लोग इसलिए भी डर रहे हैं क्योंकि कोरोना का प्रभाव भारत सहित पूरी दुनिया देख चुकी है। यही कारण है कि इस बार भी सभी को विशेष सावधानी बरतने की बात कही जा रही है। चीन ने इस वायरस को फ्लू की तरह माना है और दावा किया है कि सर्दियों के मौसम में इसके मामले आते ही रहते हैं। चीन ने पहले भी सही जानकारी नहीं दी थी और यही कहा था कि कोविड-19 नया वायरस जरूर है, लेकिन चिंता की कोई बात नहीं। मगर बाद में पूरी दुनिया की दुर्गति हो गई। फिर इस बार भी उसी तरह के बचाव के उपाय बताए जा रहे हैं जो कोरोना के समय बताए गए थे। जैसे छींकते समय मुंह को ढकना, भीड़-भाड़ वाली जगह पर जाने से बचाना, सर्दी-बुखार जैसे लक्षण आने पर घर में रहना, खूब पानी पीना और पोषक भोजन का सेवन करना आदि।

‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ (डब्ल्यूएचओ) की मुख्य वैज्ञानिक और ‘भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद’ (आईसीएमआर) की पूर्व महानिदेशक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन का कहना है कि यह एक ज्ञात वायरस है, जो ज्यादातर हल्के श्वसन संक्रमण का कारण बनता है। रोगजनक का पता लगाने में जल्दीबाजी करने की बजाय हमें सर्दी होने पर सामान्य सावधानी बरतनी चाहिए। भारत में अब तक इससे किसी की मौत की सूचना नहीं है।

केंद्र सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि यह वायरस सिर्फ बच्चों में नहीं, बल्कि सभी उम्र के लोगों में हो सकता है। अभी तक सात मामले कर्नाटक, गुजरात तमिलनाडु और महाराष्ट्र से आए हैं। नागपुर में ‘एचएमपीवी’ के दो संदिग्ध मामले आए हैं। महाराष्ट्र में तो एक वकील ने बाकायदा हाईकोर्ट की नागपुर पीठ में एक याचिका दाखिलकर ‘एचएमपीवी’ वायरस पर संज्ञान लेने और राज्य सरकार को तत्काल कदम उठाने का निर्देश देने की मांग की है। वकील रंग भंडारकर ने हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा है कि 2020 में हाइकोर्ट ने कोविड-19 महामारी का स्वयं संज्ञान लिया था और ‘एचएमपीवी’ वायरस को लेकर बढ़ती वैश्विक और क्षेत्रीय चिंताओं के बीच अब इसी तरह की कार्रवाई की जरूरत है।

उधर तमिलनाडु सरकार ने कहा है कि राज्य में ‘एचएमपीवी’ से संक्रमित मिले दोनों मरीज ठीक हैं। इसी के साथ सरकार ने कहा कि सर्दी, खांसी और बुखार से पीड़ित लोग ‘एचएमपीवी’ की जांच करवा सकते हैं, लेकिन इसके लिए कोई खास उपचार नहीं है। मास्क पहनना, दूरी बनाए रखना और हाथ साफ रखने जैसे उपायों को अपनाने के लिए लोगों को, खासकर ऐसे लक्षण वालों को प्रेरित किया जा रहा है। कर्नाटक में भी दो मामले सामने आने के बाद वहां के प्रशासन ने लोगों से कहा है कि वे घबराएं नहीं, बल्कि सावधानी बरतें। कर्नाटक में विपक्ष ने सरकार से आग्रह किया है कि वह वायरस को हल्के में ना ले, क्योंकि चीन में इसका प्रकोप बढ़ गया है।

बिहार में नीतीश सरकार ने कहा है कि ‘एचएमपीवी’ वायरस को पराजित करने के लिए कोरोना की तर्ज पर ही इंतजाम किए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों केडीएम, मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के प्राचार्य और अधीक्षक, सिविल सर्जनों को इस वायरस से बचाव के लिए कोरोना की तर्ज पर ही इंतजाम करने का निर्देश दिया है। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि स्वास्थ्य सचिव सभी सिविल सर्जनों से चर्चा करें और दिशा-निर्देश जारी करें। उत्तराखंड में स्वास्थ्य निदेशालय ने सभी जिलों को वायरस की रोकथाम और बचाव के लिए जरूरी दिशा निर्देश जारी किए हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने वर्चुअल तरीके से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों की बैठक की है। इस दौरान उन्होंने ‘एचएमपीवी’ वायरस की रोकथाम के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैलाने की सलाह दी है। केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि वह लोगों को बताएं कि कैसे बच सकते हैं। इसी के साथ केंद्र ने राज्यों से स्वांस संबंधी बीमारियों के मामलों पर नजर रखने और निगरानी की समीक्षा करने को कहा है। ‘एचएमपीवी’ वायरस सर्दियों और बसंत के शुरूआती महीनों में सभी उम्र के लोगों में संक्रमण का कारण बन सकता है। सरकारों ने सभी को सचेत करना शुरू कर दिया है। अब यह लोगों की जिम्मेदारी है कि वे कितने सतर्क रहेंगे और संयम बरतेंगे। मौजूदा वायरस भले बहुत खतरनाक नहीं है, लेकिन लापरवाही करने पर खतरनाक हो सकता है।

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