Saturday, March 14, 2026
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Bhai Dooj 2025: भाई दूज का पवित्र पर्व आज, जानिए कैसे तैयार करें थाली और पूजा सामग्री का महत्व

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और आशीर्वाद का प्रतीक यह पवित्र पर्व विशेष रूप से मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के लिए तिलक लगाती हैं और उनकी दीर्घायु, सुख-समृद्धि तथा शुभ जीवन की कामना करती हैं। इस पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है पूजा की थाली, जिसमें रखी हर वस्तु का विशेष महत्व होता है। नीचे हम बताते हैं कि इस थाली में क्या-क्या रखें, क्यों रखें, और इसे कैसे सजाएँ ताकि पूजा सुगम और शुभ बन सके।

कैसे तैयार करें भाई दूज की थाली

सबसे पहले थाली को अच्छी तरह से धोकर साफ करें और फिर उस पर हल्दी-कुमकुम से सुंदर डिजाइन या स्वस्तिक का चिन्ह बनाएं। थाली को गोल आकार में रखें। बीच में जलता हुआ दीया रखें और उसके चारों ओर बाकी पूजा सामग्री सजा दें। लाल कपड़े से ढकी थाली या स्वस्तिक बने हुए आधार पर पूजन सामग्री सजाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

भाई दूज की थाली में क्या रखना चाहिए?

भाई दूज की थाली में बहनें भाई की लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना के लिए यह वस्तुएं रखती हैं।

रोली और चावल

दीया

मिठाई

कलावा

फूल

पान का पत्ता और सुपारी

नारियल और गंगाजल

पूजा सामग्री का महत्व

भाई के माथे पर तिलक लगाने के लिए रोली और अक्षत रखें।

रोली मंगल और आशीर्वाद का प्रतीक है, जबकि अक्षत शुभता का संकेत देते हैं।

आरती के समय जलाया जाने वाला दीपक भाई के जीवन में उजाला, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक होता है।

पूजा के बाद भाई को मिठाई खिलाना शुभ माना जाता है। लड्डू, पेड़ा या गुड़ से बनी मिठाई विशेष रूप से उत्तम मानी जाती है।

कलावा भाई की कलाई पर बांधा जाने वाला रक्षा सूत्र है, जो सुरक्षा और बहन के आशीर्वाद का प्रतीक है।

गेंदे या गुलाब के फूल पूजा में सौंदर्य और पवित्रता का भाव लाते हैं।

पान का पत्ता और सुपारी पारंपरिक पूजा सामग्री के रूप में शुभ माने जाते हैं।

नारियल समृद्धि का प्रतीक है, जबकि गंगाजल से वातावरण का शुद्धिकरण किया जाता है।

भाई दूज पर क्यों दिया जाता है नारियल

भाई दूज के दिन नारियल का गोला देना शुभ माना जाता है। नारियल भाई के जीवन में सुख और सफलता लाने वाला माना गया है। यह बहन की ओर से भाई के लिए दीर्घायु और रक्षा का प्रतीक है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और भाई-बहन के प्रेम का सुंदर प्रतीक है।

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