नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। इस साल हरतालिका तीज का पर्व 26 अगस्त, मंगलवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। यह पर्व विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, यह दिन माता पार्वती और भगवान शिव के पुनर्मिलन का प्रतीक है। पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने कठोर तपस्या की थी। उनकी अटूट भक्ति और संकल्प से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इसी तिथि पर माता पार्वती को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था। तभी से यह पर्व अखंड सौभाग्य, दांपत्य सुख और समृद्धि की कामना हेतु मनाया जाता है।
हरतालिका तीज का व्रत सबसे कठिन व्रतों में गिना जाता है, क्योंकि इसमें पूरे दिन निर्जला उपवास रखा जाता है। व्रत का समापन (पारण) अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल हरतालिका तीज व्रत के पारण का शुभ समय क्या रहने वाला है और यह व्रत कैसे रखा जाता है।
कब किया जाएगा व्रत का पारण?
हरतालिका तीज का व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है और इसका पारण चतुर्थी तिथि पर किया जाता है। इस साल व्रत का पारण 27 अगस्त की सुबह किया जाएगा। इस दिन सूर्योदय प्रातः 05:57 बजे होगा। पारंपरिक नियमों के अनुसार महिलाएं इसी समय से व्रत का पारण कर सकती हैं।
पारण में क्या खाएं?
व्रत का पारण करते समय मीठा खाने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि मीठे से ही पारण करना चाहिए। इससे जीवन में मधुरता और सकारात्मकता आती है। इसलिए व्रत खोलते समय खीर, हलवा, सेवई, लड्डू, मालपुआ या मिठाई जैसे प्रसाद का सेवन करना चाहिए।
कैसे रखा जाता है हरतालिका तीज का व्रत?
हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
हरतालिका तीज व्रत के पारण से पहले पानी की एक बूंद भी ग्रहण करना वर्जित है। यह व्रत निर्जला रखा जाता है।
व्रत के दिन सुबह-सवेरे स्नान करने के बाद “उमामहेश्वरसायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रतमहं करिष्ये” मंत्र का उच्चारण करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है।
अगर व्रत के दौरान सूतक लग जाए तो व्रत रख सकते हैं और पूजा रात में कर सकते हैं।
इस दिन महिलाएं 24 घंटे से भी अधिक समय तक निर्जला व्रत करती हैं।
रात के समय महिलाएं जागरण करती हैं और अगले दिन सुबह विधिवत्त पूजा-पाठ करने के बाद ही व्रत का पारण करती हैं।
हरतालिका तीज व्रत को सुहागिनों के अलावा कुंवारी कन्याएं भी रखती हैं।
दान का महत्व
ऐसा माना जाता है कि हरतालिका तीज की रात व्रती स्त्रियों को जागरण करना चाहिए। व्रत पूर्ण करने के बाद श्रृंगार का सामान, जैसे बिंदी, चूड़ी, साड़ी, सिंदूर या मेहंदी आदि का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। सुहागिन स्त्रियों को यह दान करने से विशेष फल मिलता है। ऐसा करने से माता पार्वती और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में वैवाहिक सुख बना रहता है।

