Tuesday, March 24, 2026
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SIR: एसआईआर की घोषणा पर सियासी बवाल, बीजेपी ने विपक्ष पर साधा निशाना

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। चुनाव आयोग ने सोमवार को मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण के दूसरे चरण की घोषणा कर दी है। इस चरण में देश के 12 राज्यों में मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जाएगा। आयोग के अनुसार, इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को और अधिक सटीक, अद्यतन और त्रुटि-मुक्त बनाना है। हालांकि, आयोग की इस घोषणा के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कई विपक्षी पार्टियों ने इस कदम पर सवाल उठाए हैं। तमिलनाडु की सत्ताधारी डीएमके ने तो सीधे तौर पर चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर दिया है।

मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर डीएमके ने उठाए सवाल

डीएमके के प्रवक्ता सर्वानन अन्नादुरई ने कहा कि ‘असम में एसआईआर क्यों नहीं किया जा रहा है? एसआईआर की प्रक्रिया कब से नागरिकता जांचने की प्रक्रिया बन गई है? बिहार में चुनाव आयोग को कितने फर्जी या अवैध मतदाता मिले? कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब चुनाव आयोग को देना है।’ डीएमके प्रवक्ता ने साल 2003 को कटऑफ साल रखने पर सवाल उठाए और पूछा कि 2003 को ही क्यों आधार बनाया गया है। इससे किसे फायदा होगा। इसे लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिए गए हैं। डीएमके ने कहा कि ‘हम देख रहे हैं कि चुनाव आयोग भाजपा के साथ मिलकर काम कर रहा है और वोट चोरी में शामिल है। चुनाव आयोग की विश्वसनीयता इस समय सबसे कम है।’

पश्चिम बंगाल में भी होगी एसआईआर की प्रक्रिया

पश्चिम बंगाल में भी एसआईआर की प्रक्रिया होगी। टीएमसी ने इसे लेकर कहा कि ‘हम भी पारदर्शी मतदाता सूची के पक्ष में हैं। पूरी प्रक्रिया लोकतांत्रिक तरीके से होगी, लेकिन अगर वैध मतदाता को परेशान किया गया तो हम इसका विरोध करेंगे। राज्य सरकार, राज्य धर्म निभाएगी। हम उम्मीद करते हैं कि चुनाव आयोग राजनीतिक दबाव में ऐसा कुछ नहीं करेगा कि हमें उसका विरोध करना पड़े।’

वहीं पश्चिम बंगाल भाजपा ने टीएमसी के बयान पर निशाना साधा। भाजपा नेता केया घोष ने कहा कि भाजपा का मानना है कि बंगाल में कोई भी फर्जी या अवैध मतदाता नहीं होना चाहिए। ममता बनर्जी की सरकार एसआईआर से इसलिए डर रही है क्योंकि उनके वोटबैंक में रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिए शामिल हैं। टीएमसी को डर है कि एसआईआर के बाद अवैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हट जाएंगे।

भाजपा नेता ने कहा

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि चुनाव की गरिमा को बनाए रखना और मतदाता सूची का पुनरीक्षण करना चुनाव आयोग का संवैधानिक कर्तव्य है और हम एसआईआर के दूसरे चरण का स्वागत करते हैं, लेकिन इंडी गठबंधन इसका विरोध कर रहा है, जबकि उन्होंने खुद ही महाराष्ट्र में स्थानीय चुनाव से पहले एसआईआर कराने की मांग की है। वे एसआईआर पर निशाना साधकर अपने परिवार को बचाना चाहते हैं। भाजपा नेता दिलीप घोष ने कहा कि ‘देशहित के हर काम का विपक्षी पार्टियों द्वारा विरोध किया जाता है। एसआईआर की प्रक्रिया में किसी भी सही मतदाता का नाम नहीं कटेगा, लेकिन अैध और फर्जी मतदाताओं पर रोक लगेगी। कोई भी बांग्लादेशी भारत का मतदाता नहीं बन सकेगा। हम उम्मीद करते हैं कि राज्य सरकारें इसमें सहयोग करेंगी और अपनी जिम्मेदारी निभाएंगी।

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