Sunday, March 22, 2026
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SC: आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पूरी, 7 नवंबर को आएगा फैसला

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आवारा कुत्तों के बढ़ते मामलों पर अहम सुनवाई की। इस दौरान पश्चिम बंगाल और तेलंगाना को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के मुख्य सचिव अदालत में मौजूद रहे। कोर्ट ने सुनवाई के बाद कहा कि वह इस मामले में 7 नवंबर को फैसला सुनाएगा।

तीन जजों की विशेष बेंच ने की सुनवाई

सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजनिया की तीन जजों वाली विशेष पीठ के समक्ष हुई। बेंच ने रिकॉर्ड में दर्ज किया कि सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिव अदालत में उपस्थित रहे। हालांकि, केरल के मुख्य सचिव की जगह प्रधान सचिव पहुंचे थे, जिसे लेकर अदालत ने उनका आवेदन स्वीकार कर लिया।

आंध्र प्रदेश से जवाब न मिलने पर कोर्ट की नाराजगी

सुनवाई के दौरान बेंच ने आंध्र प्रदेश की ओर से पेश वकील से पूछा कि पिछली तारीख पर अनुपालन हलफनामा (Compliance Affidavit) क्यों दाखिल नहीं किया गया। कोर्ट ने पशु कल्याण बोर्ड (Animal Welfare Board of India – AWBI) को भी इस मामले में पार्टी (वादी) बनाने का निर्देश दिया।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि ज्यादातर राज्यों ने अब अपने अनुपालन हलफनामे जमा कर दिए हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह 7 नवंबर को फैसला सुनाएगा।

मुख्य सचिवों को अगली सुनवाई में पेश होने की जरूरत नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 7 नवंबर की सुनवाई में मुख्य सचिवों की सशरीर पेशी आवश्यक नहीं होगी, लेकिन कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर आदेशों का अनुपालन नहीं हुआ तो वह दोबारा व्यक्तिगत पेशी का आदेश दे सकता है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने जताई थी नाराजगी

इससे पहले 27 अक्तूबर को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को आदेश दिया था कि वे 3 नवंबर को सशरीर पेश हों और यह स्पष्ट करें कि 22 अगस्त के आदेश के बावजूद अनुपालन हलफनामे क्यों दाखिल नहीं किए गए।
अदालत ने उस समय पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और दिल्ली नगर निगम (MCD) को छोड़कर किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश द्वारा अनुपालन न करने पर कड़ी नाराजगी जताई थी।

22 अगस्त का आदेश: पशु जन्म नियंत्रण नियमों पर जवाब मांगा गया था

22 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से पूछा था कि उन्होंने पशु जन्म नियंत्रण (Animal Birth Control – ABC) नियमों के अनुपालन के लिए क्या कदम उठाए हैं। इस आदेश का मकसद था — आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करना और मानव-पशु टकराव की घटनाओं को कम करना।

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