जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर पर लोकसभा में जारी बहस के बीच कांग्रेस पार्टी के भीतर मतभेद और असंतोष के स्वर खुलकर सामने आने लगे हैं। जहां एक ओर पार्टी केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ नेता शशि थरूर और सांसद मनीष तिवारी को चर्चा से दूर रखे जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
सोमवार को कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें यह दावा किया गया कि उन्हें और थरूर को संसद बहस से दूर रखा गया है। पोस्ट के साथ उन्होंने 1970 की फिल्म पूरब और पश्चिम के प्रसिद्ध देशभक्ति गीत की पंक्तियां — “भारत का रहने वाला हूं, भारत की बात सुनाता हूं” — साझा कीं, जिसे कांग्रेस नेतृत्व पर कटाक्ष माना जा रहा है।
है प्रीत जहां की रीत सदा
— Manish Tewari (@ManishTewari) July 29, 2025
मैं गीत वहां के गाता हूं
भारत का रहने वाला हूं
भारत की बात सुनाता हूं
Hai preet jahaan ki reet sada
Main geet wahaan ke gaata hoon
Bharat ka rehne waala hoon
Bharat ki baat sunata hoon
– Jai Hind pic.twitter.com/tP5VjiH2aD
थरूर का ‘मौन व्रत’ और पार्टी से असहमति के संकेत
इस बहस में शामिल न होने पर जब शशि थरूर से सवाल किया गया, तो उन्होंने मुस्कराकर सिर्फ इतना कहा — “मौन व्रत।” थरूर, जो विदेश मामलों पर अपनी गहरी समझ और प्रभावशाली वक्तृत्व शैली के लिए जाने जाते हैं, चर्चा से बाहर रहने के बावजूद चुप्पी साधे हुए हैं।
थरूर पहले भी कह चुके हैं कि उनका पहला दायित्व राष्ट्र के प्रति है और पार्टी केवल देश सेवा का माध्यम है। पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर उनके हालिया बयानों को भी पार्टी लाइन से अलग माना गया है, जिससे उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद की अटकलें तेज हो गई हैं।
विदेशी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा, फिर भी चर्चा से दूर
थरूर और तिवारी दोनों हाल ही में भारत सरकार की अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक पहल के तहत भेजे गए प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे हैं। इस मिशन में फतेहगढ़ साहिब से कांग्रेस सांसद अमर सिंह भी शामिल थे, लेकिन वह भी संसद में इस मुद्दे पर चर्चा में भाग नहीं ले रहे हैं।
भाजपा ने साधा कांग्रेस पर निशाना
भाजपा ने मौके का फायदा उठाते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। पार्टी के वरिष्ठ नेता बैजयंत जय पांडा ने कहा, “आपके पास अच्छे वक्ता हैं, लेकिन पार्टी उन्हें बोलने नहीं दे रही। मेरे मित्र शशि थरूर जी बहुत अच्छे वक्ता हैं, लेकिन उन्हें आपकी पार्टी बोलने ही नहीं दे रही है।”
कांग्रेस की रणनीति पर उठ रहे सवाल
ऑपरेशन सिंदूर जैसे संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दे पर पार्टी के कुछ अनुभवी और अंतरराष्ट्रीय समझ रखने वाले नेताओं को मंच से दूर रखने पर कांग्रेस नेतृत्व की रणनीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इससे यह संकेत मिल रहा है कि पार्टी के भीतर एकरूपता की कमी है और नेतृत्व के निर्णयों को लेकर असंतोष बढ़ रहा है।
‘भारत पहले’ की सोच या पार्टी अनुशासन की चुनौती?
मनीष तिवारी और शशि थरूर जैसे नेताओं की नाराजगी कांग्रेस नेतृत्व के लिए गंभीर चेतावनी बन सकती है। ऐसे समय में जब विपक्ष सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, पार्टी के भीतर से उठ रही असहमति की आवाजें भाजपा को हमला करने का नया अवसर दे रही हैं।
लोकसभा में जारी यह बहस अब केवल ऑपरेशन सिंदूर तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि कांग्रेस के आंतरिक समीकरण और नेतृत्व की चुनौतियों का भी प्रतीक बनती जा रही है।

