Wednesday, March 18, 2026
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क्यों आता है हर साल भगवान जगन्नाथ पर ‘ज्वर’? पढ़िए इसके पीछे की रोचक धार्मिक मान्यता

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। पुरी के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में इन दिनों एक विशेष और श्रद्धा से जुड़ी परंपरा निभाई जा रही है। मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा इन दिनों बीमार हैं। हर वर्ष स्नान पूर्णिमा के बाद ऐसा माना जाता है कि स्नान के बाद भगवान को ज्वर हो जाता है, जिसके चलते उन्हें 14 दिन का विश्राम दिया जाता है। इस अवधि को “अनवसर काल” कहा जाता है। इस दौरान मंदिर के पट आम भक्तों के लिए बंद कर दिए जाते हैं और केवल सेवायत पुजारी और वैद्यराज को ही भगवान की सेवा व उपचार हेतु प्रवेश की अनुमति होती है। इस विश्राम के बाद 27 जून 2025 को भव्य रथ यात्रा निकाली जाएगी।

माधवदास थे भगवान के परम भक्त

एक समय पुरी में माधवदास नामक एक परम भक्त रहते थे। वे प्रतिदिन भगवान जगन्नाथ की पूजा-आराधना करते थे। एक दिन उन्हें अतिसार का गंभीर रोग हो गया। इतनी कमजोरी हो गई कि चलना-फिरना भी मुश्किल हो गया, फिर भी उन्होंने किसी से सहायता नहीं ली और यथाशक्ति स्वयं सेवा करते रहे।

प्रभु ने स्वयं की अपने भक्त की सेवा

जब माधवदास बिल्कुल अशक्त हो गए, तब स्वयं भगवान जगन्नाथ एक सामान्य सेवक के रूप में उनके घर आए और उनकी सेवा करने लगे। जब माधवदास को होश आया, तो उन्होंने प्रभु को पहचान लिया। भावविभोर होकर उन्होंने पूछा “प्रभु! आप त्रिलोक के स्वामी होकर मेरी सेवा क्यों कर रहे हैं? यदि आप चाहते तो मेरा रोग ही समाप्त कर सकते थे!”

भगवान ने उत्तर दिया “भक्त की पीड़ा मुझसे देखी नहीं जाती, इसलिए स्वयं सेवा करने आया हूं। परंतु हर व्यक्ति को अपना प्रारब्ध भोगना ही पड़ता है। तुम्हारे प्रारब्ध में जो 15 दिन का रोग शेष है, वह मैं अपने ऊपर ले रहा हूं।”

रथ यात्रा पर क्यो निकलते है भगवान

इसी घटना के बाद से यह परंपरा बनी कि भगवान जगन्नाथ हर वर्ष स्नान पूर्णिमा के बाद बीमार हो जाते हैं और ‘अनवसर काल’ में विश्राम करते हैं। यही कारण है कि हर साल आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को जब भगवान स्वस्थ होते हैं, तब अपने भक्तों के बीच भ्रमण के लिए रथ यात्रा पर निकलते हैं।

रथ यात्रा का महत्व

भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दौरान भगवान श्री कृष्ण के अवतार माने जाने वाले प्रभु जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ यात्रा पर निकलते हैं। यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ नगर भ्रमण करते हैं और भक्तों को अपने दिव्य दर्शन देते हैं। सैंकड़ो लोग पुरी की सड़कों पर भगवान के रथ को खींचने के लिए आतुर रहते हैं। मान्यता है रथ यात्रा एक फलदायी धार्मिक आयोजन है, जिसमें शामिल होने से व्यक्ति की सारी मनोकामना पूरी हो जाती है। भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा हिंदू धर्म के आस्था और विश्वास का प्रतीक है।

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