सपनों की दुनिया भी अजब-गजब है। सपने इंसान को क्या-क्या दिखा दें, कुछ नहीं कह सकते, क्योंकि सपनों पर आदमी का कोई नियंत्रण नहीं रहता। अब देखिये ना,आज बेचारे दयारामजी सपने में बिहार पहुंच गए। उन्होने स्वप्न में देखा कि बिहार की सत्ता में वही नेताजी मुख्यमंत्री बन गए हैं, जिन्होंने बिहार के भोले-भाले मतदाताओं को हर घर में एक सरकारी नौकरी देने का सपना दिखाया था या कहें चुनावी वादा किया था। उन्होंने यह भी देखा कि नेताजी के शपथ लेते ही सरकारी विभाग के कर्मचारी हर घर नौकरी का नियुक्ति पत्र लेकर निकल पड़े हैं। और यथायोग्य सेवाशुल्क लेकर लोगों को नियुक्ति पत्र बांट रहे हैं।
स्वप्न में जब एक कर्मचारी दयाराम जी के पड़ोसी बुजुर्ग दंपति के यहां पहुंचे तो उन्होंने कर्मचारी को बताया कि उनके बच्चे तो विदेश में नौकरी कर रहे हैं, तो सरकार के नुमाइंदों ने बुजुर्गों को डांटते हुए कहा-आपके बच्चों को विदेश से वापस आना होगा क्योंकि जब हमारी सरकार ही नौकरी दे रही है,तो फिर उन्हे विदेश में नौकरी करने की क्या आवश्यकता है? ऐसे ही जब वे कर्मचारी एक बड़े उद्योगपति के घर पहुंचे तो उद्योगपतिजी ने बताया कि उनका तो बड़ा कारखाना है और उन्हें नौकरी की कोई जरूरत नहीं है। तब कर्मचारी ने कहा-चाहे आपका कारखाना हो या आप बड़े ब्योपारी हों, आपको सरकारी नौकरी तो करना ही पड़ेगी क्योंकि नेताजी ने बिहार के हर घर में नौकरी देने का वादा जो किया है। अब आप अपना कारखाना बंद करें और कल से सरकारी दफ्तर आएं।
दयारामजी ने सपने मेंअपनी पत्नी को महरी के सामने गिड़गिड़ाते हुए देखा क्योंकि घर की महरी ने भी अल्टिमेटम दे दिया कि वह कल से नौकरी छोड़ रही है, उसे बिहार के मुख्यमंत्री आवास पर महरी के पद वाली सरकारी नौकरी मिल रही है। उसे अब हमारे घर काम करने की जरूरत नहीं थी। उसके जैसी तमाम महिलाओं को विभिन्न नेताओं और अधिकारियों के आवास पर काम करने के नियुक्ति पत्र मिल चुके हैं। उन्होंने सपने में देखा कि जेन-जी वर्ग के लिए स्कूल और कॉलेज में नकल पर लगे सभी प्रतिबंध हटा लिए गए हैं। चूंकि बिहार का साक्षरता प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से भी कम है, यही कारण है कि राज्य में अनपढ़ और मजदूर वर्ग की संख्या अधिक है, इसलिए सरकार ने इनके लिए गाय, भैंस, बकरी और भेड़ों की विशेष खरीद की है। इन सभी मजदूरों को तबेले में और पशु चराने की सरकारी नौकरी दी गई है। गांव-गांव और शहर-शहर में कुक्कुट और मुर्गी पालन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिसमे प्रत्येक पांच मुर्गी पर एक मजदूर को सरकारी नौकर बनाया गया है।
अभी 2.87 करोड़ नौकरियों के लिए सरकार, आर्थिक व्यवस्था कैसे करेगी, यह सपना आरंभ ही हो रहा था कि दयाराम जी की पत्नी ने आवाज लगाकर उन्हें नींद से जगा दिया। बिहार के लोगों को दिखाया गया सपना और दयारामजी के द्वारा देखा गया सपना कितना सच होता है, यह तो आने वाला समय ही बतलाएगा।

