नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगाने का असर गुरुवार को शेयर बाजार में साफ दिखा। शुरुआती कारोबार में निवेशकों की धारणा कमजोर रही और विदेशी पूंजी की निकासी के दबाव से सेंसेक्स व निफ्टी दोनों लाल निशान में खुले। बुधवार से लागू हुए इस नए टैरिफ के बाद भारत पर अमेरिका द्वारा लगाए गए कुल शुल्क 50 फीसदी तक पहुंच गए हैं। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार दोनों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 508.16 अंक गिरकर 80,278.38 पर आ गया। 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 157.35 अंक गिरकर 24,554.70 पर पहुंचा।
किसे हुआ नुकसान
एचसीएल टेक
एचडीएफसी बैंक
पावर ग्रिड
सन फार्मा
एनटीपीसी
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स
किसे हुआ फायदा
इटरनल
एशियन पेंट्स
टाइटन
मारुति
लार्सन एंड टुब्रो
एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को 6,516.49 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालाँकि, डीआईआई ने 7,060.37 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
इन बाजारों का हाल
एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225 सूचकांक और शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक सकारात्मक दायरे में कारोबार कर रहे थे, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग कमजोर दिखाई दिया। बुधवार को अमेरिकी बाजार सकारात्मक दायरे में बंद हुए थे। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.76 प्रतिशत गिरकर 67.53 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा, ‘भारत पर लगाया गया 50 फीसदी टैरिफ निकट भविष्य में बाजार की धारणा पर असर डालेगा, लेकिन बाजार में घबराहट की संभावना नहीं है, क्योंकि बाजार इन उच्च टैरिफ को एक अल्पकालिक विचलन के रूप में देखेगा, जिसका जल्द ही समाधान हो जाएगा। बाजार के सामने असली चुनौती उच्च मूल्यांकन और धीमी आय वृद्धि है।’
विजयकुमार ने कहा, ‘बाजार को समर्थन का सबसे मजबूत आधार डीआईआई (घरेलू संस्थागत निवेशक) की ओर से की जा रही आक्रामक खरीदारी है, जो धन से लबालब हैं। एफआईआई की ओर से की जा रही किसी भी बिकवाली को डीआईआई की ओर से की जा रही आक्रामक खरीदारी आसानी से बेअसर कर देगी।’

