Friday, May 15, 2026
- Advertisement -

पैरेंटस बनें टीनएजर्स बच्चों के मददगार

बच्चों के सामने माता-पिता को लड़ना नहीं चाहिए क्योंकि आपसी लड़ाई से बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और कभी कभी बच्चे इसका लाभ उठाते हैं। अगर आप दोनों बहस किए बिना, लड़े बिना गृहस्थी की गाड़ी का बढ़ाते हैं तो वह समझ जाएंगे कि हम इन्हें ब्लैकमेल नहीं कर सकते, न ही बुद्धु बना सकते हैं। जब आप अकेले हों तो आपसी गिले शिकवे तभी डिस्कस करें और हल ढूंढने का प्रयास करें। रिश्तेदारों की कमियां भी बच्चों के सामने डिस्कस न करें। उन्हें भी दूसरों की कमियां ढूंढने में मजा आएगा।

नीतू गुप्ता

बच्चों को टीनएज में व्यवहार संबंधी कई समस्याएं आती हैं। पेरेंटस भी उस व्यवहार से एक हद के बाद परेशान हो जाते हैं। टीनएज में हार्मोंन संबंधी बदलाव बच्चों को चिड़चिड़ा बना देते हैं। बच्चे स्वयं को बड़ा महसूस करते हैं। उन्हें लगता है माता-पिता को जो वे कह रहे हैं, वह सभी ठीक ठीक है। अब हम बड़े हैं। मां-बाप को हमारी बात माननी चाहिए जबकि वे अभी भी अपरिपक्व होते हैं। न तो वे इतने छोटे होते हैं कि हम उनकी बात को पूरी तरह टाल सकें या बातों में फुसला सकें, न ही इतने बड़े होते हैं कि हम उनकी हर बात मानें। ऐसे में शुरूआत होती है आपस में टकराव की। अगर पेरेंटस कुछ बातों पर ध्यान दें तो टीनएज बच्चों के साथ मधुर रखने में मदद मिल सकती है।

स्वयं को ढालें

बच्चों की पसंद का ध्यान रखें। उनके खाने की पसंद का ध्यान रखें, खेलने व पहनने की पसंद का ध्यान रखें। अपनी सोच कि क्या बनना है, बच्चों को यह गेम खेलना चाहिए या इस प्रकार की ड्रेस पहननी चाहिए, उन पर न थोपें। बस उन्हें यह बताएं कि यह ठीक है या नहीं। फैसला उन पर छोड़ दें। उनकी पसंद को समझें और घर का वातावरण उसी के मुताबिक ढालने की कोशिश करें ताकि घर में शांत वातावरण बना रहे।

थोड़ी छूट दें

बच्चों को भी स्पेस चाहिए, इसलिए उन्हें अपनी पहचान बनाने के लिए थोड़ा समय और छूट दें ताकि वे समाज में जगह बना सें। इसका अर्थ यह भी नहीं कि उन्हें इतनी आजादी दे दें कि वे अपनी मर्जी के मालिक बन जाएं और बुरा भला न पहचानें। आजादी दें पर अपनी आंखें और कान खुले रखें। जहां गलती करें, प्यार से उन्हें समझाएं ताकि उन्हें अहसास हो कि माता पिता ठीक कह रहे हैं। अपनी मर्जी थोपे नहीं बल्कि उसकी भलाई बुराई से वाकिफ कराएं।

फैसले लेने का हक भी दें

बच्चे जब बड़े होने लगते हैं तो वे उम्मीद करते हैं कि पेरेंटस उनके द्वारा लिए फैसलों की कद्र करें और उनकी भावनाओं को समझें। छोटे छोटे फैसले उन्हें लेने दें जिनसे उनका हौसला बुझ़ेगा और जीवन में कुछ कर पाने की उम्मीद भी बेहतर होगी। इनसे माता-पिता और बच्चों में मधुर संबंध भी बनेंगे। उनकी हर छोटी चीज पर हम अगर फैसला लेते हैं तो उनकी पर्सनेलिटी में निखार नहीं आ पाएगा, न ही वे इंडिपेंडेंट बन पाएंगे। आत्म विश्वास बढ़ने से उनका व्यक्तित्व निखरेगा।

बच्चों को प्यार और इज्जत दें

प्यार और इज्जत दो ऐसे हथियार हैं जिनसे आप किसी भी रिश्ते में मजबूती ला सकते हैं। अगर हम ये हथियार बच्चों के साथ प्रयोग में लाएं तो बच्चे भी बदले में हमें वही देंगे जो हम उन्हें देते हैं। बच्चों को बात बात पर गुस्सा न करें, न ही उन्हें बहुत उपदेश दें। बच्चों से जिस व्यवहार की उपेक्षा आप करते हैं वैसा व्यवहार आप उनके साथ करें।

भरोसा करें

अगर हम बच्चों को अच्छी शिक्षा देंगे तो विश्वास करें कि वे कुछ गलत नहीं करेंगे। बच्चों को कुछ आजादी दें कि वे लाइफ में आगे बढ़ें पर सही रास्ते अपना कर। माता-पिता का साथ हमेशा उनके साथ है, इसका भरोसा उन्हें दिलाएं।

सहायता करें

कई बार बच्चे स्थिति को पूरी तरह समझ नहीं पाते और गलती कर बैठते हैं। ऐसे में माता पिता को धीरज बरतते हुए उनकी मदद करनी चाहिए। उन्हें डांटे-फटकारें नहीं, सही रास्ता दिखाएं। रास्ता इस तरह से दिखाएं कि उन्हें सही गलत की पहचान हो सके और आपके सही मार्गदर्शन पर वे गर्व महसूस कर सकें।

माता-पिता आपस में न लड़ें

बच्चों के सामने माता-पिता को लड़ना नहीं चाहिए क्योंकि आपसी लड़ाई से बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और कभी कभी बच्चे इसका लाभ उठाते हैं। अगर आप दोनों बहस किए बिना, लड़े बिना गृहस्थी की गाड़ी का बढ़ाते हैं तो वह समझ जाएंगे कि हम इन्हें ब्लैकमेल नहीं कर सकते, न ही बुद्धु बना सकते हैं। जब आप अकेले हों तो आपसी गिले शिकवे तभी डिस्कस करें और हल ढूंढने का प्रयास करें। रिश्तेदारों की कमियां भी बच्चों के सामने डिस्कस न करें। उन्हें भी दूसरों की कमियां ढूंढने में मजा आएगा।

spot_imgspot_img
[tds_leads title_text="Subscribe" input_placeholder="Email address" btn_horiz_align="content-horiz-center" pp_checkbox="yes" pp_msg="SSd2ZSUyMHJlYWQlMjBhbmQlMjBhY2NlcHQlMjB0aGUlMjAlM0NhJTIwaHJlZiUzRCUyMiUyMyUyMiUzRVByaXZhY3klMjBQb2xpY3klM0MlMkZhJTNFLg==" f_title_font_family="467" f_title_font_size="eyJhbGwiOiIyNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMjAiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIyMiIsInBob25lIjoiMzAifQ==" f_title_font_line_height="1" f_title_font_weight="700" msg_composer="success" display="column" gap="10" input_padd="eyJhbGwiOiIxNXB4IDEwcHgiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMnB4IDhweCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCA2cHgifQ==" input_border="1" btn_text="I want in" btn_icon_size="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxNyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTUifQ==" btn_icon_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjMifQ==" btn_radius="3" input_radius="3" f_msg_font_family="394" f_msg_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_msg_font_weight="500" f_msg_font_line_height="1.4" f_input_font_family="394" f_input_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_input_font_line_height="1.2" f_btn_font_family="394" f_input_font_weight="500" f_btn_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjExIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMCJ9" f_btn_font_line_height="1.2" f_btn_font_weight="700" f_pp_font_family="394" f_pp_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjEyIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMSJ9" f_pp_font_line_height="1.2" pp_check_color="#000000" pp_check_color_a="var(--metro-blue)" pp_check_color_a_h="var(--metro-blue-acc)" f_btn_font_transform="uppercase" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjYwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGUiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjUwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGVfbWF4X3dpZHRoIjoxMTQwLCJsYW5kc2NhcGVfbWluX3dpZHRoIjoxMDE5LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiNDAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsInBob25lIjp7ImRpc3BsYXkiOiIifSwicGhvbmVfbWF4X3dpZHRoIjo3Njd9" msg_succ_radius="2" btn_bg="var(--metro-blue)" btn_bg_h="var(--metro-blue-acc)" title_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjEyIiwibGFuZHNjYXBlIjoiMTQiLCJhbGwiOiIxOCJ9" msg_space="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIwIDAgMTJweCJ9" btn_padd="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCJ9" msg_padd="eyJwb3J0cmFpdCI6IjZweCAxMHB4In0=" f_pp_font_weight="500"]

Related articles

Unnao Case: कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से करारा झटका, आजीवन कारावास की सजा बरकार

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव दुष्कर्म...
spot_imgspot_img