Tuesday, March 17, 2026
- Advertisement -

Ahoi ashtami 2025: अहोई अष्टमी का महत्व, जानिए तारों को अर्घ्य देने का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। हर साल अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। यह व्रत करवा चौथ के चार दिन बाद आता है और विशेष रूप से माताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। व्रत के दौरान महिलाएं दिनभर उपवास करती हैं और अहोई माता की पूजा विधिपूर्वक करती हैं।

अहोई अष्टमी व्रत का पारण और महत्व

अहोई अष्टमी के दिन व्रत का पारण शाम के समय किया जाता है। पारण करने से पहले माताएं तारों को अर्घ्य देती हैं और अपने घर की संतानों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन रखा गया व्रत बच्चों के जीवन को सुखमय, लंबी आयु वाला और स्वस्थ बनाता है। इसके अलावा, इस व्रत का पालन करने से परिवार में खुशहाली, शांति और संतानों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

अहोई अष्टमी 2025 तिथि

इस साल अहोई अष्टमी कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ रही है। इस तिथि की शुरुआत 13 अक्तूबर 2025 को देर रात्रि 12:24 बजे से होगी और इसका समापन 14 अक्तूबर 2025 को सुबह 11:09 बजे तक रहेगा। इस हिसाब से, इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 13 अक्तूबर को रखा जाएगा।

पूजा शुभ मुहूर्त

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल अहोई अष्टमी की पूजा का शुभ समय सायं 5:53 बजे से 7:08 बजे तक रहेगा। इस दिन तारों को अर्घ्य देने का समय सायं 6:17 बजे तक है। वहीं, चंद्रमा उदय होने का समय रात्रि 11:20 बजे निर्धारित है। इस समय माताएं अहोई माता की विधिपूर्वक पूजा करती हैं और व्रत का पालन करती हैं।

कौन हैं अहोई माता?

अहोई माता को मां पार्वती का रूप माना जाता है। इन्हें खासतौर पर संतानों की रक्षा और उनकी लंबी उम्र देने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इनकी पूजा करने से महिलाओं की कुंडली में ऐसे योग बनते हैं, जो बांझपन, गर्भपात, संतान की असमय मृत्यु और दुष्ट संतान से जुड़ी समस्याओं को दूर करते हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार, अहोई माता का रूप साही (नेवला) के रूप में दर्शाया गया है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में एक महिला, जो अपने पुत्रों की मां थी, जंगल में मिट्टी खोदते समय गलती से साही के बच्चों को मार देती है। इसके बाद वह महिला देवी से क्षमा याचना करती है। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी उसे आशीर्वाद देती हैं कि उसकी संतान सुरक्षित रहेगी। तभी से माताएं अहोई माता की पूजा कर अपनी संतान की दीर्घायु और कल्याण की कामना करती हैं।

पूजा विधि

अहोई सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें।

घर की किसी दीवार को साफ करके उस पर कुमकुम से अहोई माता की तस्वीर बनाएं।

माता के सामने दीपक जलाएं और उनकी कथा पढ़ें।

बच्चों की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सुरक्षा की प्रार्थना करें।

शाम को जब तारे दिखाई दें, उन्हें अर्घ्य दें और मंत्रों का जाप करें।

हलवा, पूरी, मिठाई आदि भोग के रूप में माता को अर्पित करें।

पूरे परिवार के साथ पूजा करें और व्रत खोलें।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

UP: मुरादाबाद में दर्दनाक सड़क हादसा, ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकराई कार, चार युवकों की मौत

जनवाणी ब्यूरो । नई दिल्ली: भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली में जा घुसी।...

सिलेंडर बिन जलाए रोटी बनाने की कला

मैं हफ्ते में एक दिन आफिस जाने वाला हर...

सुरक्षित उत्पाद उपभोक्ता का अधिकार

सुभाष बुडनवाला हर वर्ष 15 मार्च को विश्व भर में...

पुराना है नाम बदलने का चलन

अमिताभ स. पिछले दिनों, भारत के एक राज्य और कुछ...
spot_imgspot_img